08/06/2026
यह घटना देश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में दिव्यांगजनों के अधिकारों और वास्तविकता के बीच मौजूद बड़े अंतर को उजागर करती है। 6 जून 2022 की शाम लगभग 5:30 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय बस स्टैंड पर एक व्हीलचेयर उपयोगकर्ता यात्री डीटीसी बस संख्या DL 1PD 8365 का इंतजार कर रहे थे। बस पहुंचने पर उन्होंने बस स्टाफ से व्हीलचेयर सहित बस में चढ़ने के लिए रैंप उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन शुरुआत में उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि बस में रैंप मौजूद ही नहीं है। जबकि उन्हें जानकारी थी कि बस में रैंप की सुविधा उपलब्ध है। लगातार आग्रह करने के बाद आखिरकार रैंप निकाला गया और उन्हें बस में प्रवेश मिल सका। पीड़ित का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि डीटीसी बसों में सफर के दौरान उन्हें अक्सर ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार ड्राइवर और कंडक्टर रैंप खोलने से इनकार कर देते हैं, बहाने बनाते हैं या फिर सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते। उनका दावा है कि �