09/06/2026
#किशोरीलाल_बौद्ध
"मिश्रा से पार्टी समाप्त हो गई..."
– अफवाहों का बाज़ार बनाम कड़वा सच!
आजकल सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक घिसा-पिटा सवाल बहुत उछाला जाता है कि—*"सतीश चन्द्र मिश्रा पार्टी में क्यों हैं? बहन जी उन्हें निकालती क्यों नहीं? उनके आने से पार्टी खत्म हो गई।"*
चूंकि हमारे लोग अक्सर विरोधियों के इस प्रोपेगैंडा में फंस जाते हैं, इसलिए आज इस नैरेटिव की धज्जियां उड़ाना और सच को सामने रखना बेहद जरूरी है। आइए, ज़रा दिमाग की बत्ती जलाकर कुछ कड़वे, व्यावहारिक और ज़मीनी सवालों के जवाब टटोलते हैं:
**1. अवसरवादिता के दौर में वफादारी की मिसाल: चाहते तो कब का 'मलाई' खा रहे होते!**
आज की राजनीति में जहाँ बड़े-बड़े नेता सुबह एक पार्टी में होते हैं और शाम को दूसरी पार्टी में मंत्री पद की शपथ ले रहे होते हैं, वहाँ सतीश चन्द्र मिश्रा की वफादारी को देखिए। वे देश के इतने बड़े और नामी वकील हैं कि उन्हें किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। अगर वह स्वार्थी होते या सिर्फ सत्ता के भूखे होते, तो किसी भी दूसरी बड़ी पार्टी में जाकर कब का केंद्र या राज्य में बड़े मंत्री पद पर बैठकर 'मलाई' खा रहे होते। लेकिन उन्होंने कठिन से कठिन समय में भी बहन जी का साथ नहीं छोड़ा। राजनीति में विचारधारा और नेतृत्व के प्रति ऐसी वफादारी बहुत कम देखने को मिलती है।
**2. सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, उनका पूरा परिवार आंदोलन के साथ खड़ा है!**
अक्सर नेता खुद एक पार्टी में होते हैं और उनका परिवार दूसरी पार्टियों से टिकट मांग रहा होता है। लेकिन मिश्रा जी के मामले में ऐसा नहीं है। उनका पूरा परिवार, यहाँ तक कि उनकी बेटियां और महिलाएं भी खुल कर मैदान में उतरीं और बहन जी के समर्थन में जनसभाएं कीं। उन्होंने अपने पूरे परिवार को इस आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ा है। क्या कोई ऐसा व्यक्ति पार्टी को खत्म करना चाहेगा जिसका पूरा परिवार ही पार्टी की साख बचाने के लिए ज़मीन पर पसीना बहा रहा हो?
**3. ब्राह्मणवाद गलत हो सकता है, लेकिन हर ब्राह्मण गलत नहीं होता!**
हमें मान्यवर कांशीराम साहब और बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को गहराई से समझना होगा। हमारा आंदोलन **'ब्राह्मणवाद' (जातिवादी मानसिकता और गैर-बराबरी)** के खिलाफ है, किसी जाति विशेष के इंसानों के खिलाफ नहीं। ब्राह्मणवाद गलत है और हमेशा रहेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर ब्राह्मण गलत है। इतिहास गवाह है कि सामाजिक आंदोलनों में हर वर्ग के संवेदनशील लोगों ने साथ दिया है। अगर कोई हमारी विचारधारा को स्वीकार करके, हमारे नेतृत्व (बहन जी) के पीछे अनुशासित होकर खड़ा है, तो उस पर सिर्फ उसकी जाति देखकर सवाल उठाना कहाँ का न्याय है?
**4. ज़रा आंखें खोलकर देखिए, आज ऐसी कौन सी पार्टी है जिसमें ब्राह्मण नहीं हैं?**
जो लोग बीएसपी में सतीश चन्द्र मिश्रा की मौजूदगी पर छाती पीटते हैं, उनसे एक सीधा सवाल है—आज देश की ऐसी कौन सी राजनीतिक पार्टी है जिसमें ब्राह्मण नेता नहीं हैं या शीर्ष पदों पर नहीं हैं? बीजेपी, कांग्रेस, सपा से लेकर हर छोटी-बड़ी पार्टी में ब्राह्मणों को पूरा प्रतिनिधित्व दिया जाता है। तो फिर बीएसपी से ही यह उम्मीद क्यों की जाती है कि वह अकेले एक वर्ग को अछूता छोड़ दे? क्या बिना सभी वर्गों को साधे कोई भी पार्टी सत्ता तक पहुँच सकती है? राजनीति व्यावहारिक समीकरणों से चलती है, कोरी भावुकता से नहीं।
**5. कानूनी और संवैधानिक मोर्चे पर पार्टी की मजबूत ढाल**
पार्टी सिर्फ रैलियों से नहीं चलती, कोर्ट-कचहरी और दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठानों में भी पैरवी की जरूरत होती है। विपरीत परिस्थितियों में जब सीबीआई, ईडी और विपक्षी दल बहन जी और हमारी पार्टी को घेरने की कोशिश करते हैं, तब कानूनी मोर्चे पर चट्टान की तरह कौन खड़ा रहता है? संकट के समय में योग्यता की कद्र की जाती है।
**6. बहन जी का फैसला अंतिम है और वे किसी के दबाव में काम नहीं करतीं!**
आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी को दुनिया उनकी सख्त प्रशासनिक क्षमता और 'आयरन लेडी' की छवि के लिए जानती है। इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े दिग्गज नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में बहन जी ने कभी दो मिनट का भी समय नहीं लिया। अगर सतीश चन्द्र मिश्रा आज भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल हैं, तो यह बहन जी की दूरगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। बहन जी के राजनीतिक विज़न पर सवाल उठाना सीधे उनके नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठाने जैसा है।
**निष्कर्ष ये है कि,:**
राजनीति भावनाओं से नहीं, बल्कि कूटनीति, संगठन और वफादारी से चलती है। जो लोग विरोधियों के बहकावे में आकर अपनी ही पार्टी के स्तंभों पर सवाल उठाते हैं, वे अनजाने में विरोधियों का ही काम आसान कर रहे होते हैं। विरोधी चाहते हैं कि हम आपस में ही उलझकर कमज़ोर हो जाएं ताकि सत्ता की चाबी कभी हमारे हाथ न आ सके।
हमें इस दुष्प्रचार की दीवार को गिराना होगा। ताकत जोड़ने में है, तोड़ने में नहीं!
**जय भीम! जय भारत! जय सर्वजन!**
BSP जिंदाबाद 🐘🐘🐘🐘🐘🐘
✍️ किशोरीलाल बौद्ध बीएसपी कार्यकर्ता
#जयभीम #बीएसपी
KishoriLal Bauddh
चेतना अंबेडकर