22/11/2025
*पूज्य प्रभु रत्नाकर जी महाराज के मुखारविंद से 2015 में सत्संग से*
जय वाल्मीकि जी 🙏🏻
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वही कौम तरक्की कर सकती हैं, जो पड़ लिख कर मुख्य धारा में खुद को ढाल ले।
प्राचीन और मध्यकालीन भारत में, पारंपरिक ग्रंथों (जैसे मनुस्मृति) ने शूद्रों और अछूतों के लिए कड़े नियम निर्धारित किए थे। उन्हें अन्य तीन वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता था। शूद्रों को वेदों के अध्ययन या सुनने की अनुमति नहीं थी। यदि वे ऐसा करने का प्रयास करते, तो उन्हें कठोर दंड का प्रावधान था। शिक्षा पर मुख्य रूप से ब्राह्मणों का अधिकार माना जाता था। दलितों (अछूतों) को तो जाति व्यवस्था से भी बाहर माना जाता था और उनके स्पर्श या छाया को अपवित्र माना जाता था, जिसके कारण उन्हें गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। सामान्य तौर पर, मुगलों के शासनकाल में भी दलितों और शूद्रों को औपचारिक शिक्षा का अधिकार या अवसर नहीं मिला था। उन्हें पढ़ने-लिखने की अनुमति नहीं थी, और वे पीढ़ियों से अशिक्षित बने रहे।
अंग्रेजों के भारत आने के बाद अंग्रेजों ने अनेकों बदलाव किए।
*1834 में लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति के तहत दलितों सहित सभी भारतीयों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिला, और कई स्कूल खोले गए जहां मुफ्त शिक्षा दी जाती थी*।
उन्हें यहां धर्म परिवर्तन कर अपनी पहचान खोनी पड़ी ।
महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्री बाई फुले जी एक स्वतंत्रत उदाहरण रहे,
वे महाराष्ट्र से थे और उनके कार्यों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बुराइयों और जाति व्यवस्था से मुक्ति दिलाना था। वे और उनकी पत्नी, सावित्रीबाई फुले, भारत में महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं, और उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्वदेशी रूप से संचालित स्कूल खोला था। उन्होंने 24 सितंबर, 1873 को दलितों और अन्य निम्न वर्गों को न्याय दिलाने के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।
बाबा साहेब बी आर अंबेडकर एक ऐसी विचारधारा जिन्होंने मूल रूप से जातिवाद की जड़े हिला कर रख दी। जिन दलितों (शूद्रों) को कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, उन्होंने संविधान लिखकर हमें समानता का अधिकार दिलवाया हम ऋणी रहेंगे बाबा साहेब के जिन्होंने हमें आज उस धर्म में जहां इंसान को इंसान कभी नहीं समझा गया उस से छुटकारा दिला कर समानता, समता, ओर शिक्षा का अधिकार, मुख्यधारा में जोड़कर हम आज शिक्षित हुए। उनके मूलमंत्र *शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो* से प्रेरणा ले आगे बढ़े ।
किसी कौम को अगर खत्म करना हो तो उसका इतिहास मिटा दो, वही हमारे साथ हुआ हमारा इतिहास मिटाया गया। वो इतिहास हमें फिर से बनाना ओर जानना पड़ेगा।
आओ #धर्मसमाज आपको आपका खोया इतिहास उजागर कर रहा है, खुद को जानो अपने इतिहास से सीखो। भगवान वाल्मीकि जी के हाथ में जो कलम है, उसे अपनी पहचान बनाए
समाज से अंधविश्वास, रूढ़िवादिता l,अनपढ़ता, पाखंडवाद आदि आडंबरों से मुक्त करें
—: आदि धर्म दूत प्रभु रत्नाकर जी महाराज
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प्रस्तुतकर्ता
*वीर संदीप बागड़ी*
#धर्मसमाज_जागरूकता_मंच
हरियाणा (भावाआधस हरियाणा)
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