05/07/2026
🌿 दितवारिया – आदिवासी समाज की कृषि परंपरा
दितवारिया आदिवासी समाज की एक प्राचीन और आस्था से जुड़ी कृषि परंपरा है। बोवनी के बाद जब खेतों में फसल अंकुरित हो जाती है, तब पहले रविवार (दितवार) को यह परंपरा निभाई जाती है।
इस दिन घर के बाहर चूल्हे पर चावल बनाए जाते हैं और खाकरी के पत्ते पर रखकर अर्पित किए जाते हैं। घर के मुख्य द्वार पर सन की रस्सी में आम और नीम की पत्तियाँ, लाल मिर्च तथा प्याज बाँधकर टांगे जाते हैं। साथ ही खेत के बीच काली मटकी में यही सामग्री रखकर उसे गाड़ दिया जाता है तथा बाँस की डाली भी स्थापित की जाती है।
हमारे बुज़ुर्गों की मान्यता है कि इस परंपरा से फसल को बुरी नज़र से रक्षा मिलती है, अच्छी वर्षा होती है और खेतों में भरपूर पैदावार होती है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, खेती और हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है।