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09/04/2026

सांगानेर ब्रिज का काम शुरू हो गया

04/04/2026

एक समय की बात है, 11 गाँवों में भीषण अकाल पड़ा। खेती सूख गई, मवेशी प्यास से मरने लगे और लोगों का बुरा हाल था। किसी ने सलाह दी कि पास की पहाड़ी पर एक मंदिर है, जहाँ के पुजारी विशेष हवन करते हैं। कहा जाता था कि उस हवन के बाद बारिश ज़रूर होती है।
हर गाँव से एक-एक प्रतिनिधि चुना गया। उन 11 लोगों में एक छोटा बच्चा भी था। जब वे सब मंदिर पहुँचे, तो पुजारी ने हवन शुरू किया। हवन समाप्त होने के बाद पुजारी ने भीड़ की ओर देखा और बोले, "आज बारिश तो ज़रूर होगी, लेकिन सिर्फ उसी गाँव में जहाँ का प्रतिनिधि पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आया है"।
बाकी लोग हैरान रह गए कि यह कैसे मुमकिन है? पुजारी ने कोने में बैठे उस छोटे बच्चे की ओर इशारा किया और कहा, "इस बच्चे को देखो। यह अकेला है जो अपने साथ छाता लेकर आया है। इसे पूरा विश्वास था कि जब हवन होगा, तो बारिश ज़रूर आएगी और उसे घर वापस जाने के लिए छाते की ज़रूरत पड़ेगी

03/04/2026

صحیح مسلم کی روایت کے مطابق رسول اللہ ﷺ نے فرمایا کہ بہترین دن جس پر سورج طلوع ہوتا ہے، وہ جمعہ کا دن ہے۔ اسی دن:
​حضرت آدم علیہ السلام پیدا کیے گئے۔
​اسی دن وہ جنت میں داخل کیے گئے۔
​اسی دن وہ جنت سے (زمین پر) اتارے گئے۔
​اور قیامت بھی جمعہ کے دن ہی قائم ہوگی۔

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02/04/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sk Sudhakar, Sajid Khan Khan, Narjul Shaikh, MD Musfik Alam, JosephineHiman Lamayen

02/04/2026

# पता नहीं लोगों का सोच इतना कैसे बदल गया

02/04/2026

🌹 जब हम ईद के मौके पर दिल्ली लाल किला घूमने के लिए गए थे तो टिकट के लिए कितनी परेशानी हुई थी आप इस वीडियो में देखें

हज़रत अली (र.अ) का नाम "अबू तुराब" पड़ने का वाक़िया​हज़रत अबू हाज़िम, हज़रत सहल बिन साद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत...
01/04/2026

हज़रत अली (र.अ) का नाम "अबू तुराब" पड़ने का वाक़िया
​हज़रत अबू हाज़िम, हज़रत सहल बिन साद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि हज़रत अली करम अल्लाह वजहुल करीम को "अबू तुराब" (मिट्टी वाला) से बढ़कर कोई नाम पसंद न था, और जब उन्हें इस नाम से पुकारा जाता तो वह बहुत खुश होते थे।
​रावी ने उनसे कहा:
"हमें वह वाक़िया सुनाएं कि आप (हज़रत अली) का नाम 'अबू तुराब' कैसे रखा गया?"
​उन्होंने फ़रमाया:
"एक दिन हुज़ूर नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के घर तशरीफ़ लाए, तो हज़रत अली करम अल्लाह वजहुल करीम घर में नहीं थे। आप ﷺ ने दरयाफ़्त (पूछा) किया:
​'तुम्हारा चचेरा भाई (हज़रत अली) कहां है?'
​हज़रत फ़ातिमा (र.अ) ने अर्ज़ किया:
'मेरे और उनके दरमियान कुछ बात हो गई जिस पर वह खफ़ा (नाराज़) होकर बाहर चले गए और घर पर दोपहर का आराम (क़ैलूला) भी नहीं किया।'
​हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ ने किसी शख़्स से फ़रमाया:
'जाओ तलाश करो वह कहां हैं?'
​उस शख़्स ने आकर ख़बर दी कि वह मस्जिद में सो रहे हैं। हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ हज़रत अली के पास तशरीफ़ ले गए। आप ﷺ ने देखा कि वह लेटे हुए हैं जबकि उनकी चादर उनके पहलू से नीचे गिर गई थी और उनके जिस्म पर मिट्टी लग गई थी। हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ अपने मुबारक हाथों से वह मिट्टी झाड़ते जाते और फ़रमाते जाते:
​'ऐ अबू तुराब! उठो, ऐ अबू तुराब! उठो।'"

🤲अदा ए क़र्ज़ की दुआ
31/03/2026

🤲अदा ए क़र्ज़ की दुआ

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