22/05/2026
भारत में 65 करोड़ युवा हैं अगर इनमें से सिर्फ 10 करोड़ युवा भी एकजुट होकर 2 करोड़ रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार पर वोट डालना शुरू कर दें तो देश की पूरी राजनीति बदल सकती है। क्योंकि आज भारत की राजनीति धर्म और जाति से चलती है, डेटा और रोजगार से नहीं।
मेरे युवा भाइयों“रोजगार सत्याग्रह” शुरू करो देश में 45 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। रेलवे, सेना, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यायपालिका हर जगह स्टाफ की कमी है। लेकिन युवा मंदिर मस्जिद में उलझे हैं।
हर जिले में युवाओं को महीने में एक दिन रोजगार मार्च निकालना चाहिए जिसमें सिर्फ 5 मांगें हों खाली पदों का डेटा जारी करो भर्ती कैलेंडर जारी करो पेपर लीक पर उम्र सीमा में छूट दो भर्ती प्रक्रिया लाइव करो और हर परीक्षा की जवाबदेही तय करो
1968 में फ्रांस और दक्षिण कोरिया में छात्र आंदोलनों ने सरकारों को नीति बदलने पर मजबूर किया था। भारत में भी वही दबाव बनाना पड़ेगा।
दूसरा काम “VIP बहिष्कार अभियान” चलाओ। भारत में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा, बंगले, गाड़ियां, स्टाफ और सुविधाओं पर हर साल 4000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। दूसरी तरफ युवा रेलवे स्टेशन पर सोते हैं। हर युवा को अपने क्षेत्र के नेता से पूछना चाहिए
उसके बच्चे सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पढ़ते सरकारी अस्पताल में इलाज क्यों नहीं करवाते जनरल डिब्बे में सफर क्यों नहीं करते जिस दिन जनता नेताओं की निजी जिंदगी और जनता की जिंदगी की तुलना करने लगेगी उसी दिन राजनीति की चमक उतर जाएगी।
तीसरा कम “डिजिटल डेटा क्रांति” शुरू करो। भारत के युवा दिनभर सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर लड़ते हैं। अगर यही युवा हर जिले की बेरोजगारी, पेपर लीक, स्कूलों की हालत, अस्पतालों की कमी और नेताओं की संपत्ति का डेटा वायरल करने लगें तो राजनीति का पूरा खेल बदल जाएगा।
हर युवा महीने में एक RTI डाले। हर कॉलेज में डेटा ग्रुप बने। हर भर्ती घोटाले का रिकॉर्ड इकट्ठा किया जाए। सिस्टम नारे से नहीं, रिकॉर्ड से डरता है।
चौथा कम“लड़कियों की आर्थिक क्रांति” शुरू करो। भारत में करोड़ों लड़कियां डिग्री लेने के बाद घर बैठ जाती हैं। महिला श्रम भागीदारी कई विकसित देशों से काफी कम है। अगर लड़कियां आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो गईं तो धर्म और जाति की आधी राजनीति खत्म हो जाएगी।
हर गांव और शहर में लड़कियों के लिए फ्री लाइब्रेरी लीगल हेल्प ग्रुप सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग डिजिटल स्किल सेंटर शुरू होने चाहिए।
सत्ता को सबसे ज्यादा डर पढ़ी हुई और आर्थिक रूप से स्वतंत्र लड़की से लगता है।
पांचवा और अंतिम कम“कोचिंग शहरों को राजनीतिक शक्ति” बनाओ। कोटा, प्रयागराज, पटना, दिल्ली, जयपुर, सीकर जैसे शहरों में लाखों युवा रहते हैं। अगर ये युवा संगठित होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सामूहिक ज्ञापन और भर्ती जवाबदेही अभियान शुरू करें तो सरकारों को झुकना पड़ेगा।
एक करोड़ बेरोजगार युवा अगर एक साथ सिर्फ रोजगार पर वोट डाल दें तो संसद का आधा नक्शा बदल सकता है।
अगर तुम्हारे बस का हो तो यह एक काम और कर लो“धर्म नहीं हिसाब मांगो” अभियान चलाओ।
जब भी कोई नेता धर्म की बात करे उससे तुरंत पूछो तुम्हारे कार्यकाल में कितनी नौकरी मिली कितने स्कूल बने कितने अस्पताल खुले कितने पेपर लीक हुए
तुम्हारे बच्चों की संपत्ति कितनी बढ़ी
यही असली लोकतंत्र है।
क्रांति सिर्फ पत्थर फेंकने से नहीं आती।
सबसे बड़ी क्रांति तब आती है जब जनता भावनाओं से निकलकर हिसाब मांगना शुरू कर देती है।
जिस दिन भारत का युवा धर्म से ऊपर उठकर डेटा, रोजगार और बराबरी पर एकजुट हो गया उसी दिन इस देश की राजनीति बदलनी शुरू हो जाएगी।