24/02/2021
...क्या जिक्र करूं किसी लम्हे का यारों.. बचपन के तो हर पल बहुत हसीन हुआ करते थे, हर लम्हे मानो हम खुद के लिए जी रहे हो. कभी उठाकर देखी तस्वीर तो पता चला बेवजह ही हंस लिया करना खेल था बचपन का, डांटना फटकारना हंसने खेलने छुपने ढूंढने में तो मजा था इसका. वह बचपन के दिन ही थे जब शामे हुआ करती थी अब ना जाने सुबह के बाद कब रात हो जाती है...।।⚡❤️ सुकून था बचपन में 🙂😔 @ हस्ते मुस्कुराते रहो साथ रहो, कल की फ़िक्र करने की अब जरूरत नही