27/09/2026
यूं तो हिंदुस्तान के सभी राज्य अपने आप में एक अलग मुकाम रखते हैं। कोई गरीबी या पलायन के लिए जानी जाती है, तो वही राज्य कभी शिक्षा (तक्षशिला, नालंदा) और शासन के लिए जानी जाती थी... कहीं मरुस्थल की तपिश है, तो उसी में कहीं झीलों का खूबसूरत शहर भी मिल जाता है। कहीं काकीनाडा और विशाखापट्टनम (Vizag) की समंदर की लहरें इठलाती हैं, तो उसी राज्य में कडप्पा की घाटी भी मौजूद है... कहीं अमीरी की चकाचौंध दिखती है, तो कहीं आज भी गुर्बत की इन्तेहा है...
मगर इन सभी से जुदा और अनोखा कोई है, तो वो है हमारा पंजाब! ❤️
कभी पांच नदियों की वजह से इसका नाम 'पंज-आब' रहा होगा, मगर 1947 के विभाजन के बाद भी यही वो नाम था जिसे दोनों मुल्कों ने अपने-अपने पंजाब के लिए संभाल कर रखा। सच तो यह है कि 1947 में सिर्फ मुल्क का बंटवारा नहीं हुआ था, बल्कि पंजाब और बंगाल का बंटवारा हुआ था। पूरे मुल्क ने विभाजन की जो कीमत अदा की, उससे कहीं ज्यादा अकेले पंजाब ने कत्ल-ओ-गारत और अपनों को खोने का भयानक दर्द देखा।
यही नहीं, विभाजन के बाद पंजाब ने दहशतगर्दी और आतंकवाद का वो खतरनाक दौर भी झेला, जो किसी भी कौम को तबाह कर सकती थी। और फिर, एक दौर ऐसा भी आया जब साज़िश के तहत नशे की चपेट में लाकर यहां के नौजवानों को बर्बाद करने की कोशिश की गई...
पंजाब के बुलंद हौसलों के सामने हर मुसीबत छोटी पड़ गई। 'चढ़दी कला' के इस जज्बे ने हर तूफान का रुख मोड़ दिया और आज भी पंजाब पूरी शान-ओ-शौकत के साथ दुनिया के नक्शे पर जगमगा रहा है।
पंजाब के कई शहरों में घूमने के बाद, आज मुझे लुधियाना में रुकने का मौका मिला। सच कहूं, तो पंजाब में जिंदगी जीने का एक अलग ही नज़रिया है। यहाँ हर शख्स जिंदगी के हर पल को खुलकर जीता है, और साथ ही दूसरों का ख्याल रखने और सेवा करने में सबसे आगे रहता है।
इस यात्रा के दौरान मुझे बेहद आनंद आया। पंजाब की मिट्टी और यहाँ के लोगों के इस प्यार को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। उम्मीद करता हूँ, जल्द ही पंजाब दोबारा आने का मौका मिलेगा!