24/01/2026
KGMU का नया इलाज, जाम और अवैध मार्केट को छोड़, मज़ार पर चस्पा किया नोटिस!
आस्था पर प्रहार कर योगी सरकार को बदनाम करने की रची जा रही है साजिश?
संवाददाता मोहम्मद सैफ,
लखनऊ। अपनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए मशहूर नवाबों के शहर में प्रशासन के एक हालिया कदम ने जनता के बीच रोष पैदा कर दिया है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय KGMU परिसर के पास स्थित एक प्राचीन मजार पर नोटिस चस्पा किए जाने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। लोगों और जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल आस्था पर प्रहार नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की छवि को धूमिल करने की एक प्रशासनिक साजिश हो सकती है।
तर्क दिया जा रहा है कि यह दरगाह तब से अस्तित्व में है जब KGMU की कई आधुनिक इमारतों का वजूद भी नहीं था। यह महज ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में अचानक इसे अतिक्रमण की श्रेणी में रखकर नोटिस देना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
शहर का पांडेगंज इलाका आज भी भारी जाम और अवैध अतिक्रमण की चपेट में है। सालों पहले दालमंडी को मुल्लापुर, नई गल्ला मंडी शिफ्ट करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आज भी दुकानदार वहां जमे हुए हैं। प्रशासन इन अवैध मार्केटों को हटाने में नाकाम रहा है, जिससे जनता को रोज जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। शहर के कई व्यावसायिक इलाकों में अवैध कब्जे और बेतरतीब निर्माण के कारण आम नागरिक परेशान हैं। वहां बुलडोजर या नोटिस क्यों नहीं पहुंचता?
लखनऊ अपनी एकता के लिए जाना जाता है। ऐसे समय में जब सरकार विकास और कानून-व्यवस्था पर ध्यान दे रही है, कुछ अधिकारी इस तरह के संवेदशील मुद्दे उठाकर जनता के बीच क्रोध पैदा कर रहे हैं। यह संदेह पैदा करता है कि क्या कुछ अधिकारी जानबूझकर ऐसे विवाद खड़ा कर रहे हैं जिससे जनता सरकार के विरुद्ध सोचने पर मजबूर हो जाए।
शासन को हस्तक्षेप की आवश्यकता है, यह मजार का मामला नहीं, बल्कि शहर के सांप्रदायिक सौहार्द का है। किसी भी पुराने धार्मिक स्थल पर कार्रवाई करने से पहले शासन को उसके ऐतिहासिक महत्व और जन-भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह शहर के असली नासूर जाम और अवैध मार्केट पर ध्यान दे, न कि ऐसे कदम उठाए जिससे सरकार की बदनामी हो और शहर का माहौल खराब हो।