26/05/2026
प्रैस विज्ञप्ति
(चोलथरा - सरकाघाट)
चोलथरा में पंचायती चुनाव में अव्यवस्थाओं की खुली पोल ।
उपमंडल धर्मपुर के अन्तर्गत पड़ने वाली सरौन पंचायत में अव्यवस्थाओं की पोल खुलती नज़र आई।
एक तरफ़ जहां पोलिंग बूथ तक सड़क सुविधा न होने से चमयाेलका निवासी 26 वर्षीय 100% दिव्यांग को कंधों पर उठा कर, पॉलिंग बूथ तक लाया गया, वहीं कच्चे और अस्थाई रास्ते की वज़ह से अन्य नागरिकों ख़ासकर बजुर्ग महिला और वरिष्ठ नागरिकों को, पोलिंग बूथ तक पहुंचने में अच्छी खासी परेशानी झेलना पड़ी।
दूसरी तरफ़ राष्ट्रीय उच्च निर्माण कंपनी ने पाठशाला की पुरानी सड़क को तोड़ दिया था जिसे बार बार बोलने पर भी नहीं बनाया गया। ऊपर से चोलथरा बाज़ार की तरफ़ जाने वाली सड़क की वर्तमान चौड़ाई जो पहले ही कम थी, उसे और कम कर, पोलिंग बूथ की तरफ़ कच्चा रास्ता बना दिया गया, जिसकी वज़ह से बड़ी गाड़ियों को वहां से निकलना अति मुश्किल होता है और चालकों में चिड़चिड़ा पन होने की कारण बनती हैं। और ये वही स्थान हैं जहां कुछ दिन पहले एक औरत का पांव फिसलने से वो ट्रक के नीचे आ कर गंभीर रूप से घायल हो गई थी, और उनके इलाज़ के दौरान उनकी टांग काटना पड़ी हैं। अब इसी जगह की और कम कर दिया गया है, जिससे बसो के टायर के फटने का अंदेशा भी रहता हैं।
हिमाचल दिव्यांग कल्याण समिति के प्रदेश महासचिव व सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चन्द भारद्वाज ने चुनाव आयोग से, जनता द्वारा घर बैठकर वोट देने का आग्रह किया है साथ ही वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि बूथ के बाहर भी मतदाताओं की मदद के लिए, जनसंख्या के हिसाब से 3-4 लोगों की ड्यूटी लगाने का आग्रह किया है साथ ही बैलेट पेपर के पीछे वार्ड, पंचायत या पोलिंग बूथ के नाम के बजाएं, पहचान और वोटो की गिनती के लिए, केवल विशेष कोड नंबर लिखने की बात कही है, विशेष कोड की जानकारी, चुनावी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को ही होनी चाहिए और वार्ड वाइस चुनाव परिणामों को घोषित करने के बजाए, पूरी ही पंचायत का चुनाव परिणाम घोषित करना चाहिए, जिससे लोगों में राजनीतिक मत भेदों को कम या ख़त्म किया का सके। जबतक घर से वोट देने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती, तबतक बायोमेट्रिक के माध्यम से, मतदान करवाना चाहिए, जिससे ज़ाली वोट पर पाबंदी लगाई जा सके। पोलिंग बूथ पर मतदाता के वोटर को चेक न करना, भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल पैदा करता है। चुनावों में पारदर्शिता पर नहीं बल्कि गुप्तता पर बल देना चाहिए। स्थानीय लोगों में प्रताप सिंह भारद्वाज, अजय कुमार, सोमा देवी, बिहारी लाल, लता पठानिया, अजय भारद्वाज, किरण कुमारी इत्यादि ने उपरोक्त मांगों का समर्थन कर, मौजूदा व्यवस्था को सुदृढ़ करने को मांग की है।