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11/01/2026

🤣 “भारत में शाकाहार एक डाइट नहीं, पूरा Multiverse है!” 🤣
आप किस यूनिवर्स में आते हैं? ज़रा पहचानिए खुद को 😄👇
भारतीय “शाकाहारियों” की विकसित होती 8 नहीं, बल्कि 8+ कैटेगरी 😂
1️⃣ शुद्ध शाकाहारी (Pure Vegetarian)
जो मटर पनीर को भी पहले Google करके देखते हैं – इसमें कुछ गलत तो नहीं है ना?
2️⃣ एगेटेरियन (Eggetarian)
“अंडा तो शाकाहारी ही होता है” – बोलकर आधा देश कन्विंस कर देते हैं 😆
3️⃣ केकीटेरियन (Cakeytarian)
केक में अंडा? – चल जाएगा
आमलेट? – छी! ये क्या कर दिया आपने 😄
4️⃣ ग्रेवीटेरियन (Gravyetarian)
मांस नहीं खाते,
लेकिन चिकन की ग्रेवी में रोटी ऐसे डुबोते हैं जैसे पवित्र गंगाजल हो 😂
5️⃣ रिस्ट्रिक्टेरियन (Restrictarian)
घर में: “मैं तो जन्म से शाकाहारी हूँ”
बाहर: “भाई आधा प्लेट और लगा दे” 😎
6️⃣ बूज़ीटेरियन (Boozytarian)
दारू के साथ: चिकन, मटन, फिश, सब चलेगा
दारू के बिना: “मैं तो शाकाहारी हूँ यार” 🤡
7️⃣ फोर्सीटेरियन (Forcitarian)
खुद से कभी नहीं…
पर कोई ज़्यादा ज़ोर दे दे तो:
“ठीक है, एक ही बार है” (जो हर हफ्ते हो जाता है) 😆
8️⃣ कैलेंडरटेरियन (Calendartarian)
मंगलवार: पूरी भक्ति
शनिवार: पूरा व्रत
रविवार: “आज तो पार्टी बनती है” 🍗😂
9️⃣ बोनस – फेस्टिवलटेरियन (Festivalitarian)
सावन में शुद्ध शाकाहारी
शादी में – सारे नियम स्थगित 🤣
अब बताइए…
आप किस कैटेगरी में आते हैं?
या आप Combo Pack हो? 😜
Tag करो अपने उस दोस्त को जो खुद को “शुद्ध शाकाहारी” बताता है,
लेकिन होटल मेन्यू देखते ही धर्म बदल लेता है 😂
#आपकौनसीकैटेगरी


😂




🔥 1960 से 2025 तक: भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर!जब देश आगे बढ़ता है तो उसके फैसले, उसकी नीतियाँ और उ...
11/01/2026

🔥 1960 से 2025 तक: भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर!
जब देश आगे बढ़ता है तो उसके फैसले, उसकी नीतियाँ और उसकी सोच भी इतिहास बनाती है।
आज अगर कोई पूछे कि भारत और पाकिस्तान में फर्क क्यों इतना बड़ा है, तो जवाब इन आँकड़ों में छुपा है।
1960 में
🇮🇳 भारत: 37 अरब डॉलर
🇵🇰 पाकिस्तान: 3.7 अरब डॉलर
तब अंतर था करीब 10 गुना।
और आज 2025 के अनुमान में –
🇮🇳 भारत: 4.12 ट्रिलियन डॉलर
🇵🇰 पाकिस्तान: 410 अरब डॉलर
यानी अंतर हो गया है 10 गुना से भी ज्यादा,
लेकिन इस बार भारत ट्रिलियन क्लब में है और पाकिस्तान अब भी अरब में जूझ रहा है।
यह सिर्फ नंबर नहीं हैं,
यह दो अलग-अलग रास्तों की कहानी है –
एक रास्ता विकास, स्थिरता और वैश्विक नेतृत्व का,
दूसरा रास्ता अस्थिरता, कर्ज और राजनीतिक अराजकता का।
भारत ने
✔️ शिक्षा पर निवेश किया
✔️ टेक्नोलॉजी अपनाई
✔️ लोकतंत्र को मजबूत किया
✔️ दुनिया से व्यापार बढ़ाया
और आज
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
जबकि पाकिस्तान
❌ बार-बार सैन्य दखल
❌ आर्थिक कुप्रबंधन
❌ अंतरराष्ट्रीय कर्ज पर निर्भरता
❌ राजनीतिक अस्थिरता
में फँसा रहा।
इसलिए फर्क सिर्फ GDP का नहीं है,
फर्क सोच का है,
फर्क नीति का है,
फर्क भविष्य को देखने के नज़रिए का है।
📌 राष्ट्र बंदूक से नहीं, बजट और बुद्धि से बनता है।
भारत ने यह करके दिखाया है।
📊 स्रोत:
World Bank (1960–2024)
IMF Estimates (2025)



#भारतकीताकत








“एक इंसान की सालाना कमाई = 668 करोड़ रुपये… और कंपनी की कमाई = 34 लाख करोड़ से ज़्यादा!ये है आज की कॉर्पोरेट दुनिया की अ...
10/01/2026

“एक इंसान की सालाना कमाई = 668 करोड़ रुपये… और कंपनी की कमाई = 34 लाख करोड़ से ज़्यादा!
ये है आज की कॉर्पोरेट दुनिया की असली तस्वीर।”
हाल ही में Apple ने 2025 के लिए अपने टॉप कर्मचारियों की सैलरी डिटेल्स जारी की है।
और CEO टिम कुक की सैलरी सुनकर तो आम आदमी का दिमाग घूम जाए।
👉 टिम कुक की 2025 की कमाई:
💰 $74.3 million ≈ ₹668 करोड़
👉 Apple का 2025 का कुल राजस्व:
🏦 लगभग $416 Billion ≈ ₹34 लाख करोड़
सोचिए ज़रा…
जहाँ एक CEO साल में सैकड़ों करोड़ कमा रहा है,
वहीं करोड़ों लोग पूरी ज़िंदगी में उतना नहीं कमा पाते।
यह फर्क सिर्फ “काबिलियत” का नहीं है,
यह फर्क है पोज़िशन, पावर और सिस्टम का।
Apple हमें सिखाता है कि
📱 एक सही आइडिया,
🏗 सही मैनेजमेंट,
🌍 सही मार्केटिंग
किसी कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में बदल सकती है।
लेकिन सवाल ये भी है:
🤔 क्या इतनी बड़ी कमाई का फायदा नीचे तक पहुँचता है?
🤔 क्या कर्मचारियों और समाज को भी उसी अनुपात में लाभ मिलता है?
🤔 क्या हम सिर्फ कंज्यूमर बनकर रह गए हैं या भविष्य के क्रिएटर बन सकते हैं?
टिम कुक की सैलरी हमें जलाने के लिए नहीं,
जगाने के लिए है।
ताकि हम समझें कि बड़ा सोचना कितना बड़ा फर्क पैदा करता है।
🚀 “नौकरी से पेट भरता है,
लेकिन सोच बदलने से इतिहास बनता है।”










👖 Jeans में छोटी Pocket क्यों होती है? | Interesting Factबहुत लोग सोचते हैं कि जीन्स की आगे वाली छोटी पॉकेट बेकार होती ह...
09/01/2026

👖 Jeans में छोटी Pocket क्यों होती है? | Interesting Fact
बहुत लोग सोचते हैं कि जीन्स की आगे वाली छोटी पॉकेट बेकार होती है,
लेकिन इसका इतिहास काफ़ी दिलचस्प है 👇
🔹 1870 के आसपास, जब Levi Strauss ने जीन्स बनाई थी,
उस समय लोग जेब घड़ी (Pocket Watch) इस्तेमाल करते थे।
🔹 उस महंगी घड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जीन्स में एक छोटी अलग पॉकेट बनाई गई।
🔹 इसलिए इसे आज भी
👉 Watch Pocket या Coin Pocket कहा जाता है।
🔹 समय बदला, घड़ियाँ बदलीं,
लेकिन डिज़ाइन परंपरा बन गया — इसलिए आज भी वही पॉकेट मौजूद है।
👉 आज लोग इसमें:
सिक्का
चाबी
अंगूठी
Earbuds
या USB रखते हैं 😄
📌 निष्कर्ष:
जीन्स की छोटी पॉकेट फैशन नहीं, बल्कि इतिहास की निशानी है।
अगर पोस्ट जानकारीपूर्ण लगी हो तो शेयर ज़रूर करें 👍
👖

🚨 FACT CHECK | “अचानक मौत का डांस” — सच क्या है?दावा:“लोग अचानक नाचने लगे, सैकड़ों मारे गए, और आज तक रहस्य बना हुआ है।”🔍...
09/01/2026

🚨 FACT CHECK | “अचानक मौत का डांस” — सच क्या है?
दावा:
“लोग अचानक नाचने लगे, सैकड़ों मारे गए, और आज तक रहस्य बना हुआ है।”
🔍 सच्चाई (Fact Check):
✔️ 1518 में फ्रांस के Strasbourg शहर में एक ऐतिहासिक घटना हुई थी, जिसे Dancing Plague कहा जाता है।
✔️ एक महिला (Frau Troffea) के नाचने से शुरुआत हुई और कुछ ही हफ्तों में कई लोग असामान्य रूप से नाचने लगे।
✔️ यह घटना नगर परिषद, डॉक्टरों और चर्च के रिकॉर्ड में दर्ज है — यानी यह मनगढ़ंत कहानी नहीं है।
❌ लेकिन झूठ कहाँ है?
🚫 “सैकड़ों लोगों की मौत” का कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
🚫 न तो किसी आधिकारिक दस्तावेज़ में मृतकों की संख्या दर्ज है,
🚫 न ही यह साबित है कि लोग “नाचते-नाचते गिरकर मर गए”।
👉 यह दावा अतिरंजित (Exaggerated) है, जिसे आज सोशल मीडिया डर और सनसनी फैलाने के लिए इस्तेमाल करता है।
🧠 फिर ऐसा क्यों हुआ?
इतिहासकार तीन मुख्य कारण बताते हैं:
1️⃣ Mass Hysteria (सामूहिक मानसिक दबाव)
उस समय अकाल, बीमारी और धार्मिक भय चरम पर था।
2️⃣ Ergot Fungus (संक्रमित अनाज)
जिससे दिमाग और मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है।
3️⃣ धार्मिक अंधविश्वास
लोग इसे “संत का श्राप” मान रहे थे।
📌 आज तक वैज्ञानिक इस पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं,
लेकिन यह कोई अलौकिक रहस्य या वायरल बीमारी नहीं थी।
🧾 निष्कर्ष (Conclusion):
🟢 हाँ, घटना हुई थी
🔴 नहीं, सैकड़ों मौतें साबित नहीं
🟡 नहीं, यह कोई रहस्यमयी श्राप या आज फैलने वाली चीज़ नहीं
👉 इतिहास को डर बेचने के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।





बड़े से बड़ा संकट टलेगा जो "जय श्री राम"  लिखेगा ❤️🙏जय जय श्री राम जय वीर हनुमान
06/11/2025

बड़े से बड़ा संकट टलेगा जो
"जय श्री राम" लिखेगा ❤️🙏

जय जय श्री राम
जय वीर हनुमान




25/10/2025

#ऐसी_क्या_चीज_है_जो_ऊपर_भी_जाती_है_नीचे_भी_जाती_है_फिर_भी_सामने_ही_रहती_है❓

कोलंबिया विश्वविद्यालय में गणित के एक कोर्स के दौरान एक छात्र कक्षा में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा कि प्रोफ...
29/09/2025

कोलंबिया विश्वविद्यालय में गणित के एक कोर्स के दौरान एक छात्र कक्षा में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा कि प्रोफेसर ने व्हाइटबोर्ड पर दो समस्याएँ लिखी थीं। उसने सोचा कि ये होमवर्क हैं, इसलिए वह उन्हें अपनी नोटबुक में नोट कर के घर ले गया।

जब उसने उन समस्याओं को हल करने की कोशिश की, तो वे उसे बेहद कठिन लगीं। लेकिन उसने हार नहीं मानी। घंटों लाइब्रेरी में बैठकर उसने संदर्भ पुस्तकों की मदद से अध्ययन किया और अंततः वह एक समस्या को हल करने में सफल हो गया, भले ही यह काफी चुनौतीपूर्ण था।

अगली कक्षा में प्रोफेसर ने जब होमवर्क के बारे में कुछ नहीं पूछा, तो वह चकित हुआ और खड़ा होकर पूछा, "सर, आपने पिछले लेक्चर में दिए गए असाइनमेंट के बारे में कुछ क्यों नहीं पूछा?"

प्रोफेसर ने उत्तर दिया, "असाइनमेंट? वो तो मैंने केवल ऐसे उदाहरण के तौर पर लिखी थीं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक हल नहीं कर पाए हैं।"

छात्र चौंक गया और बोला, "लेकिन मैंने उनमें से एक को हल कर लिया है! मैंने इस पर चार पेपर भी लिखे हैं।" उसकी इस उपलब्धि को बाद में मान्यता मिली और कोलंबिया विश्वविद्यालय में उसके लिखे चारों पेपर आज भी प्रदर्शित हैं।

इस कहानी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि छात्र ने यह नहीं सुना था कि "इन समस्याओं का कोई हल नहीं है।" उसने सिर्फ यही माना कि ये कठिन प्रश्न हैं, जिन्हें हल करना ज़रूरी है, और उसने पूरे मन से उन्हें हल करने की कोशिश की – और सफल हुआ।

यह कहानी हमें याद दिलाती है – उन लोगों की बात मत सुनो जो कहते हैं कि तुम कुछ नहीं कर सकते। आज की पीढ़ी अक्सर निराशा और नकारात्मकता से घिरी होती है। कुछ लोग जानबूझकर दूसरों के भीतर असफलता और हार का बीज बोते हैं।

लेकिन तुम्हारे पास अपनी मंज़िल पाने की ताकत है, बाधाओं को पार करने की शक्ति है, और अपने सपनों को साकार करने का साहस है। बस खुद पर विश्वास रखो – और लगातार प्रयास करते रहो।

इस छात्र का नाम था जॉर्ज डैंटज़िग, और यह समस्या Math Stack Exchange से ली गई थी।

"डैंटज़िग ने यह सिद्ध किया कि Student’s t-test के संदर्भ में, एकमात्र तरीका जिससे हम ऐसी hypothesis testing बना सकते हैं जो standard deviation से स्वतंत्र हो, वह है एक निरर्थक परीक्षण, जो हमेशा समान संभावना से रिजेक्ट या एक्सेप्ट करता है जो व्यावहारिक नहीं है।"

29/09/2025

हाँ, भगवान है.....🙏
👏👏👏👏👏👏👏

एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी

बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती

लेकिन रात का समय था आस पास कोई बस्ती भी नहीं थी
लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी

लेकिन अफ़सोस उस पर ताला लगा था

भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गये

ताला तोडा गया, तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया

जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरो की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कारण आत्मग्लानि हो रही थी

उन्होंने अपने पर्स में से एक हज़ार का नोट निकाला और चीनी के डब्बे के नीचे दबाकर रख दिया तथा दुकान का शटर ठीक से बंद करवाकर आगे बढ़ गए

तीन महीने की समाप्ति पर इस टुकड़ी के सभी 15 जवान सकुशल अपने मेजर के नेतृत्व में उसी रास्ते से वापिस आ रहे थे

रास्ते में उसी चाय की दुकान को खुला देखकर वहां विश्राम करने के लिए रुक गए

उस दुकान का "मालिक एक बूढ़ा चाय वाला था" जो एक साथ इतने ग्राहक देखकर खुश हो गया और उनके लिए चाय बनाने लगा

चाय की चुस्कियों और बिस्कुटों के बीच वो बुजुर्ग चाय वाले से उसके जीवन के अनुभव पूछने लगे खास्तौर पर
इतने बीहड़ में दूकान चलाने के बारे में

बुजुर्ग व्यक्ति उन्हें कईं कहानियां सुनाता रहा और साथ ही भगवान का आभार प्रकट करता रहा

तभी एक जवान बोला " बाबा आप भगवान को इतना मानते हो अगर भगवान सच में होता तो फिर उसने तुम्हे इतने बुरे हाल में क्यों रखा हुआ है"

बाबा बोला "नहीं साहब ऐसा नहीं कहते भगवान के बारे में,
भगवान् तो है और सच में है .... मैंने देखा है"

आखरी वाक्य सुनकर सभी जवान कोतुहल से बुजुर्ग की ओर देखने लगे

बाबा बोला "साहब मै बहुत मुसीबत में था एक दिन मेरे इकलौते बेटे को आतंकवादीयों ने पकड़ लिया उन्होंने उसे बहुत मारा पिटा लेकिन उसके पास कोई जानकारी नहीं थी इसलिए उन्होंने उसे मार पीट कर छोड़ दिया"

"मैं दुकान बंद करके उसे हॉस्पिटल ले गया मै बहुत तंगी में था साहब और आतंकवादियों के डर से किसी ने उधार भी नहीं दिया"

"मेरे पास दवाइयों के पैसे भी नहीं थे और मुझे कोई उम्मीद भी नज़र नहीं आती थी उस रात साहब मै बहुत रोया और मैंने भगवान से प्रार्थना की और मदद मांगी "और साहब ... उस रात भगवान मेरी दुकान में खुद आए"

"मै सुबह अपनी दुकान पर पहुंचा ताला टूटा देखकर मुझे लगा की मेरे पास जो कुछ भी थोड़ा बहुत था वो भी सब लुट गया"

" मै दुकान में घुसा तो देखा 1000 रूपए का एक नोट, चीनी के डब्बे के नीचे भगवान ने मेरे लिए रखा हुआ है"

"साहब ..... उस दिन एक हज़ार के नोट की कीमत मेरे लिए क्या थी शायद मै बयान न कर पाऊं ...
लेकिन भगवान् है साहब ... भगवान् तो है"

बुजुर्ग फिर अपने आप में बड़बड़ाया*

भगवान् के होने का आत्मविश्वास उसकी आँखों में साफ़ चमक रहा था

यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया

पंद्रह जोड़ी आंखे मेजर की तरफ देख रही थी जिसकी आंख में उन्हें अपने लिए स्पष्ट आदेश था "चुप रहो "

मेजर साहब उठे, चाय का बिल जमा किया और बूढ़े चाय वाले को गले लगाते हुए बोले "हाँ बाबा मै जानता हूँ भगवान् है.... और तुम्हारी चाय भी शानदार थी"

और उस दिन उन पंद्रह जोड़ी आँखों ने पहली बार मेजर की आँखों में चमकते पानी के दुर्लभ दृश्य का साक्ष्य किया
और
सच्चाई यही है की भगवान तुम्हे कब किसी का भगवान बनाकर कहीं भेज दे ये खुद तुम भी नहीं जानते...........

वो फिल्म जिसने हिला डाला था बॉक्स ऑफिस, 'काका' के कैमियो ने बदली न्यू कमर की किस्मत, 2 करोड़ के बजट में कमाए 100 करोड़इस फ...
17/09/2025

वो फिल्म जिसने हिला डाला था बॉक्स ऑफिस, 'काका' के कैमियो ने बदली न्यू कमर की किस्मत, 2 करोड़ के बजट में कमाए 100 करोड़

इस फिल्म को करने से राजेश खन्ना मना कर रहे थे, लेकिन जब इस फिल्म में उन्होंने कैमियो किया तो फिल्म हिट हो गई और एक न्यू कमर सुपरस्टार बन गया. 2 करोड़ की फिल्म ने 100 करोड़ की कमाई कर बॉक्स ऑफिस हिला दिया था.

आसमान से पार था और जब उनका स्टारडम लुढ़का तो पाताल लोक से भी नीचे चला गया. लोग कहते हैं कि 'काका' की लापरवारी की वजह से उनका स्टारडम खत्म हो गया. हिट फिल्मों की लंबी लिस्ट रखने वाले राजेश खन्ना ने साल 1982 में रिलीज हुई इस फिल्म में पहली बार कैमियो किया था. इस फिल्म ने बॉलीवुड में आए नए एक्टर को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया था. इस फिल्म के गाने और इसका एक्टर आज भी लोगों के जहन में जिंदा है

'काका' के कैमियो ने बदली न्यू कमर की किस्मत

राजेश खन्ना का पहला कैमियो

दरअसल, बात कर रहे हैं बॉलीवुड के 'दादा' मिथुन चक्रवर्ती और उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म डिस्को डांसर की. यही वो फिल्म है, जिसने मिथुन को बॉलीवुड और दर्शकों में पहचान दिलाई थी. इस फिल्म में मिथुन ने जिमी का किरदार निभाया और पहली बार लोगों के बीच एक डांसर होने का तमगा हासिल किया था. फिल्म में राजेश खन्ना का भी कैमियो था, जो बहुत कम लोगों को पता है. हालांकि राजेश खन्ना इस फिल्म को नहीं करना चाहते थे, लेकिन इस फिल्म के बाद राजेश की करियर की गाड़ी फिर से पटरी पर आ गई थी.

से पार था और जब उनका स्टारडम लुढ़का तो पाताल लोक से भी नीचे चला गया. लोग कहते हैं कि 'काका' की लापरवारी की वजह से उनका स्टारडम खत्म हो गया. हिट फिल्मों की लंबी लिस्ट रखने वाले राजेश खन्ना ने साल 1982 में रिलीज हुई इस फिल्म में पहली बार कैमियो किया था. इस फिल्म ने बॉलीवुड में आए नए एक्टर को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया था. इस फिल्म के गाने और इसका एक्टर आज भी लोगों के जहन में जिंदा है.

हिंदी सिनेमा की पहली 100 करोड़ी फिल्म

फिल्म निर्देशक और निर्माता बी. सुभाष ने किस्सा शेयर किया था. उन्होंने बताया था, 'राजेश खन्ना मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे, मुश्किल दौर में मैं उनकी मदद कर सका, जब वह स्टार बन गए तो उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे लिए कुछ करना चाहता हूं, तो बताओ में क्या कर सकता हूं, मैंने उन्हें डिस्को डांसर में गेस्ट रोल दे दिया, राजेश ने मुझसे कहा मैं छोटे रोल नहीं करता, लेकिन तुम्हारे लिए करूंगा'. लेकिन डिस्को डांसर सिर्फ मिथुन की ही फिल्म बनकर रह गई. डिस्को डांसर 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और फिल्म ने 100 करोड़ रुपये कमाए थे. डिस्को डांसर हिंदी सिनेमा की पहली 100 करोड़ कमाने वाली फिल्म है. फिल्म का गाना जिमी-जिमी ना सिर्फ भारत बल्कि रूस, चीन और जापान में भी हिट हुआ था.

यह एक 1000 ग्राम की लोहे की बिस्किट है। इसकी कच्ची कीमत लगभग  65 रुपए है,अगर आप इससे घोड़े की नाल बनाते हैं तो इसकी कीमत...
16/09/2025

यह एक 1000 ग्राम की लोहे की बिस्किट है। इसकी कच्ची कीमत लगभग 65 रुपए है,
अगर आप इससे घोड़े की नाल बनाते हैं तो इसकी कीमत लगभग 500 रुपए तक बढ़ जाएगी,
अगर आप इससे सिलाई की सुई बनाते हैं, तो इसकी कीमत लगभग 40,000 रुपए हो जाएगी,
अगर आप इससे घड़ी के स्प्रिंग और गियर बनाते हैं, तो इसकी कीमत लगभग 40 लाख रुपए हो जाएगी,
लेकिन अगर आप इससे प्रिसिशन लेज़र पार्ट्स बनाते हैं, जैसे कि लिथोग्राफी में इस्तेमाल होते हैं, तो इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए तक पहुँच जाएगी,
आपकी असली कीमत सिर्फ इस बात में नहीं है कि आप किससे बने हैं – बल्कि इस बात में है कि आप अपने आपको सबसे अच्छा क्या बना सकते हैं...

❗❗बेंजामिन नेतन्याहू के UN मे दिये भाषण का अंश❗❗75 साल पहले हमें मरने के  लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था,...
09/09/2025

❗❗बेंजामिन नेतन्याहू के UN मे दिये भाषण का अंश❗❗
75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।

लेबनान, सीरिया, ईराक़, जॉर्डन, मिस्र, लीबिया, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने हमारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे किंतु हम बच गये।

संयुक्त राष्ट्र ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। हमने उसको भी अपने खून से सींचा। हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सब कुछ था।

हम कुछ नहीं भूले, हम फिरऔन से बच गए। हम यूनान से बच गए। हम रोमन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब देशों से बच गए। हम सद्दाम से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए।
हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्ला से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरूसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरूसलम को कभी नहीं भूले। वह हमारे हृदय में है, वह हमारे मस्तिष्क में है और जब तक हम रहेंगे, जेरूसलम हमारी आत्मा में रहेगा।

संसार ये याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिस्र, लेबनान, बेबीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गए हैं।

हम फिर भी बचे रहे।

हमें वे (इस्लामी) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारे रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारे उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारे पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिए गए, सोलोमन सुलेमान हो गए, डेविड दाऊद बना दिए गए, मोजेज मूसा कर दिए गए...

फिर एक दिन... उन्होंने कहा तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे कभी स्वीकार नहीं किया। करते भी कैसे, उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा, स्वीकारो! कबूल लो! हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहरों को कब्जाया गया, हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम कत्ल हुए, भगा दिए गए...

मक्का के काबा में हम 2 लाख थे, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर कत्ल किया गया, फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे, मार दिए गए। ईराक़ में हम 2 लाख थे, तुर्की में चार लाख, हमें मारा जाता रहा, मारा जाता रहा। वे हमें मार रहे हैं, मारते जा रहे हैं। हमारे शहर, धन, दौलत, घर, पशु, मान-सम्मान सब कुछ कब्जाए जाते रहे फिर भी हम बचे रहे।

1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया फिर भी हम बचे रहे।

75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, जलील करते थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे रहे।

आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक, जैसी कई संस्थायें हमने इस दौर में बनाईं। आज हमारे चिकित्सक दवा बन रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहे हैं, ये सबके लिए हैं , यह मानवता के कल्याण के लिए है।

हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला। हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।

हम किसी के दुश्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की कसमें नहीं खाईं। हमें किसी को बर्बाद भी नहीं करना, हम साजिशें भी नहीं करते।

हम जीना चाहते हैं, सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे, हम 3000 सालों से यरुशलम में ही थे। आज हम अपने पहले देश इजराइल में हैं। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा, येरूसलम हमसे है और हम येरूसलम से हैं।

इस तरह हमेशा स्मरण रखना कि मानसरोवर, काबुल, कंधार, पेशावर ,लाहौर, कराची , ढाका ,चटगांव सब हमारा है....!!
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