10/09/2026
दिल्ली में पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए वाहन-जनित आईईडी (VBIED) विस्फोट मामले में एनआईए की चार्जशीट से बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस हमले का पहला मुख्य निशाना चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक लाल मंदिर था। हालांकि, भारी ट्रैफिक और इलाके में सुरक्षा बलों की सख्त मौजूदगी के कारण हमलावर अपने शुरुआती प्लान में कामयाब नहीं हो सका और उसे हमले की जगह बदलनी पड़ी।
एनआईए की जांच के अनुसार, विस्फोट से करीब 13 मिनट पहले संदिग्ध हमलावर उमर-उन-नबी ने आई-20 कार को लाल मंदिर के पास पार्क करने की कोशिश की थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच में सामने आया कि शाम 6:37 बजे कार को लाल मंदिर के पास देखा गया। पार्किंग में असफल रहने के बाद उसने यू-टर्न लिया और लाल किले के गेट नंबर 4 की ओर बढ़ गया। इसके करीब 13 मिनट बाद, शाम 6:50 बजे कार में रखे विस्फोटक में धमाका हुआ।
एनआईए के आरोपपत्र में इस हमले की साजिश, योजना और उससे जुड़े आतंकी नेटवर्क का भी विस्तृत ब्योरा दर्ज है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारण हमलावर को ऐन वक्त पर अपना ठिकाना बदलना पड़ा। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत और 29 लोगों के घायल होने की बात चार्जशीट में कही गई है। साथ ही, आसपास की संपत्तियों को करीब 17.7 लाख रुपये का नुकसान होने का भी उल्लेख है।
एनआईए ने उमर-उन-नबी को अंसार गजवात-उल-हिंद के पुनर्जीवित आतंकी मॉड्यूल का ऑपरेशनल इंचार्ज बताया है। एजेंसी के अनुसार, वह वर्ष 2022 की शुरुआत से निष्क्रिय पड़े आतंकी नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने और देश में आतंकी हमलों की साजिश को आगे बढ़ाने में जुटा था। चार्जशीट में इस पूरे नेटवर्क और हमले की योजना से जुड़े कई पहलुओं का विवरण दिया गया है।
इस खुलासे से यह सामने आया है कि लाल किले के पास हुआ धमाका हमलावरों की शुरुआती योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि सुरक्षा और भारी यातायात के कारण उन्हें अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा था। एनआईए की जांच अब इस आतंकी साजिश से जुड़े नेटवर्क, उसकी गतिविधियों और अन्य आरोपियों की भूमिका पर भी केंद्रित है।