06/06/2026
विश्व योगासन चैंपियनशिप के माध्यम से योग की एक खेल के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमक।
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खुशी इतनी कि उसे बयान करते हुए उत्सुकता और उमंग भरा एहसास है कि आसमान छूने को मन करता है। यह मेरे जैसे व्यक्ति के ही लिए नहीं बल्कि पूरे भारत के नागरिकों के लिए गौरवशाली पल है। गुजरात के अहमदाबाद में 4 से 8 जून 2026 तक आयोजित होने वाली विश्व योगासन प्रतियोगिता की शुरुआत एक गरिमामय वातावरण में हुई। इसका वर्चुअल उद्घाटन भारत के माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्रीमान नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया। भारत के खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री माननीय श्री मनसुख मांडविया जी की उपस्थिति में इन खेलो ने नई उच्चाइयों को छुआ। योगासन को विश्व स्तर तक पहुंचाने में सहयोग केंद्र सरकार द्वारा दिया गया। योगासन को आसन प्राणायाम से निकालकर एक महत्वपूर्ण स्पोर्ट्स के रूप में जिला स्तर से विश्व स्तर तक पहुंचाने में पतंजलि योग पीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्व योगासन फेडरेशन के अध्यक्ष योगगुरु माननीय स्वामी रामदेव जी का योगदान और अथक मेहनत हम भारतीयों के लिए गौरव का विषय है। योगगुरु स्वामी रामदेव जी ने न केवल योग को विश्व स्तर पर लोगों के घर घर तक पहुंचाने का कठिन कार्य किया, बल्कि योगासन को खेलकूद के रूप में विकसित कर वर्ल्ड लेवल पर पहुंचाने का गौरवपूर्ण कार्य किया। इस तरह हम भारतीय ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर ऐसे लाखों युवाओं को योगासन में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। यह एक अनोखा स्पोर्ट्स है जो न केवल स्वास्थवर्धक गतिविधि से भरा है, बल्कि इसी खेल के माध्यम से विश्व स्तर पर युवाओं को मेडल जीतने के अवसर प्राप्त होगा। आज योगगुरु स्वामी रामदेव जी के कारण योगासन अपने को स्वस्थ रखने के लिए ही नहीं, बीमारियों से दूर रहने का जरिया ही नहीं, शरीर को डिटॉक्स करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि इस अभ्यास के द्वारा योगासन में जिला स्तर, राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर पर तथा विश्व स्तर पर अपने अनोखे अभ्यास से मेडल जीतने के भी बेहतरीन अवसर मिलेगा। विश्व योगासन फेडरेशन के महासचिव माननीय डॉक्टर जयदीप आर्य जी ने योग के विभिन्न आसनों को मोतियों की एक माला में पिरोने का कार्य करते हुए, विभिन्न तरह के आसनों को व्यक्तिगत , युगल वा समूह प्रतियोगिता के रूप में विकसित किया है, जिसमें पारंपरिक योगासनों को एकल, युगल व ग्रुप प्रतियोगिता के रूप में विकसित किया। इसके अलावा व्यक्तिगत लेग बैलेंस, हैंड बैलेंस, फॉरवर्ड बैंड, बैकवर्ड बैंड, रिधमिक आसन की प्रतियोगिता के रूप में तैयार किया। यह कार्य डॉक्टर जयदीप आर्य जी की अथक मेहनत से किया गया। योगासन की विभिन्न प्रतियोगिता के लिए नियम तय करना, योगासन के लिए कोचेस तथा रेफरी का चयन वा उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी विश्व योगासन फेडरेशन के महासचिव एवं हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन डॉक्टर जयदीप आर्य जी द्वारा ही किया गया। विश्व स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन करने के लिए सभी प्रकार के जरूरी इंफ्रा के लिए भी व्यवस्था बनाई। इस प्रकार यह पहली विश्व योगासन प्रतियोगिता आयोजित करने का अवसर अहमदाबाद को मिला। योगासन केवल खेल ही नहीं है बल्कि ये मनुष्य जीवन को श्रेष्ठता के नए आयाम देने वाला है। विश्व योगासन प्रतियोगिता में चार प्रकार की मुख्य प्राथमिक डिसिप्लिन जैसे ट्रेडिशनल योगासन प्रतियोगिता, आर्टिस्टिक योगासन प्रतियोगिता, रिधमिक योगासन प्रतियोगिता और एथलेटिक योगासन प्रतियोगिता को शामिल किया गया, जिसमें अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। जिस योग को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 21 जून को प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय वर्ष 2015 में लिया गया था, वही आज विश्व स्तर पर चैंपियनशिप के रूप में हमारे सामने है। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। योग शब्द संस्कृत की युज धातु से बनता है जिसमें इसका मतलब अलग अलग है, इसका अर्थ जोड़ना, या जुड़ना है या युज समाधौ अर्थात योग का अर्थ ध्यान कि ओर जाना है, समाधि की ओर जाना है यानि पूरे फोकस से कोई कार्य करना भी है। श्रीमद्भगवद् गीता के दूसरे अध्याय के 50 वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण जी महाराज ने उपदेशित किया है कि योग से हर प्रकार की क्रियाएं कुशलता पूर्वक सम्पन्न की जाती है। योग अगर जुड़ना है तो पॉजिटिविटी से खुद को जोड़ना है, ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ना है और योग अगर युज समाधौ है तो वो परम एकाग्रता अर्थात समाधि के ओर ले जाती है। योग का अर्थ प्रकृति से ऊर्जा से जुड़ना है और परम एकाग्रता में जाना भी है। योग, मदर ऑफ स्पोर्ट्स भी मानी जाती है क्योंकि योगासन ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भीतरी अंगों को सशक्त बना सकते है। योग आसन प्राणायाम के द्वारा अन्य खेलो में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया जा सकता है क्योंकि आसन से शरीर लचीला बनता है, प्राणायाम से फेफड़ों की शक्ति बढ़ाई जाती है, प्राण ऊर्जा को सशक्त किया जाता है, ध्यान एकाग्रता के द्वारा फोकस बनाने के लिए आवश्यक है। जब योगासन ही खुद में स्पोर्ट्स बन जाएगा, तो समझो जो लोग योग को धीमी गतिविधि के रूप में लेते थे, वो भी अब योगासन को स्पोर्ट्स के रूप में पाएंगे तो समझो, कितना लाभ होने वाला है। वास्तव में योगासन ह्यूमन डेवलपमेंट का एक सशक्त माध्यम है, इसे सदैव ध्यान में रखना है। आज जब हम भारत की पुण्य धरती से योगासन को विश्व के जन जन तक खेल के रूप में लेकर जा रहे है तो समझो आम युवाओं को कितना लाभ व रोमांच होने वाला है। योग तो हमारे भारत की सदियों पुरानी लीगेसी है, जिससे न जाने कितने ही लोगों ने अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाया है, कितने ही लोगों ने अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों को ठीक किया है, अब वही ध्यान को एकाग्र करनी वाली स्किल, मानव शरीर को लचीला बनाने वाला माध्यम, अब विश्व योगासन चैंपियनशिप के माध्यम से अपनी धमक बिखेर रहा है। हम सभी भारतीय आज गौरान्वित है कि हमारे ऋषि मुनियों की दी हुई शिक्षा वर्तमान में विश्व में खेल के माध्यम से नई पीढ़ी में उतर रही है। यही तो हमारा लक्ष्य था कि कैसे योगासन को नई पीढ़ी के हर विद्यार्थी, युवा, किशोर तथा बच्चों तक लेकर जाया जाएं। विश्व योगासन के आयोजन की पटकथा ने ये सपना साकार कर दिया है और इसके योजनाकार डॉक्टर जयदीप आर्य जी ने खेलों के माध्यम से इसे विश्व स्तरीय धमक प्रदान की है। आओ मिलकर योगासन को अपने जीवन में आत्मसात करे और निरोग रहने के साथ साथ मेडल भी जीते।
जय हिंद, वंदे मातरम
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
वाइस चेयरमैन, इंडियन योग एसोसिएशन, हरियाणा चैप्टर