प्रभु रत्नाकर योग आश्रम कुरूक्षेत्र

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प्रभु रत्नाकर योग आश्रम कुरूक्षेत्र jai valmeki jai prbhu ratnakar ji maharaj

26/11/2025

🙏आदि धर्म प्रेमियों जय वाल्मीकि जी🙏
पावन वाल्मीकि तीर्थ स्थल पर 30 कुशा से कुश (नवंबर) 2025 दिन प्रचेतावार (रविवार) को सभी वाल्मीकि धर्म प्रेमियों से विनती है कि पावन वाल्मीकि तीर्थ स्थल पर सिर्फ ओर सिर्फ आस्था बना कर ओर मर्यादा कायम करने की बात की जाए सभी अपने-अपने संगठन घर जा मोहल्लों में छोड़ कर आएं 🙏🌺👏
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#भगवान_वाल्मीकि_तीर्थ_स्थल_अमृतसर #पावन_सत्य_चिन्ह

सभी धर्म समाजियों को सादर जय वाल्मीकि।जय प्रभु रत्नाकर जी महाराज।।साथियों जैसा आप सबको विदित है कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ ...
26/11/2025

सभी धर्म समाजियों को सादर जय वाल्मीकि।
जय प्रभु रत्नाकर जी महाराज।।

साथियों जैसा आप सबको विदित है कि भगवान वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर में धर्म ध्वज को लेकर जो बेअदबी नाथ संप्रदाय द्वारा की गई है। उसी को लेकर न केवल भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज बल्कि पूरे वाल्मीकिन समाज में रोष है।

अब समस्त वाल्मीकन समाज को एकजुट होने की जरूरत है, सभी रत्नाकर विचारधारा मानने वाले धर्म समाजियों को एकजुट होने की जरूरत है क्योंकि अब भगवान वाल्मीकि तीर्थ पर *पावन सत्य चिन्ह* स्थापित करवाना है ताकि प्रभु रत्नाकर जी महाराज का सपना भी साकार हो सके।
जिसको लेकर आने वाली 30 नवंबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे सभी धर्म समाजियों को भगवान वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर पर एकत्रित होना है क्योंकि इस दिन केवल भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज ही नहीं बल्कि समस्त वाल्मीकन समाज द्वारा योगिमा अरदास महासम्मेलन व भगवान वाल्मीकि महाराज का सत्संग भी किया जाएगा। ताकि सरकार हमारी एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन देखकर हमारी मांग मानते हुए पावन सत्य चिन्ह को भगवान वाल्मीकि तीर्थ पर स्थापित करे।



*रतन हंस*
*सहायक मुख्य संचालक*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*

*महेश टाँक*
*राष्ट्रीय संचालक*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*

*विजय दिशावर*
*राष्ट्रीय संचालक*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*

*सुधीर झंझट*
*कार्यवाहक राष्ट्रीय महामन्त्री*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*

*बलबीर सूद*
*राष्ट्रीय संयुक्त मन्त्री*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*

*मोनिन्दर सूद*
*उत्तर प्रदेश प्रभारी*
*भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज (रजि.) भारत*
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Bhavaadhas Haryana
संदीप बागड़ी वाल्मीकिन
#वाल्मीकितीर्थस्थलअमृतसर #पावनसत्यचिन्ह #धर्मसमाज_जागरूकता_मंच

 #पावनसत्यचिन्ह  #जयवाल्मीकि  #प्रभुरत्नाकरजीमहाराज  #वाल्मीकितीर्थस्थलअमृतसर #अशोकलंकेश
24/11/2025

#पावनसत्यचिन्ह #जयवाल्मीकि #प्रभुरत्नाकरजीमहाराज #वाल्मीकितीर्थस्थलअमृतसर
#अशोकलंकेश

22/11/2025
*पूज्य प्रभु रत्नाकर जी महाराज के मुखारविंद से 2015 में सत्संग से*जय वाल्मीकि जी 🙏🏻 ♈♈♈♈♈♈वही कौम तरक्की कर सकती हैं, जो...
22/11/2025

*पूज्य प्रभु रत्नाकर जी महाराज के मुखारविंद से 2015 में सत्संग से*
जय वाल्मीकि जी 🙏🏻
♈♈♈♈♈♈
वही कौम तरक्की कर सकती हैं, जो पड़ लिख कर मुख्य धारा में खुद को ढाल ले।
प्राचीन और मध्यकालीन भारत में, पारंपरिक ग्रंथों (जैसे मनुस्मृति) ने शूद्रों और अछूतों के लिए कड़े नियम निर्धारित किए थे। उन्हें अन्य तीन वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) से सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता था। शूद्रों को वेदों के अध्ययन या सुनने की अनुमति नहीं थी। यदि वे ऐसा करने का प्रयास करते, तो उन्हें कठोर दंड का प्रावधान था। शिक्षा पर मुख्य रूप से ब्राह्मणों का अधिकार माना जाता था। दलितों (अछूतों) को तो जाति व्यवस्था से भी बाहर माना जाता था और उनके स्पर्श या छाया को अपवित्र माना जाता था, जिसके कारण उन्हें गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। सामान्य तौर पर, मुगलों के शासनकाल में भी दलितों और शूद्रों को औपचारिक शिक्षा का अधिकार या अवसर नहीं मिला था। उन्हें पढ़ने-लिखने की अनुमति नहीं थी, और वे पीढ़ियों से अशिक्षित बने रहे।
अंग्रेजों के भारत आने के बाद अंग्रेजों ने अनेकों बदलाव किए।
*1834 में लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति के तहत दलितों सहित सभी भारतीयों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिला, और कई स्कूल खोले गए जहां मुफ्त शिक्षा दी जाती थी*।
उन्हें यहां धर्म परिवर्तन कर अपनी पहचान खोनी पड़ी ।
महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्री बाई फुले जी एक स्वतंत्रत उदाहरण रहे,
वे महाराष्ट्र से थे और उनके कार्यों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बुराइयों और जाति व्यवस्था से मुक्ति दिलाना था। वे और उनकी पत्नी, सावित्रीबाई फुले, भारत में महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं, और उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्वदेशी रूप से संचालित स्कूल खोला था। उन्होंने 24 सितंबर, 1873 को दलितों और अन्य निम्न वर्गों को न्याय दिलाने के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।
बाबा साहेब बी आर अंबेडकर एक ऐसी विचारधारा जिन्होंने मूल रूप से जातिवाद की जड़े हिला कर रख दी। जिन दलितों (शूद्रों) को कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, उन्होंने संविधान लिखकर हमें समानता का अधिकार दिलवाया हम ऋणी रहेंगे बाबा साहेब के जिन्होंने हमें आज उस धर्म में जहां इंसान को इंसान कभी नहीं समझा गया उस से छुटकारा दिला कर समानता, समता, ओर शिक्षा का अधिकार, मुख्यधारा में जोड़कर हम आज शिक्षित हुए। उनके मूलमंत्र *शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो* से प्रेरणा ले आगे बढ़े ।
किसी कौम को अगर खत्म करना हो तो उसका इतिहास मिटा दो, वही हमारे साथ हुआ हमारा इतिहास मिटाया गया। वो इतिहास हमें फिर से बनाना ओर जानना पड़ेगा।
आओ #धर्मसमाज आपको आपका खोया इतिहास उजागर कर रहा है, खुद को जानो अपने इतिहास से सीखो। भगवान वाल्मीकि जी के हाथ में जो कलम है, उसे अपनी पहचान बनाए
समाज से अंधविश्वास, रूढ़िवादिता l,अनपढ़ता, पाखंडवाद आदि आडंबरों से मुक्त करें

—: आदि धर्म दूत प्रभु रत्नाकर जी महाराज
✍️♈🌹🙏
प्रस्तुतकर्ता
*वीर संदीप बागड़ी*
#धर्मसमाज_जागरूकता_मंच
हरियाणा (भावाआधस हरियाणा)
#धर्मसमाज_जागरूकता_मंच #रत्नाकर_जी_महाराज #ऋषिनाथ_रत्नाकर

जय वाल्मीकि जय प्रभु रत्नाकर ♈🙏🏻♈परमात्मा वाल्मीकि जी को पाने के लिए योग का रहस्य मन को वश में करना और सच्चे प्रेम से ईश...
21/11/2025

जय वाल्मीकि
जय प्रभु रत्नाकर
♈🙏🏻♈
परमात्मा वाल्मीकि जी को पाने के लिए योग का रहस्य मन को वश में करना और सच्चे प्रेम से ईश्वर के प्रति पूरी तरह समर्पित होना है। इसमें इंद्रियों पर नियंत्रण, भोजन और वाणी पर संयम, और भूमि पर शयन जैसे कठोर नियमों का पालन करना शामिल है, ताकि ध्यान भटके नहीं और लक्ष्य ईश्वर की ओर केंद्रित रहे।
*तप का सही अर्थ शारीरिक कष्ट नहीं, बल्कि अपने मन और इंद्रियों को अनुशासित करके ईश्वर की प्राप्ति की ओर ले जाना है*।
तप+योग के मुख्य रहस्य

आत्म-नियंत्रण:
*तप का मूल उद्देश्य मन और इंद्रियों को वश में करना है। इसमें कठोर व्रत और नियमों का पालन शामिल है, जैसे भूमि पर सोना, आहार का संयम, और वाणी पर नियंत्रण रखना*।
समर्पण:
*यह केवल नियमों के पालन से नहीं, बल्कि ईश्वर वाल्मीकि जी के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना से प्राप्त होता है। जब आप ईश्वर वाल्मीकि जी से प्रेम करते हैं, तो आप खुद को उन्हें समर्पित कर देते हैं, और यही समर्पण परमात्मा वाल्मीकि जी की प्राप्ति है*।
एकाग्रता:
*तप से मन को भटकाव से हटाकर पूरी तरह ईश्वर वाल्मीकि जी पर केंद्रित किया जाता है। ध्यान और एकाग्रता का यह व्यावहारिक प्रयोग परमात्मा वाल्मीकि जी को खोजने में मदद करता है*।
सच्ची भक्ति:
*तप का अंतिम लक्ष्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि परमात्मा वाल्मीकि जी को पाना होता है। सच्चा भक्त वह है जो अपना एकमात्र लक्ष्य परमात्मा वाल्मीकि जी की प्राप्ति को बनाता है और उसे प्राप्त करने के लिए तप करता है*।
गुरु का मार्गदर्शन:
*सही गुरु का मार्गदर्शन तप को सही दिशा देता है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को सिखाता है। गुरु द्वारा दिया गया नाम जाप, पूर्व संचित कर्मों को काटकर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है*।
—:आदि धर्म दूत
परम पूज्य प्रभु रत्नाकर जी महाराज 🙏🏻

प्रस्तुतकर्ता —:
वीर संदीप बागड़ी
#धर्मसमाज_जागरूकता_मंच
हरियाणा
Highlight Dravid Channel Bhavaadhas Bhavaadhas Haryana
#धर्म_समाज_जागरूकता_मंच #पावन_सत्य_चिन्ह ाल्मीकि

20/11/2025

शेर था भावाधस का, लक्ष्मण था वो बहुत महान।
बाबा जीवन सिंह के जैसा , द्रविड़ था बलवान।।
धर्म समाज का प्रचार था कर्ता , कौम का कर्ता था उद्धार।
तेरे जैसे शूरवीर का, होता नहीं जन्म बार–बार।।
जब भी कौम पे जुल्म था होता, वो बनता था पहरेदार ।
कौम की ऊँची शान था रखता, खुन में भरा था परोपकार।।
करुणा सागर वाल्मीकि जी, थे उस पर दयावान।
#प्रभु_रत्नाकर थे रहबर उसके, जो थे कृपा निधान ।।
मानवता की मिसाल बन गया, दोस्तों की थी आन । फर्ज़ निभाते- निभाते ‘एकलव्य’ वो हसकर दे गया अपनी जान।।
#लक्ष्मण_द्रविड़

Highlight Vijay Daanav

20/11/2025

भगवान को पवित्र ग्रंथों में गुरु की सहायता से ही देखा जा सकता है।
आत्मा को केवल शुद्ध बुद्धि द्वारा ही
देखा जा सकता है। बाहर से सक्रिय
रहो, लेकिन अंदर से निष्क्रिय रहो,
बाहर से कर्ता बनो, लेकिन अंदर से अकर्ता बनो, और इस प्रकार संसार
में अपनी भूमिका निभाओ।
:—प्रभु रत्नाकर जी महाराज

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