Deshbhakt Muslims

Deshbhakt Muslims इस पेज को खासकर इसलिए बनाया गया है ताकी मुस्लिम सेनानीओ का इतिहास बताया जा सके जो हमसे छुपाया गया हैं

इस पोस्ट पर नारंगियो द्वारा खुशी मनाई जा रही है, ज़बरदस्त जश्न का माहौल है। क्योंकि हादसा कश्मीर में हुआ है... कोई कह रहा...
17/08/2025

इस पोस्ट पर नारंगियो द्वारा खुशी मनाई जा रही है, ज़बरदस्त जश्न का माहौल है। क्योंकि हादसा कश्मीर में हुआ है...
कोई कह रहा है अल्लाह का आजाब है यह? कोई पहलगाव का बदला तो कोई उत्तराखंड का हिसाब बराबर कर रहा है।।

जबकि हकीकत यह है कि जिस चशोटी गांव में यह हादसा हुआ है, उधर मचैल माता की धार्मिक यात्रा चल रही है, यात्रा का प्रारंभिक स्थान वही गाँव है। मरने वालों में 95% लोग जश्न मनाने वालो के हम मजहब ही हैं। लेकिन नफरतियो को लाशों पर ठहाके लगाने होते हैं, वो कहाँ देखते अपना या पराया...

धंधा देशवासियों धंधा इनके एजेंडे को साथ नही दोगे तो ये तुम्हे भी गालियाँ देंगे....
17/08/2025

धंधा देशवासियों धंधा इनके एजेंडे को साथ नही दोगे तो ये तुम्हे भी गालियाँ देंगे....

26/08/2023

ये हैं नफ़रत के प्रयोग का अंजाम

16/08/2023

ये ABP न्यूज़ की खबर हैं अब बताओ क्या कहा जाएइन्हे ये नहीं पता रिज्क देने वाला अल्लाह हैं इनके धमकियों से कुछ नही होता.....
12/08/2023

ये ABP न्यूज़ की खबर हैं अब बताओ क्या कहा जाए
इन्हे ये नहीं पता रिज्क देने वाला अल्लाह हैं इनके धमकियों से कुछ नही होता.....

रिज्क देना अल्लाह के हाथ मे होता हैं वो कायनात का मालिक हैं वो हाथी का भी पेट भरता हैं और 🐋 का भी इसलिए ऐसी चीजों को फैल...
12/08/2023

रिज्क देना अल्लाह के हाथ मे होता हैं वो कायनात का मालिक हैं वो हाथी का भी पेट भरता हैं और 🐋 का भी इसलिए ऐसी चीजों को फैलाना बंद करो..

10/08/2023

मेवात कैसे बना मिनी पाकिस्तान? मेवात का वो मुसलमान योद्धा जिसने बाबर से यूद्ध किया था..
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मेवात से फैले हिंसा ने इस अल्लाह के घर के इमाम को शहीद कर दिया अल्लाह इन्हे अपनी पनाह मे रखे। आमीन
05/08/2023

मेवात से फैले हिंसा ने इस अल्लाह के घर के इमाम को शहीद कर दिया अल्लाह इन्हे अपनी पनाह मे रखे। आमीन

मुसलमानों का इतिहास जानने के लिए पेज को follow करे
05/08/2023

मुसलमानों का इतिहास जानने के लिए पेज को follow करे

क़बीला ए क़ुरैशअरब तीन तरह के होते हैं1- अरब ए बाएदा 2- अरब ए आरेबा 3-अरब ए मुस्तारेबाबाएदा , अरब के सब पुराने लोग या क़...
06/11/2022

क़बीला ए क़ुरैश

अरब तीन तरह के होते हैं
1- अरब ए बाएदा
2- अरब ए आरेबा
3-अरब ए मुस्तारेबा

बाएदा , अरब के सब पुराने लोग या क़बीले जिन के बारे कहा जाता है कि ये ख़त्म हो गए. कहा जाता है कि आद और समूद की कौमें अरब ए बाएदा थीं जो अल्लाह के अज़ाब से तबाह हो गईं.

आरेबा के बारे में उलेमा का ख्याल है कि ये हज़रत नूह के पोते क़हतान बिन साम की औलाद में से हैं इसलिए इन्हें क़हतानी अरब भी कहा जाता है. इनका ताल्लुक़ अस्ल में यमन से है मदीने के मशहूर क़बीले औस और ख़ज़रज अरब ए आरेबा हैं. यमन की मलिका बिलक़ीस भी अरब ए आरेबा से ताल्लुक रखती हैं.

अरब ए मुस्तारेबा हज़रत इस्माईल की औलाद को कहते हैं. "मुस्तारेबा' के मानी हैं अरब बनी हुई क़ौम यानी अस्ल अरब नहीं हैं बल्कि अरब बन गए हैं. क्यूंकि हज़रत इस्माईल का ताल्लुक फिलस्तीन से था और उनकी ज़बान अरबी नहीं थी इसलिए मुस्तारेबा कहलाते हैं. हज़रत इस्माईल के 12 बेटे हुए नाबित या नयाबूत, क़ीदार, औबाईल, मुबशाम, मुबशा, दूमा, मीशा, हदद, तीमा, यतूर, नुफ़ैस, क़ीदमान

इन में सिर्फ दो बेटे नयाबूत और क़ीदार की औलाद अरब में रही बाक़ी सब इधर उधर फैल गए या गुमनाम हो गए.

क़ीदार बिन इस्माईल की औलाद में ही अदनान हुए जो नबी करीम सल्ललाहू अलैहि व सल्लम के इक्कीसवें दादा हैं. मक्के के तमाम लोग इन्हीं अदनान की औलाद हैं और इसी निस्बत से अदनानी कहलाते हैं. अदनान के बेटे माद हुए, माद के बेटे नज़ार, नज़ार के बेटे मुज़िर उनके बाद इलियास और इलियास के बेटे ख़ुज़ैमा और ख़ुज़ैमा के बेटे कनाना हुए. इन्हीं कनाना के पोते फ़हर बिन मालिक हैं जिन्हें क़ुरैश का लक़ब मिला था. क़ुरैश लक़ब मिलने की उलेमा ने कई वजह बयान की हैं जिन में सब से मशहूर ये है क़ुरैश शार्क को कहते हैं इसलिए बहादुरी की बिना पर ये लक़ब दिया गया. क़ुरैश के कई क़बीले हुए जिन में कुछ मशहूर ये हैं
1-बनू हाशिम - नबी करीम सल्ललाहू अलैहि व सल्लम, हज़रत अली का क़बीला
2-बनू तैम - हज़रत अबू बक्र सिद्दिक़ का क़बीला

3-बनू अदी =हज़रत उमर का क़बीला

4बनू उमैय्या - हज़रत उस्मान हज़रत अमीर मुआविया, नबी करीम सल्ललाहू अलैहि व सल्लम की बीवी उम्मुल मोमीनीन उम्मे हबीबा का क़बीला

5- बनू मख़ज़ूम - हज़रत ख़ालिद बिन वलीद, अबू जहल वग़ैरह का क़बीला

6-बनू सहम - हज़रत अब्दुर्रहमान इब्न औफ़

7-बनू असद - नबी करीम सल्ललाहू अलैहि व सल्लम की बीवी ज़ैनब बिन्त जहश का क़बीला.

इन तमाम क़बीलो के लोगों को क़ुरैशी कहा जाता था. यानी , सिद्दिक़ी,फ़ारूक़ी, उस्मानी, अल्वी (सैयद), ये सब हक़ीक़ी तौर पर क़ुरैशी हैं. हिन्दुस्तान में आबाद क़ुरैशी (क़साई) बिरादरी का अरब से कोई ताल्लुक़ नहीं है. इन लोगों ने ग़ालिबन 1930 में नाम के साथ क़ुरैशी लगाना शुरू किया अब बहुत से लोगों का ये दावा है कि हम अरबी हैं. हालांकि ये महज़ एक ग़लत दावा है. आप जो हैं वही बताएं। नबी करीम सल्ललाहू अलैहि व सल्लम ने इर्शाद फ़रमाया

لَيْسَ مِنْ رَجُلٍ ادَّعَی لِغَيْرِ أَبِيهِ وَهُوَ يَعْلَمُهُ إِلَّا کَفَرَ وَمَنِ ادَّعَی قَوْمًا لَيْسَ لَهُ فِيهِمْ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ
जिस शख्स ने अपने बाप के अलावा किसी और की तरफ दावा किया उसने कुफ्र किया और जो उस क़ौम में होने का दावा करे जो उन में से नहीं है वो अपना ठिकाना जहन्नुम जान ले. (बुखारी - 3317)

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