08/09/2026
सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को गिराने की कार्रवाई निश्चित रूप से गंभीर सार्वजनिक और संवैधानिक बहस का विषय है। लेकिन इसे सीधे “साम्प्रदायिक सरकार की साजिश” या “संवैधानिक व्यवस्था के पूर्ण पतन” का प्रमाण बताना तथ्यों से आगे जाना होगा।
प्रशासन और अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, संरचना को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण माना गया था और मस्जिद प्रबंधन की अपील भी अदालत ने खारिज की। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। दूसरी ओर, मस्जिद प्रबंधन ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाया है।
इसलिए असली सवाल धर्म नहीं, **कानून का समान और निष्पक्ष अनुपालन** होना चाहिए। यदि प्रक्रिया में कोई कमी हुई है तो उसकी न्यायिक जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। लेकिन बिना प्रमाण किसी अधिकारी या राजनीतिक दल को अपराधी घोषित करना भी न्यायसंगत नहीं है।
लोकतंत्र में सरकार की आलोचना जरूरी है, मगर **आरोपों से अधिक महत्वपूर्ण प्रमाण, न्यायिक समीक्षा और निष्पक्ष कानून-व्यवस्था है।**🔥