30/05/2026
“किसी भी विवाह या रिश्ते में सबसे बड़ा महत्व चरित्र, निष्ठा और संस्कार का होता है। यदि कोई व्यक्ति—चाहे स्त्री हो या पुरुष—व्यभिचार को अपना स्वभाव बना ले, तो उसके लिए किसी भी संबंध का सम्मान और संरक्षण करना कठिन हो जाता है।
और यदि ऐसे आचरण को परिवार का समर्थन मिलने लगे, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। माता-पिता का कर्तव्य संतान की गलतियों को छिपाना नहीं, बल्कि उन्हें सही मार्ग दिखाना है। जो परिवार केवल स्वार्थ, लालच या सामाजिक दिखावे के कारण गलत आचरण का समर्थन करता है, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी अन्याय करता है।
व्यभिचारिणी स्त्री हो या व्यभिचारी पुरुष, दोनों ही परिवार और विश्वास की नींव को कमजोर करते हैं। इसलिए विवाह से पहले केवल धन, दहेज, रूप या बाहरी चमक-दमक न देखें। व्यक्ति के चरित्र, उसके परिवार के संस्कार और सत्यनिष्ठा को भी परखें।
क्योंकि विवाह केवल दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के निर्माण का आधार होता है।”