01/09/2026
कजरा के सोलर प्लांट ने बढ़ाई रोशनी, लेकिन कोड़ासी के लोगों के रास्ते में खड़ी कर दी दीवार!
लखीसराय। जिले के सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पीरी बाजार इलाके के घोंघी-बरियारपुर से जुड़े कोड़ासी गांव में विकास की एक बड़ी परियोजना अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। जिस कजरा सोलर पावर प्लांट को क्षेत्र के विकास और ऊर्जा के नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है, उसकी चारदीवारी ने ग्रामीणों के वर्षों पुराने मुख्य आवागमन मार्ग को ही बाधित कर दिया है।
कोड़ासी के आदिवासी परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल—आखिर जाएं तो जाएं कैसे?
ग्रामीणों के अनुसार बरियारपुर से घोंघी-कोड़ासी की ओर जाने वाला रास्ता लंबे समय से स्थानीय लोगों के आवागमन का प्रमुख माध्यम रहा है। सोलर पावर प्लांट की चारदीवारी बनने के बाद यह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। अब ग्रामीणों को दीवार के दूसरे तरफ जाने के लिए कठिन रास्तों और अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है। सामने आई तस्वीरें इस समस्या की गंभीरता को बयां करती हैं, जहां सामान्य आवागमन भी संघर्ष बन गया है।
सबसे चिंताजनक स्थिति बीमार मरीजों और बुजुर्गों की है। आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाना पहले ही चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अब रास्ता बंद होने से परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति को तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है, तब सड़क और सुगम रास्ते का अभाव जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बढ़ा सकता है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक मार्ग बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ खेती और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
विकास चाहिए, लेकिन रास्ता छीनकर नहीं
ग्रामीण सोलर पावर प्लांट जैसी बड़ी विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि विकास के साथ उनका बुनियादी अधिकार—आवागमन का रास्ता—भी सुरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है।
कजरा में बन रहा सोलर पावर प्रोजेक्ट अपने बड़े पैमाने के कारण बिहार की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में गिना जा रहा है। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार परियोजना लगभग 1,232 एकड़ में फैली है और इसकी कुल क्षमता 301 मेगावाट बताई गई है। परियोजना में बैटरी स्टोरेज की व्यवस्था भी है और इसे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि जिस परियोजना से बिहार को ऊर्जा का उजाला मिलने की उम्मीद है, उसके साये में रहने वाले ग्रामीणों के जीवन में अंधेरा क्यों बढ़े?
एक तरफ करोड़ों-अरबों की विकास परियोजना, दूसरी तरफ अपने ही गांव तक पहुंचने के लिए दीवार पार करने को मजबूर ग्रामीण—यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि विकास के जमीनी मॉडल पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
ग्रामीणों की मांग साफ है—सोलर प्लांट का काम चलता रहे, विकास भी हो, लेकिन गांव का रास्ता वापस मिले। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर वैकल्पिक एवं सुरक्षित संपर्क मार्ग उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि विकास की कीमत ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और स्वास्थ्य सुरक्षा से न चुकानी पड़े।