05/09/2026
देश में मर्दों वाली बात क्या है?
हमारे देश में मर्दों वाली बात क्या है? वो मर्द जो घर में सारे काम फैला के आये, ये मर्दों वाली बात है। कपड़ा जहां तहां फेंक दे, तौलिया जहां तहां फेंक दे, नहा के बाथरूम से ऐसे निकल के चला आए, अपना कपड़ा भी बाहर जाके धूप में न फैलाएं, जूता कहीं उतार दे, मोजा कहीं उतार दे, कपड़ा कहीं टाँग दे, किताब कहीं छोड़ दे, जहाँ खाये थाली वहीं छोड़ दे, चाय पिये कप वहीं छोड़ दे, बालकनी में कुर्सी लेकर गया वहीं कुर्सी पड़ी रात दिन, ऊपर छत पे अगर गया तो कप प्लेट वहीं छोड़ दिया, ये सारी बातें क्या हैं? मर्दों वाली बात है।
और औरतों वाली बात क्या है?
वो पीछे पीछे आपके लगी रहें, कहाँ आपका तौलिया सुखाना है, बाथरूम से आप निकले वहां वाइपर मारना है, आप किचन में जो गन्दी फैलाकर आए गये थे थोड़ी चाय वाय बनाने डब्बा यहाँ छोड़ दिये, चाय पत्ती वहाँ छोड़ दिये,
जहाँ से निकाले वहां नहीं रखेगा, और वो सब सिस्टेमेटिक करने का काम किसका हो गया औरतों का? हाँ यही हमारे यहाँ फ़िलोसिफी है।
और मैं आपको ये बता दूं कि ये मर्दों वाली बात नहीं है। मर्दानगी खतरे में है।
Undisciplined ये अरबों मर्दों की बात नहीं है ये फालतू की बात है, ये अनुशासनहीनता है सीधा सीधा, इरिटेट कर रहे हैं आप, दूसरों का काम बढ़ा रहे हैं, गुस्सा दिला रहे हैं दूसरों की समस्या बढ़ा रहे हैं आप,
और आप सोचते हैं सैलरी लाते हैं आप, तनख्वाह लाते हैं, बहुत सारे सैलरी लाने वाले हैं जिनकी बीवी भाग गई है या तलाक दे चुकी है या बीवी ही नहीं है, समझ में आ रहा है उनको भी।
सैलरी क्या चीज होती है, क्या करेंगे सैलरी को?
डिसिप्लिन इश्यू है, ये मर्दानगी नहीं है ये सीधे सीधे अनुशासनहीनता है।
चाय पीकर अगर आप छत से कप ला देते तो क्या दिक्कत थी? बाथरूम में नहाकर अगर आप ही वाइपर मार देते तो क्या दिक्कत थी? नहाकर तौलिया अगर आप ही धूप में सूखने डाल देते तो क्या दिक्कत थी? जूते जहां तहां उतार दिए क्यों भाई? ये सब अनुशासनहीनता है।