30/07/2026
2012 वाला पुराना नाटक फिर से स्टेज पर आ गया लगता है… बस इस बार किरदार थोड़े बदले हुए हैं और फूलों का गुलदस्ता “सद्भावना” का नया प्रॉप्स बन गया है।
याद कीजिए 2012: कोटद्वार से बैठे विधायक शैलेंद्र सिंह रावत को टिकट नहीं मिला, मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ज़ी को उतार दिया गया। नतीजा? सुरेंद्र सिंह नेगी ज़ी ने खंडूरी ज़ी को करीब 4600 वोटों से हरा दिया।
अंदरूनी नाराजगी, टिकट की अनदेखी और “हमारा आदमी नहीं” वाली भावना ने काम किया था।
और हाँ, कई बार यह प्रयास भी किया जाता रहा है (और अफवाहें/आरोप भी लगाए जाते रहे हैं) कि खंडूरी जी को हराने में शैलेंद्र सिंह रावत या उनके समर्थकों का भी हाथ रहा। टिकट कटने के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी, कैंप में सेंध और “आउटसाइडर” बनाकर पेश करने वाली राजनीति का जिक्र अक्सर होता रहा है। चाहे यह साबित हो या न हो, लेकिन कोटद्वार की सियासी याददाश्त में यह अध्याय हमेशा जिंदा रहा।
अब वही शैलेंद्र सिंह रावत (जो बाद में कांग्रेस गए, फिर वापस भाजपा में लौटे और 2025 में कोटद्वार के मेयर बन गए) और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को फूलों का गुलदस्ता थामे मुस्कुरा रहे हैं। तस्वीर में “पुरानी गलतियों का प्रायश्चित” या “भविष्य की तैयारी” दोनों ही पढ़े जा सकते हैं।
2012 में “टिकट कटने” वाले शैलेंद्र अब मेयर की कुर्सी पर बैठकर पूर्व सीएम के साथ फोटो सेशन कर रहे हैं।
क्या यह “अब हम एक हैं” वाला नया अध्याय है, या कोटद्वार की अगली विधानसभा/स्थानीय राजनीति में किसी और “आउटसाइडर” या “हाईकमान फेवरिट” को सबक सिखाने की तैयारी?
फूलों का गुलदस्ता तो सौगात है, लेकिन पीछे जो संदेश जा रहा है वह साफ है — “कोटद्वार में अब स्थानीय समीकरण फिर से मजबूत हो रहे हैं”।
सीधे शब्दों में: 2012 वाली घटनाक्रम की हू-ब-हू नकल तो नहीं लगती (क्योंकि अब दोनों एक ही पार्टी में हैं), लेकिन “अंदरूनी गठजोड़, पुरानी नाराजगी को भुनाने और खंडूरी वाले अध्याय की याद दिलाने” वाली राजनीति जरूर दोहराई जा रही लगती है। तस्वीर सिर्फ मुलाकात नहीं, बल्कि कोटद्वार की सियासी जमीन पर “हमारा आदमी vs बाकी” वाली पुरानी लड़ाई का नया अध्याय है।
क्या वाकई फिर से कोई “खंडूरी वाला पल” दोहराने की कोशिश है? तस्वीर तो यही संकेत दे रही है कि कम से कम शैलेंद्र रावत और निशंक के बीच अब “फूलों वाला समझौता” हो चुका है। बाकी जनता तय करेगी कि यह गठजोड़ विकास का है या सिर्फ कुर्सी और पुरानी रंजिशों का।