Radha soami ji

Radha soami ji satguru

01/06/2026

Radha soami ji

01/06/2026

“सत्संग मिस करना या नहीं? – छोटा सा फैसला, बड़ा असर”

“जब जिंदगी हर तरफ से दबाव दे… तब सत्संग ही वो जगह है जहाँ मन को सहारा मिलता है।”

हम सबकी जिंदगी में ऐसे समय आते हैं जब परेशानियाँ एक के बाद एक आने लगती हैं।
ऑफिस का तनाव, घर की टेंशन, लोगों की बातें… और मन इतना भारी हो जाता है कि कुछ समझ नहीं आता।

ऐसे समय में सबसे पहले जो चीज़ हम छोड़ देते हैं… वो है सत्संग जाना।

हम सोचते हैं:
👉 “अभी मन नहीं है”
👉 “थकान बहुत है”
👉 “फिर कभी चले जाएंगे”

लेकिन सच्चाई ये है…
जिस समय हम सत्संग छोड़ देते हैं, वही समय होता है जब हमें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।

सत्संग सिर्फ बैठना नहीं होता…
👉 ये एक ऊर्जा का माहौल होता है
👉 जहाँ बैठकर मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है
👉 अंदर की उलझन हल्की होने लगती है

इसे लोग “अंदर का तीर्थ” भी कहते हैं।

जैसे लोग बाहर तीर्थ स्थान पर जाकर सोचते हैं कि उनके दुख दूर हो जाएंगे…
वैसे ही सत्संग में बैठने से हमारे कर्मों का बोझ हल्का होता है।

🌸 Real Life Example (मेरा अनुभव):
मेरे साथ भी कुछ दिन पहले ऐसा ही हुआ…

हर तरफ से मानसिक दबाव था।
ऑफिस में अलग टेंशन… घर में अलग… लोगों की बातें अलग।

एक दिन तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ एक साथ आ गया हो।
3-4 बातें एक के बाद एक… मन पूरी तरह हिल गया।

मैंने 2 दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली।
घर पर थी, लेकिन मन फिर भी शांत नहीं था।

फिर मैंने मिडवीक सत्संग अटेंड किया…

👉 उसके बाद जो महसूस हुआ… वो शब्दों में बताना मुश्किल है
👉 मन हल्का हो गया
👉 परिस्थितियाँ वही थीं… पर उन्हें संभालने की ताकत आ गई

🌼 दूसरा Example (मेरी दोस्त):
मेरे पड़ोस में एक सत्संगी दोस्त हैं…
उनके घुटनों में दर्द है, इसलिए वो सेवा पर नहीं जा पा रही थीं।

धीरे-धीरे उन्होंने सत्संग जाना भी छोड़ दिया।

मैंने उन्हें समझाया:
👉 “सेवा न हो पाए तो कोई बात नहीं… पर सत्संग मत छोड़ो”

क्योंकि:
सत्संग शरीर के लिए नहीं… मन और आत्मा के लिए होता है।

अब खुशी की बात है कि वो पिछले 2 हफ्तों से फिर सत्संग जा रही हैं 😊

⚖️ ज़रूरी संतुलन (Balance):
ये भी समझना जरूरी है:

❌ ज़बरदस्ती नहीं करनी
❌ अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो खुद को मजबूर नहीं करना

👉 अगर जा नहीं सकते:

घर पर बैठकर सिमरन करें
सत्संग सुन लें
जुड़ाव जगह से नहीं… भावना से होता है।

🌟 Core Message:
सत्संग कोई मजबूरी नहीं… एक सहारा है।

जब जिंदगी भारी लगे:
👉 वहीं जाना चाहिए
👉 वहीं बैठना चाहिए

क्योंकि वहाँ समस्या खत्म नहीं होती…
पर उन्हें संभालने की ताकत मिलती है।

🌿 Outro:
अगली बार जब मन कहे:
“आज सत्संग नहीं जाना…”

तो एक बार सोच लेना:
👉 शायद आज ही वो दिन है… जब मुझे इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

आपका क्या अनुभव है?
👉 क्या कभी सत्संग ने आपको मुश्किल समय में सहारा दिया है?
👉 या कभी आपने भी तनाव के कारण सत्संग मिस किया है?

💬 कमेंट में जरूर शेयर करें
❤️ लाइक करें अगर बात दिल को लगी
📌 सेव करें ताकि जब मन भारी हो तो दोबारा पढ़ सकें
🔁 शेयर करें किसी ऐसे इंसान के साथ जो अभी परेशान है

01/06/2026

💐संगति का असर💐

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा –

” पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ |”

तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते-भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है | अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया, साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है |”

साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ,” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगति सोच समझ कर करनी चाहिए |

01/06/2026

गुरु प्यारी साध संगत जी डेरा ब्यास में सिक्योरिटी ने एक बोतल में डालकर ले जाए जा रहे जर्दे के कई पैकेट पकड़े हैं, इसी कारण रविवार को सत्संग में पानी की बोतल भी नहीं जाने दी गई। हमें बाबा जी बात मानते हुए ऐसी कोई वस्तु डेरे में नहीं ले जानी चाहिए जिस पर रोक है।
🙏🏻राधास्वामी जी🙏🏻

01/06/2026

💐आरी की कीमत💐💐*

एक बार की बात है एक बढ़ई था। वह दूर किसी शहर में एक सेठ के यहाँ काम करने गया। एक दिन काम करते-करते उसकी आरी टूट गयी। बिना आरी के वह काम नहीं कर सकता था, और वापस अपने गाँव लौटना भी मुश्किल था, इसलिए वह शहर से सटे एक गाँव पहुंचा। इधर-उधर पूछने पर उसे लोहार का पता चल गया।

वह लोहार के पास गया और बोला-

भाई मेरी आरी टूट गयी है, तुम मेरे लिए एक अच्छी सी आरी बना दो।

लोहार बोला, “बना दूंगा, पर इसमें समय लगेगा, तुम कल इसी वक़्त आकर मुझसे आरी ले सकते हो।”

बढ़ई को तो जल्दी थी सो उसने कहा, ” भाई कुछ पैसे अधिक ले लो पर मुझे अभी आरी बना कर दे दो!”

“बात पैसे की नहीं है भाई…अगर मैं इतनी जल्दबाजी में औजार बनाऊंगा तो मुझे खुद उससे संतुष्टि नहीं होगी, मैं औजार बनाने में कभी भी अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता!”, लोहार ने समझाया।

बढ़ई तैयार हो गया, और अगले दिन आकर अपनी आरी ले गया।

आरी बहुत अच्छी बनी थी। बढ़ई पहले की अपेक्षा आसानी से और पहले से बेहतर काम कर पा रहा था।

बढ़ई ने ख़ुशी से ये बात अपने सेठ को भी बताई और लोहार की खूब प्रसंशा की।

सेठ ने भी आरी को करीब से देखा!

“इसके कितने पैसे लिए उस लोहार ने?”, सेठ ने बढ़ई से पूछा।

“दस रुपये!”

सेठ ने मन ही मन सोचा कि शहर में इतनी अच्छी आरी के तो कोई भी तीस रुपये देने को तैयार हो जाएगा। क्यों न उस लोहार से ऐसी दर्जनों आरियाँ बनवा कर शहर में बेचा जाये!

अगले दिन सेठ लोहार के पास पहुंचा और बोला, “मैं तुमसे ढेर सारी आरियाँ बनवाऊंगा और हर आरी के दस रुपये दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है… आज के बाद तुम सिर्फ मेरे लिए काम करोगे। किसी और को आरी बनाकर नहीं बेचोगे।”

“मैं आपकी शर्त नहीं मान सकता!” लोहार बोला।

सेठ ने सोचा कि लोहार को और अधिक पैसे चाहिए। वह बोला, “ठीक है मैं तुम्हे हर आरी के पन्द्रह रूपए दूंगा….अब तो मेरी शर्त मंजूर है।”

लोहार ने कहा, “नहीं मैं अभी भी आपकी शर्त नहीं मान सकता। मैं अपनी मेहनत का मूल्य खुद निर्धारित करूँगा। मैं आपके लिए काम नहीं कर सकता। मैं इस दाम से संतुष्ट हूँ इससे ज्यादा दाम मुझे नहीं चाहिए।”

“बड़े अजीब आदमी हो…भला कोई आती हुई लक्ष्मी को मना करता है?”, व्यापारी ने आश्चर्य से बोला।

लोहार बोला, “आप मुझसे आरी लेंगे फिर उसे दुगने दाम में गरीब खरीदारों को बेचेंगे। लेकिन मैं किसी गरीब के शोषण का माध्यम नहीं बन सकता। अगर मैं लालच करूँगा तो उसका भुगतान कई लोगों को करना पड़ेगा, इसलिए आपका ये प्रस्ताव मैं स्वीकार नहीं कर सकता।”

सेठ समझ गया कि एक सच्चे और ईमानदार व्यक्ति को दुनिया की कोई दौलत नहीं खरीद सकती। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है।

अपने हित से ऊपर उठ कर और लोगों के बारे में सोचना एक महान गुण है। लोहार चाहता तो आसानी से अच्छे पैसे कमा सकता था पर वह जानता था कि उसका जरा सा लालच बहुत से ज़रूरतमंद लोगों के लिए नुक्सानदायक साबित होगा और वह सेठ के लालच में नहीं पड़ता।

*शिक्षा*

अगर ध्यान से देखा जाए तो लोहार की तरह ही हममे से अधिकतर लोग जानते हैं कि कब हमारे स्वार्थ की वजह से बाकी लोगों को नुक्सान होता है पर ये जानते हुए भी हम अपने फायदे के लिए काम करते हैं। हमें इस बर्ताव को बदलना होगा, बाकी लोग क्या करते हैं इसकी परवाह किये बगैर हमें खुद ये निर्णय करना होगा कि हम अपने फायदे के लिए ऐसा कोई काम न करें जिससे औरों को तकलीफ पहुँचती हो।
Radha Swami Ji👏👏
राधा सवामी जी...🙏🏽🙏🏽
ਰਾਧਾ ਸੁਆਮੀ ਜੀ...👏👏




*आज के दिन 1 जून 1990 को हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी 40 साल संगत की सेवा, सत्संग और नाम का प्रचार करने के बाद 73 साल की उम...
01/06/2026

*आज के दिन 1 जून 1990 को हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी 40 साल संगत की सेवा, सत्संग और नाम का प्रचार करने के बाद 73 साल की उम्र भोग कर ज्योति जोत समा गए थे। आप ने लगभग 12,92,699 जीवों को नामदान की बख़्शिश की।*🌹🙏🌹

01/06/2026

*आज के दिन 1 जून 1990 को हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी 40 साल संगत की सेवा, सत्संग और नाम का प्रचार करने के बाद 73 साल की उम्र भोग कर ज्योति जोत समा गए थे। आप ने लगभग 12,92,699 जीवों को नामदान की बख़्शिश की।*🌹🙏🌹 #

01/06/2026

beas security ne pakda gutka le zane vali sangat ko

31/05/2026

डेरा ब्यास में सुरक्षा व्यवस्था और हुई कड़ी, सत्संग पंडाल में लेडीज पर्स ले जाने पर लगी रोक, इस बारे ब्यास में आज सेवादारों को हिदायतें भी दी।
🙏🏻राधास्वामी जी🙏🏻

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