24/08/2026
सरकारी स्कूलों की बदहाली पर CJP का ‘School Thik Karo’ अभियान, राजस्थान में 611 स्कूलों के पास अपनी इमारत तक नहीं
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर CJP के ‘School Thik Karo’ अभियान ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर नई बहस छेड़ दी है।
15 अगस्त को शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का सोशल ऑडिट करना और बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाना बताया गया है। अभियान के तहत CJP की टीमें अलग-अलग स्कूलों का जायजा ले रही हैं।
इसी बीच राजस्थान शिक्षा विभाग ने 16 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी निर्देश जारी किए। निर्देशों के मुताबिक, बिना प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की पूर्व लिखित अनुमति के स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने इस व्यवस्था का आधार छात्रों की सुरक्षा, निजता और गरिमा बताया है।
लेकिन इसी फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
अगर सरकारी स्कूल की वास्तविक स्थिति कैमरे में दर्ज नहीं की जाएगी, तो उसकी कमियों और बदहाली को जनता के सामने कौन लाएगा?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि राजस्थान सरकार ने विधानसभा में बताया है कि राज्य के 611 सरकारी स्कूल अपनी खुद की इमारत के बिना संचालित हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूलों में शौचालय और 1,049 में पेयजल सुविधा नहीं है।
यानी CJP के अभियान के बीच सामने आए ये आंकड़े राजस्थान की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में मौजूद बुनियादी ढांचे की चुनौती को जरूर उजागर करते हैं।
CJP ने स्कूलों की स्थिति सामने लाने के लिए अपने अभियान को जारी रखने की बात कही है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश और बच्चों की तस्वीर या वीडियो बनाए जाने पर नियंत्रण जरूरी है।
इस पूरे विवाद में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल को लेकर CJP टीम के दौरे के बाद विवाद हुआ। इसके बाद राजस्थान सरकार ने उस स्कूल के लिए नए भवन का निर्माण 1 सितंबर से शुरू करने की घोषणा की है और इसके लिए कुल 18 लाख रुपये की मंजूरी की जानकारी सामने आई है। दोनों पक्षों की ओर से घटना को लेकर FIR भी दर्ज होने की रिपोर्ट है।
अब बहस सिर्फ CJP और सरकार के बीच नहीं रह गई है।
बहस यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करते हुए पारदर्शिता का रास्ता कैसे खुला रखा जाए?
क्योंकि—
बच्चों की सुरक्षा जरूरी है।
स्कूलों में अनुशासन जरूरी है।
लेकिन सरकारी स्कूलों की स्थिति पर जनता को जानकारी मिलना भी जरूरी है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है—
क्या स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश और बच्चों की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर रोक के साथ-साथ ऐसी पारदर्शी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिसके तहत पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को निर्धारित प्रक्रिया से स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने और रिपोर्ट करने का अधिकार मिले?
सरकारी स्कूल सिर्फ सरकारी इमारत नहीं—लाखों बच्चों के भविष्य की नींव हैं।
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