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“एक इज़राइली पत्रकार का दावा है — ईरान ने सिर्फ़ चार दिनों में अमेरिका के दशकों पुराने सैन्य ढांचे को हिला दिया है… अगर ...
11/03/2026

“एक इज़राइली पत्रकार का दावा है — ईरान ने सिर्फ़ चार दिनों में अमेरिका के दशकों पुराने सैन्य ढांचे को हिला दिया है… अगर यह सच है तो दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है।”

अगर आप समझना चाहते हैं कि इस युद्ध में ज़मीन पर असल में क्या हो रहा है, तो इज़राइली पत्रकार अलोन मिज़राही की यह टिप्पणी पढ़िए। शायद आपको दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त की असली हालत का अंदाज़ा लग जाए।

“हम इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देख रहे हैं। सबकी उम्मीदों के ख़िलाफ़, ईरान इस वक़्त अमेरिकी ठिकानों को इतनी गहराई और इतने निर्णायक तरीक़े से तबाह कर रहा है कि दुनिया अभी उसे समझने के लिए तैयार ही नहीं है। सिर्फ़ चार दिनों में ईरान ने इस पूरे इलाक़े में अपनी फ़ौजी पकड़ का दायरा बढ़ा लिया है।

ईरान ने दुनिया के सबसे क़ीमती और सबसे महंगे फ़ौजी ठिकानों, साधनों और उपकरणों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है। बहरीन, कुवैत, क़तर और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकाने दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में गिने जाते हैं। इन्हें बनाने में कई दशकों में खरबों डॉलर खर्च हुए हैं, यानी तीस साल से ज़्यादा के सैन्य ख़र्च का बड़ा हिस्सा अब धुएं में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

हम देख रहे हैं कि करोड़ों डॉलर की क़ीमत वाले रडार एक ही पल में नष्ट हो रहे हैं। पूरी की पूरी सैन्य छावनियां खाली कर दी गयी हैं, कुछ जला दी गयी हैं और कई पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। मेरे ज्ञान के मुताबिक़, अमेरिका को अपने पूरे इतिहास में ऐसी तबाही कभी नहीं झेलनी पड़ी, शायद पर्ल हार्बर के हमले को छोड़ दें, मगर वह भी एक ही हमला था।


ज़रा समझिए — दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त, जिसकी वायु शक्ति भी दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती है, चार दिनों से हमले की स्थिति में है। दावा किया जा रहा है कि वह ईरानी रक्षा पंक्तियों को तोड़ रही है, लेकिन हमें कहीं भी ईरान के आसमान पर अमेरिकी वर्चस्व का कोई सबूत नहीं दिखता। तेहरान या ईरान के किसी भी हिस्से के ऊपर उड़ते अमेरिकी विमानों की फुटेज कहां है?

अमेरिकी सैनिक ईरान की ज़मीन पर कदम रखने का ख़्वाब भी नहीं देख सकते। इस युद्ध की बेबसी का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि चौथे ही दिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अजीबोग़रीब सुझाव सामने आने लगे हैं। वे कह रहे हैं कि फ़ारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल के जहाज़ों को सैन्य सुरक्षा दी जाए।

आप सोच भी क्या रहे हैं? आप अमेरिकी जहाज़ों को हज़ारों ईरानी मिसाइलों की मारक सीमा में भेजना चाहते हैं? इस वक़्त कोई भी जहाज़ हॉर्मुज़ के जलडमरूमध्य से सुरक्षित नहीं गुजर सकता। ईरान ने दशकों तक इसकी तैयारी की है।
अब कुछ लोग यह बात कर रहे हैं कि कुर्द मिलिशिया को हथियार देकर ईरान पर हमला कराया जाए। यह कैसी बात है? क्या आपने ईरान का नक़्शा देखा है? लगता है ट्रंप प्रशासन ने कभी ईरान का नक़्शा देखा ही नहीं। आपको पता है वह कितना विशाल देश है?

आप कहते हैं ईरान पर हमला कर दो। क्या दस हज़ार लड़ाकों की मिलिशिया ईरान पर क़ब्ज़ा कर लेगी? पचास हज़ार? या एक लाख? ईरान उन्हें निगल जाएगा।
अमेरिका और इस्राइल यह युद्ध पहले ही हार चुके हैं। वे बम गिराकर लाखों आम लोगों को मार सकते हैं, इमारतों को उड़ा सकते हैं, लेकिन वे यह युद्ध नहीं जीतेंगे।
ईरान का सैन्य ढांचा और हथियार पूरे देश में ज़मीन के बहुत गहरे नीचे बने हुए हैं। अमेरिकियों के लिए, और निश्चित ही इस्राइलियों के लिए, वहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है।

उन्होंने ऐसा सिलसिला शुरू कर दिया है जिसे वे ख़त्म करने की ताक़त नहीं रखते। जब यह सब ख़त्म होगा, तो अमेरिका फिर कभी पश्चिमी एशिया में उसी तरह वापस नहीं आ पाएगा। मध्य पूर्व में अमेरिकी मौजूदगी नहीं बचेगी।

मैं यह बात पूरे यक़ीन के साथ कह रहा हूं--
゚viralシalシ

#घोरकलजुग

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हिज़्बुल्लाह ने जंग के आगाज़ के बाद इसराइल पर सबसे बड़े हमले में एक साथ लगभग 100 रॉकेट दागे हैं और एक नए ऑपरेशन के आगाज़ का ऐलान किया है।

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Part 10

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