23/06/2026
पिज़्ज़ा आधे घंटे में पहुंच जाता है…
“Blinkit” का ऑर्डर 10 मिनट में घर आ जाता है…
लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घंटों बाद पहुंचती हैं, एम्बुलेंस जान निकलने के बाद आती है और पुलिस अपराध होने के बाद। आखिर कैसा सिस्टम है यह?
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार अग्नि'कांड हो रहे हैं। मासूम जानें जा रही हैं, परिवार उजड़ रहे हैं… लेकिन सवाल वही है — क्या हमारी सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
कहा जाता है कि कई जगह नियमों और NOC के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। हादसा होने के बाद कुछ दिनों तक जांच, बयान और कार्रवाई का शोर होता है… फिर सब पहले जैसा।
क्या हर बार निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद ही सिस्टम जागेगा?
क्या इंसानी जिंदगी की कीमत सिर्फ फाइलों और भाषणों तक रह गई है?
जो परिवार इस त्रासदी से गुज़र रहे हैं, ईश्वर उन्हें यह दुःख सहने की शक्ति दे।
बहोत दुःखद...नि:शब्द
मासूम बच्चों को भावभीनी श्रद्धांजलि। 😔🕯️