02/05/2025
माँ-बाप का सम्मान: जीते जी खुशी का महत्व
"अरे भाई, बुढ़ापे का कोई इलाज नहीं होता। नब्बे पार कर चुके हैं, अब बस सेवा कीजिए," डॉक्टर ने नीरज के पिता को देखकर कहा।
"डॉक्टर साहब, कुछ तो तरीका होगा। आजकल साइंस बहुत तरक्की कर चुकी है," नीरज ने चिंतित स्वर में पूछा।
डॉक्टर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "नीरज बाबू, अब दवाइयों से ज़्यादा दुआ और खुशी की जरूरत है। इन्हें खुश रखिए, यही सबसे बड़ी दवा है।" फिर वह बाहर निकल गए।
नीरज अपने पिता की हालत को लेकर बेहद परेशान था। माँ के जाने के बाद पिता ही उसका एकमात्र सहारा थे। उनके बिना जीवन की कल्पना भी उसे डराने लगी थी। बाहर हल्की बारिश हो रही थी, मानो आसमान भी उसके दुख में भीग रहा हो।
थोड़ी देर में नीरज ने खुद को संभाला और पत्नी राधिका से कहा, "राधिका, आज मूंग दाल के पकौड़े और हरी चटनी बनाओ। मैं बाजार से जलेबी लेकर आता हूँ।"
राधिका ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। दाल पहले से भिगोई हुई थी, वह फुर्ती से तैयारी में लग गई। कुछ ही देर में रसोई से पकौड़ों की खुशबू फैलने लगी। नीरज भी जलेबियाँ लेकर लौट आया और सीधे पिता के पास गया।
"पापा, आपकी पसंद का सब कुछ लाया हूँ। जलेबी खाएँगे?" नीरज ने प्यार से पूछा।
पिता ने मुस्कुराते हुए आँखें झपकाईं और धीमी आवाज में बोले, "पकौड़े बन रहे हैं क्या?"
"हाँ पापा, आपकी हर पसंद मेरी भी पसंद है। राधिका, जल्दी से पकौड़े और जलेबी ले आओ," नीरज ने आवाज लगाई।
राधिका प्लेट में गरमागरम पकौड़े और ताजगी भरी जलेबियाँ लेकर आई। नीरज ने प्यार से पकौड़ा उठाकर पिता को खिलाया।
पिता ने थोड़ा खाकर कहा, "बस... अब पेट भर गया। जलेबी का एक टुकड़ा दे दो।"
नीरज ने जलेबी का एक छोटा टुकड़ा उनके मुँह में रखा। पिता ने उसे स्नेहभरी नजरों से देखा।
"नीरज, सदा खुश रहो बेटा। मेरा दाना-पानी अब पूरा हो गया," पिता बोले।
नीरज की आँखें भीग गईं। "पापा, आपको तो सेंचुरी पूरी करनी है। आप मेरे तेंदुलकर हो," उसने हँसते हुए कहा।
पिता मुस्कुराए और बोले, "तेरी माँ पेवेलियन में इंतज़ार कर रही है... अगला मैच तुम्हारे बेटे के रूप में खेलूंगा। तब खूब खाऊंगा।"
उनकी आँखें नीरज पर टिकी रहीं... और फिर धीरे-धीरे वो बंद हो गईं।
नीरज को याद आया, पापा हमेशा कहते थे, "श्राद्ध पर कौआ बनकर खाने नहीं आऊंगा, जो खिलाना है अभी खिला दे।"
यह कहानी हमें सिखाती है कि माँ-बाप का सम्मान उनके जीते जी सेवा और प्रेम से करना चाहिए। उनके साथ बिताया हर पल अनमोल होता है।
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