25/06/2026
भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में संचालित ग्रीष्मकालीन मासिक कार्यशाला के अंतर्गत 24 जून को आयोजित दो दिवसीय समापन प्रदर्शन कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों द्वारा मनभावन प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह एवं प्रथम दिवस की मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
समापन प्रदर्शन के प्रथम दिवस पर विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं। शास्त्रीय गायन कार्यशाला की प्रस्तुति प्रशिक्षक अभिषेक कुमार त्रिपाठी, सुगम संगीत की नमन सिंह, लोकनृत्य की मोहित कपूर, तबला की तुषार सहाय, वायलिन की भानु बनर्जी, वेस्टर्न गिटार की गौरव सिंह, बांसुरी की आशु कान्ति सिन्हा, हारमोनियम की कृष्ण कुमार मौर्य, की-बोर्ड की शिवम पाण्डेय, कथक की रिनी भारद्वाज और जयशिका सिंह सहित भरतनाट्यम की वैष्णवी मिश्रा के निर्देशन में प्रतिभागियों ने अत्यंत प्रभावी प्रस्तुतियाँ दीं।
समापन कार्यक्रम में विशेष रूप से ऑटिस्टिक बच्चों की प्रस्तुति खासतौर से उल्लेखनीय रही। इसमें बालिका सिद्धि शर्मा द्वारा पहाड़ी लोकनृत्य, मीशा सिंह द्वारा कथक नृत्य और रिदम सरकार द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी गई। इन तीनों विशेष बच्चों के अभिभावकों ने विश्वविद्यालय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इन बच्चों में संगीत का सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। जो बच्चे सामान्यतः सामाजिक गतिविधियों से कतराते थे, वे इस मंच पर आत्मविश्वास के साथ आनंदपूर्वक अपनी प्रस्तुतियाँ दी, जो इस कार्यशाला की बड़ी उपलब्धि रही।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ग्रीष्मकालीन कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के लिए केवल कौशल विकास का माध्यम ही नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को सशक्त बनाने का सशक्त मंच भी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय संगीत एवं कला की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री एस.पी.सिंह ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण एवं टीम भावना का विकास करती हैं। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला में विविध विधाओं के साथ-साथ ऑटिस्टिक बच्चों के लिए विशेष नृत्य प्रशिक्षण का आयोजन विश्वविद्यालय की समावेशी एवं संवेदनशील सोच का परिचायक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।