13/02/2026
लत असल में नशा नहीं, अधूरी जागरूकता है…
मनोविज्ञान कहता है —
लत किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं,
अपने ही भीतर की आवाज़ से दूरी है।
जब इंसान अपने खालीपन को समझने के बजाय
उसे दबाने की कोशिश करता है,
तभी लत जन्म लेती है।
नशा शराब में नहीं होता,
नशा उस राहत में होता है
जो कुछ पलों के लिए दर्द को सुन्न कर देती है।
असल मुक्ति पदार्थ छोड़ने में नहीं,
स्वयं से जुड़ने में है।
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