Jaighosh

Jaighosh Culture Department, Government of Uttar Pradesh. Community cm Web Radio

Radio Jaighosh (107.8) is promoting the culture of the state of Uttar Pradesh, the department of culture Uttar Pradesh urges to setup India's First Ever Cultural Community Radio Station, Web Radio & Audio-Visual Media Centre. This Station is enhancing the culture of the state and also providing the opportunity to the tribal and the extinguishing culture art including (Dance, Drama, Music, Clothing

, Heritage, Handicrafts). It is providing a platform in order to strengthen the base model of the lifestyle and contemporary cultural Development and youth innovation of the citizens of Uttar Pradesh.

राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा कारगिल विजय दिवस पर प्रदर्शनी एवं भारतीय कला, संस्कृति, इतिहास एवं पुरातत्व के प्रख्यात विद...
26/07/2026

राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा कारगिल विजय दिवस पर प्रदर्शनी एवं भारतीय कला, संस्कृति, इतिहास एवं पुरातत्व के प्रख्यात विद्वान डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल की स्मृति में आयोजित “डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला” का शुभारंभ रविवार 26 जुलाई 2026 को हुआ। सर्वप्रथम आमंत्रित अतिथियों एवं निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ ने कारगिल शहीदों को नमन कर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। संग्रहालय द्वारा यह व्याख्यानमाला 26 जुलाई से 07 अगस्त, 2026 तक आयोजित की जा रही है। व्याख्यानमाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. के. के. थपल्याल, पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने मुख्य व्याख्यान में डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा शोध कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के दो दिवसीय उत्सव ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ अवध 2026’ का सफल आयोजन तीन प्रतिष्ठित संस्थाओं, भात...
26/07/2026

भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के दो दिवसीय उत्सव ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ अवध 2026’ का सफल आयोजन तीन प्रतिष्ठित संस्थाओं, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, भातखंडे एलुमनी एसोसिएशन और संगीत मिलन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। 24 और 25 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में आयोजित इस सांस्कृतिक संगीत महोत्सव में लगभग 100 युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने खयाल, ध्रुपद, तबला, पखावज, सितार, कथक और भरतनाट्यम जैसी विभिन्न शास्त्रीय विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी मुक्तिनाथानंद जी एवं भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। युवा गायकों ने राग बिहाग, मधुवंती, बागेश्री और यमन सहित अनेक मधुर रागों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कथक सहित भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केन्द्र बनी। इस समारोह में जल तरंग की मनभावन प्रस्तुति अन्य आकर्षण बनी। इस समारोह में कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ ही नहीं चंडीगढ़ तक के प्रतिष्ठित निर्णायक एवं शास्त्रीय कला विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था।

भूजल सप्ताह (16 से 22 जुलाई, 2026) के अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं बाबासाहेब भीमराव ...
20/07/2026

भूजल सप्ताह (16 से 22 जुलाई, 2026) के अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट एंड फैमिली स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 16 जुलाई, 2026 को ओल्ड काउंसिल हॉल, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में वृक्षारोपण, ‘जल संरक्षण एवं संग्रहालय की प्रमुख कलाकृतियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा “आने वाली पीढ़ियों हेतु सुरक्षित जल: एक सामूहिक जिम्मेदारी” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।

महाकवि कालिदास जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026 के अंतर्गत भारतेंदु नाट्य अकादमी रंगमंडल द्वारा प्रे...
16/07/2026

महाकवि कालिदास जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026 के अंतर्गत भारतेंदु नाट्य अकादमी रंगमंडल द्वारा प्रेरणादायी नाटक "काकोरी एक्शन" का यादगार मंचन, सुशील कुमार सिंह के सशक्त लेखन एवं डॉ. सुमित श्रीवास्तव के प्रभावी निर्देशन में, बुधवार 15 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित बीएनए के राज बिसारिया प्रेक्षागृह में किया गया।

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा आयोजित 16वाँ दीक्षांत समारोह दिनांक 15 जुलाई, 2026 को विश्वविद्यालय के कलामं...
15/07/2026

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा आयोजित 16वाँ दीक्षांत समारोह दिनांक 15 जुलाई, 2026 को विश्वविद्यालय के कलामंडपम प्रेक्षागृह में भव्य रूप से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित कुमार बोस रहे। इस अवसर पर माननीय मंत्री, संस्कृति एवं पर्यटन, उत्तर प्रदेश सरकार, जयवीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
#दीक्षांतसमारोह में विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए कुल 48 पदक प्रदान किए गए, जिनमें 30 स्वर्ण पदक, 09 रजत पदक एवं 09 कांस्य पदक सम्मिलित हैं। इस वर्ष का सर्वोच्च स्वर्ण पदक एम.पी.ए. कथक की छात्रा श्वेता गुप्ता को प्रदान किया गया। साथ ही 03 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि भी प्रदान की गई।
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राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की घटक इकाई के रूप में बैचलर ऑफ विजुअल आर्ट्स (B.V.A.) - पेंट...
13/07/2026

राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की घटक इकाई के रूप में बैचलर ऑफ विजुअल आर्ट्स (B.V.A.) - पेंटिंग का 4 वर्षीय प्रोफेशनल डिग्री प्रोग्राम प्रदेश भर से आए युवाओ में खासा पॉपुलर हो रहा है।

आस्था, शक्ति और साधना का दिव्य संगम। आइए जानें इस पावन शक्तिधाम की आध्यात्मिक महिमा और गौरवशाली इतिहास।जहाँ श्रद्धा, शक्...
02/07/2026

आस्था, शक्ति और साधना का दिव्य संगम। आइए जानें इस पावन शक्तिधाम की आध्यात्मिक महिमा और गौरवशाली इतिहास।

जहाँ श्रद्धा, शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम होता है। सदियों से यह पावन धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर माता सती का वाम स्कन्ध (बायाँ कंधा) गिरा था। यही कारण है कि माँ पाटेश्वरी शक्तिपीठ सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

माँ पाटेश्वरी शक्तिपीठ केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि साधना, सिद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य केंद्र भी है। यहाँ की पावन अनुभूति श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और नई ऊर्जा प्रदान करती है।

संत कबीर जयंती के पावन अवसर पर संत कबीर अकादमी, मगहर में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजि...
28/06/2026

संत कबीर जयंती के पावन अवसर पर संत कबीर अकादमी, मगहर में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित 'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' का भव्य शुभारंभ हुआ।

भव्य शोभायात्रा, दीप प्रज्ज्वलन और संत कबीर के संदेशों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।

उत्सव में मा. श्री सुभाष यदुवंश (एमएलसी) सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं विशिष्ट अतिथियों ने संत कबीर के समरसता, समानता, मानवता और सद्भाव के संदेश को आज के समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।

वक्ताओं ने नई पीढ़ी को संत कबीर की विचारधारा से जोड़ने हेतु ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

पद्मश्री कालुराम बामनिया की मनमोहक निर्गुण भजन प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। साथ ही देशभर से आए कलाकारों ने निर्गुण भजन, पंथी नृत्य, फरुवाही नृत्य, मादल वादन एवं लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से संत कबीर की वाणी को जन-जन तक पहुँचाया।

'रंग कबीर' चित्रकला कार्यशाला का भी सफल समापन हुआ, जिसमें प्रतिभागी बच्चों को सम्मानित किया गया।'निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव' का प्रथम पड़ाव मगहर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

28 जून को दूसरा पड़ाव कबीर मठ, बेलसडी (गाज़ीपुर) तथा 29 जून को अंतिम पड़ाव संत कबीर प्राकट्य स्थली, लहरतारा (वाराणसी) में आयोजित होगा।

यह यात्रा संत कबीर की निर्गुण भक्ति, सामाजिक समरसता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में संचालित ग्रीष्मकालीन मासिक कार्यशाला के अंतर्गत 24 जून को आयोजित दो दिवसीय समापन प्र...
25/06/2026

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में संचालित ग्रीष्मकालीन मासिक कार्यशाला के अंतर्गत 24 जून को आयोजित दो दिवसीय समापन प्रदर्शन कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों द्वारा मनभावन प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह एवं प्रथम दिवस की मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
समापन प्रदर्शन के प्रथम दिवस पर विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं। शास्त्रीय गायन कार्यशाला की प्रस्तुति प्रशिक्षक अभिषेक कुमार त्रिपाठी, सुगम संगीत की नमन सिंह, लोकनृत्य की मोहित कपूर, तबला की तुषार सहाय, वायलिन की भानु बनर्जी, वेस्टर्न गिटार की गौरव सिंह, बांसुरी की आशु कान्ति सिन्हा, हारमोनियम की कृष्ण कुमार मौर्य, की-बोर्ड की शिवम पाण्डेय, कथक की रिनी भारद्वाज और जयशिका सिंह सहित भरतनाट्यम की वैष्णवी मिश्रा के निर्देशन में प्रतिभागियों ने अत्यंत प्रभावी प्रस्तुतियाँ दीं।
समापन कार्यक्रम में विशेष रूप से ऑटिस्टिक बच्चों की प्रस्तुति खासतौर से उल्लेखनीय रही। इसमें बालिका सिद्धि शर्मा द्वारा पहाड़ी लोकनृत्य, मीशा सिंह द्वारा कथक नृत्य और रिदम सरकार द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी गई। इन तीनों विशेष बच्चों के अभिभावकों ने विश्वविद्यालय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इन बच्चों में संगीत का सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। जो बच्चे सामान्यतः सामाजिक गतिविधियों से कतराते थे, वे इस मंच पर आत्मविश्वास के साथ आनंदपूर्वक अपनी प्रस्तुतियाँ दी, जो इस कार्यशाला की बड़ी उपलब्धि रही।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ग्रीष्मकालीन कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के लिए केवल कौशल विकास का माध्यम ही नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को सशक्त बनाने का सशक्त मंच भी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय संगीत एवं कला की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होता है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री एस.पी.सिंह ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण एवं टीम भावना का विकास करती हैं। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला में विविध विधाओं के साथ-साथ ऑटिस्टिक बच्चों के लिए विशेष नृत्य प्रशिक्षण का आयोजन विश्वविद्यालय की समावेशी एवं संवेदनशील सोच का परिचायक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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