06/06/2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट की यूपी पुलिस पर सख्त टिप्पणी: अधिकारियों की निष्ठा संविधान नहीं, सत्ताधारी दल के प्रति; कानून के शासन पर उठाए सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था और कानून के शासन को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार दिवाकर की एकल पीठ ने कहा कि फील्ड स्तर के कई अधिकारी संविधान और कानून के प्रति अपने दायित्वों के बजाय राजनीतिक वरिष्ठों को संतुष्ट करने के अनुरूप काम करते हैं।
न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति नहीं बल्कि सत्ताधारी प्रतिष्ठान के प्रति दिखाई देती है। तबादलों की व्यवस्था से भलीभांति परिचित अधिकारी अक्सर अपने आचरण को राजनीतिक अपेक्षाओं के अनुसार ढाल लेते हैं।
कानून के शासन को 'असुविधा' मानते हैं अधिकारी
अदालत ने कहा कि अधिकारी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा कानून के शासन को संवैधानिक दायित्व के बजाय एक परिचालन संबंधी असुविधा मानता है। न्यायालय के अनुसार कई मामलों में बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तारियां की जाती हैं, एफआईआर दुर्भावनापूर्ण इरादों से दर्ज या दबा दी जाती हैं तथा निवारक हिरासत संबंधी प्रावधानों का मनमाने ढंग से उपयोग किया जाता है।
पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत उपलब्ध प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को नियमित रूप से नजरअंदाज किया जाता है। न्यायिक आदेशों का औपचारिक रूप से पालन तो किया जाता है, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
गैंगस्टर एक्ट के मामले की सुनवाई में आई टिप्पणी
न्यायालय ने यह टिप्पणियां उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई के दौरान कीं। गैंगस्टर एक्ट में नामजद एक आरोपी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य में पुलिस शक्तियों के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई।
हालांकि सर्वोच्च न्यायालय भी 1986 के अधिनियम से जुड़े कुछ मुद्दों पर विचार कर रहा है, इसलिए हाईकोर्ट ने मामले के व्यापक कानूनी पहलुओं पर अंतिम राय देने से परहेज किया।
गृह सचिव की भूमिका पर भी सवाल
अदालत ने राज्य के गृह सचिव के कामकाज पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस पद तक पहुंचे कुछ अधिकारियों ने व्यवहार में स्वार्थपूर्ण हितों को साधने का कार्य किया है। न्यायालय के अनुसार नियुक्तियों, विभागीय कार्रवाई की मंजूरी और अदालती मामलों में सरकार की प्रतिक्रिया कई बार निष्पक्ष एवं संवैधानिक प्रशासनिक निर्णय के बजाय व्यक्तिगत या बाहरी प्रभावों से प्रेरित दिखाई देती ह