15/07/2026
गांधी की 'तस्वीर' देख बंद हुई जुबान! निगम के किस अधिकारी ने कितनी रिश्वत लेकर साधी चुप्पी?
तृणमूल पार्षद ने ही उठाए थे अवैध निर्माण पर सवाल, अब रहस्यमयी खामोशी पर उठ रहे हैं गंभीर उंगलियां।
आसनसोल नगर निगम के गलियारों में इन दिनों एक बहुमंजिला इमारत के निर्माण को लेकर भारी हड़कंप मचा हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की किस 'तस्वीर' (करेंसी नोटों) का जादू चला कि कल तक जो जुबानें अवैध निर्माण के खिलाफ आग उगल रही थीं, वे आज अचानक फेविकोल की तरह चिपक कर बंद हो गई हैं? सबसे बड़ा झटका तो तब लगा जब सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ही एक स्थानीय पार्षद ने इस बिल्डिंग के खिलाफ सबसे पहले आवाज बुलंद की थी। लेकिन अब पार्षद महोदय की रहस्यमयी चुप्पी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। जनता पूछ रही है कि आखिर गांधी जी की तस्वीर देखते ही पार्षद और निगम अधिकारियों की जुबान पर ताला क्यों लटक गया? 2000 स्क्वायर फीट जमीन पर 'अवैध' कब्जा, कहाँ गया प्लान? मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि सरकारी और सार्वजनिक नियमों की धज्जियां उड़ाने का है। आरोप है कि इस बिल्डिंग के निर्माण के दौरान करीब 2000 स्क्वायर फीट की बेशकीमती जमीन को अवैध रूप से दखल (कब्जा) कर लिया गया।
स्थानीय नागरिकों का सीधा सवाल है:
1) क्या इस बिल्डिंग का निर्माण वाकई नगर निगम से पास हुए नक्शे (प्लान) के तहत हुआ है?
2) अगर प्लान सही है, तो 2000 स्क्वायर फीट अतिरिक्त जमीन को क्यों और किसके इशारे पर दबाया गया?
3)क्या निगम के भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर इस पूरी धांधली को अंजाम दिया गया है?
'डॉग' (जांच फाइल) खोजने से खुलेगा राज?
इलाके में दबी जुबान में चर्चा है कि अगर निगम इस बिल्डिंग के मूल दस्तावेजों और नक्शों की बारीकी से जांच (डॉग स्क्वायड या खोजी नजरों से) करे, तो भ्रष्टाचार का एक ऐसा तगड़ा पुलिंदा सामने आएगा जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन सवाल वही है—जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो जांच करेगा कौन?
अधिकारियों पर उठ रहे हैं सीधे सवाल, कितनी रिश्वत खाकर हुई लीपापोती?
इस पूरे मामले में नगर निगम के संबंधित विभाग के आला अधिकारी सीधे तौर पर कटघरे में हैं। जनता साफ शब्दों में पूछ रही है कि आखिर इस बिल्डिंग के मालिक से कितनी मोटी रकम की रिश्वत खाई गई है, जिसके दम पर इस महाघोटाले पर इतनी सफाई से लीपापोती कर दी गई?
अवैध कब्जे और नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गई इस इमारत पर अब तक निगम का बुलडोजर क्यों नहीं चला? इस पूरे मामले ने निगम की कार्यशैली और पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा तमाचा जड़ा है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस पर कोई एक्शन लेते हैं या गांधी जी की 'तस्वीर' का यह असर ऊपर तक ऐसे ही बना रहता है।