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31/05/2026

पंचमहाभूत में विलीन होने से पहले,
एक बार तुम्हें गले लगाना चाहता हूँ...
मेरे मोक्ष के सारे रास्ते तुम्हारे प्रेम से हो कर जाते हैं !

अस्थियों को देखकर समझ आया,,🔥💯शेष कुछ नहीं बचता, अवशेष भी बहा दिए जाते है..
18/11/2025

अस्थियों को देखकर समझ आया,,🔥💯
शेष कुछ नहीं बचता, अवशेष भी बहा दिए जाते है..

26/10/2025
काफ़ी देर से बिस्तर पर लेटा हूँ,कमरा खामोश है,पर दीवारों पर अब भी उसकी हँसी की गूंज अटकी है।फोन की स्क्रीन बुझती है,फिर ...
15/10/2025

काफ़ी देर से बिस्तर पर लेटा हूँ,
कमरा खामोश है,
पर दीवारों पर अब भी उसकी हँसी की गूंज अटकी है।

फोन की स्क्रीन बुझती है,
फिर जल उठती है -
जैसे यादें बार-बार लौटकर पूछती हों,
"अब भी जाग रहे हो?"

प्लेलिस्ट वही है,
गीत भी वही,
बस सुनने वाला मैं अब पहले वाला नहीं।
हर धुन के बीच एक ख़ालीपन है,
जो उसका नाम नहीं लेता,
पर उसी की तरह लगता है।

कभी सोचता हूँ -
वो अब इस वक़्त कहाँ होगी?
किसी और की बाँहों में,
या शायद किसी खिड़की के पास
बैठी वही आसमान देख रही होगी,
जहाँ हम कभी साथ देखा करते थे।

और अगर नहीं भी,
तो भी फर्क क्या पड़ता है -
अब मेरी याद
किसी के काम की नहीं रही।

ज़िंदगी अब भी चल रही है,
जैसे कोई पुरानी रेलगाड़ी
रात के अंधेरे में धीमे से सरकती हो -
भीतर खाली,
बाहर बेचैन।

कभी किसी गली से गुज़रता हूँ
तो उसकी हँसी कानों में गूँज उठती है।
मैं मुस्कुरा देता हूँ -
जैसे किसी पुराने ट्रांजिस्टर पर
विविध भारती के गीत अनायास बज उठे हों।

कभी कोई नोटिफिकेशन चमकता है,
तो दिल अब भी आधा पल ठहर जाता है -
फिर खुद ही मुस्कुराकर कहता हूँ,
“बेवकूफ़…”

कभी दोस्तों में उसका ज़िक्र होता है,
तो मैं हँस देता हूँ,
ऐसे जैसे सब ठीक है -
पर भीतर एक गंध रह जाती है,
जैसे किसी पुरानी किताब में
गुलाब का फूल अब भी सूखा पड़ा हो।

वो अगर कभी मेरे बारे में सोचती होगी,
तो शायद हैरान होगी ये जानकर -
कि मैं अब उसे याद नहीं करता,
मैं बस उसे महसूस करता हूँ।

नींद आने से पहले
उसका चेहरा नहीं,
उसकी मौजूदगी याद आती है -
वो जो अब कहीं नहीं,
पर फिर भी हर जगह है।

- एक थी तमन्ना

11/10/2025

तुमने मुझे ब्लॉक किया...
मैं पीछे नहीं आऊँगा।
तुमने मैसेज नहीं किया...
मैं विनती नहीं करूँगा।
तुमने बुरा व्यवहार किया...
मैं ठहरने वाल नहीं।
तुमने दूरी बनाई...
मैं सवाल नहीं करूँगा।
तुमने अनदेखा किया...
मैं ध्यान के लिए जिद नहीं करूँगा।
मुझे कुछ साबित नहीं करना है। बिल्कुल कुछ भी नहीं।
ना मैं हताश दिखूँगा, ना किसी की उपेक्षा से टूटूँगा।
वो नाटक मैं बहुत पहले जी चुक
हूँ और अब उससे कहीं आगे बढ़ चुका हूँ।

अब सिर्फ़ मैं हूँ, मेरी शांति है और मेरा दिल। मैं उसी के साथ रहूँगा जो मुझे सचमुच चाहता हो। मैं वही काम करूँगा जहाँ मेरी क़दर हो और मैं वही प्रेम करूँगा जो मुझे सम्मान दे। अब और नहीं कोई भावनात्मक खेल,
अब और नहीं कोई ब्लैकमेल।

मैं पर्याप्त हूँ।

02/10/2025

हम दोनों की कहानी दरअसल
दो पन्नों की किताब है,
जिसे वक़्त ने अलग-अलग हाथों में बाँट दिया।

तुम्हारे पन्ने पर मेरे सवाल लिखे हैं,
और मेरे पन्ने पर तुम्हारे जवाब।

हम मिलेंगे…
तो यह किताब मुकम्मल हो जाएगी!

इसलिए...
दूरी से गुजरकर भी
एक-दूसरे की धड़कनों के पास रहना है,
और यह यक़ीन रखना है
कि जब मिलेंगे,
तो इन सारी दूरियों का ब्याज
हमारे आलिंगन चुका देंगे।❤🤗🫣
━━❥༻❤️༺❥━━
✍️ ©® बात कुछ यूँ है,,,

दुनिया की सबसे बेहतरीन ख़ुशबू वही है, जो उस औरत की हो जिससे तुम मोहब्बत करते हो,उसके बालों, पेट और गर्दन की ख़ुशबू सूंघन...
02/10/2025

दुनिया की सबसे बेहतरीन ख़ुशबू वही है, जो उस औरत की हो जिससे तुम मोहब्बत करते हो,उसके बालों, पेट और गर्दन की ख़ुशबू सूंघने की चाहत है...!!♥️🌸

वो कहते हैं ना कि "ना जाने किस रूप में आकार नारायण मिल जाए" ठीक वैसे ही हमारी ज़िन्दगी में कभी कभी एक अजनबी सा शख्स आता ...
30/09/2025

वो कहते हैं ना कि "ना जाने किस रूप में आकार नारायण मिल जाए" ठीक वैसे ही हमारी ज़िन्दगी में कभी कभी एक अजनबी सा शख्स आता है जो बिना शर्त ख़ुद से ज़्यादा हमारी परवाह करता है हर मुश्किल वक़्त में हमारे साथ खड़ा रहता है और हमें दुनिया की बुरी नज़रों से हमेशा बचाए रखता है लेकिन उसका प्रेम कभी जुबां पर नहीं आता क्योंकि ऐसे लोगों का प्रेम बेज़ुबान होता है वो औरों की तरह रिश्तों को टाइम पास या ऑप्शन नहीं मानते बल्कि अपने रिश्ते को ज़िन्दगी में सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं लेकिन अफ़सोस बस इतना है कि हम अक्सर उनके अपनापन को समझ ही नहीं पाते और जब समझने की कोशिश करते हैं तब तक वो हमारी ज़िन्दगी से कहीं बहुत दूर जा चुके होते हैं....❤️

अगर किसी बहस के बाद उसकी चुप्पी तुम्हारे भीतर हलचल नहीं मचाती, अगर उसकी ख़ामोशी तुम्हें बेचैन नहीं करती कि कैसे सब कुछ ठ...
30/09/2025

अगर किसी बहस के बाद उसकी चुप्पी तुम्हारे भीतर हलचल नहीं मचाती, अगर उसकी ख़ामोशी तुम्हें बेचैन नहीं करती कि कैसे सब कुछ ठीक किया जाए, तो समझ लो तुम उससे सच में प्यार नहीं करते।

अगर उसकी आँखों से बहते आँसू तुम्हारे दिल पर बोझ नहीं डालते, अगर उन्हें पोंछने और उसे सँभालने की चाह तुम्हारे भीतर नहीं उठती, तो यह प्यार नहीं है।

अगर उसकी उदासी तुम्हें यह एहसास नहीं कराती कि वह तुम्हारे अहंकार, तुम्हारी दलीलों और तुम्हारे सही साबित होने से कहीं ज़्यादा क़ीमती है तो यह मोहब्बत नहीं है।

अगर तुम उसे टूटते और संघर्ष करते हुए देख सकते हो
और फिर भी चुप रहना चुनते हो,तो यह प्रेम नहीं है क्योंकि सच्चा प्यार वही है जो तुम्हें परवाह करने पर मजबूर करे,भले ही तुम नाराज़ हो,जो तुम्हें उसके पास खींच ले जाए,भले ही तुम्हारा मन दूर जाने का हो।

अगर वह तकलीफ़ में है और तुम चैन से सो पाते हो,
तो मान लो तुम उससे कभी सचमुच प्यार ही नहीं करते थे...

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Lucknow

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