01/06/2026
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, हाईकोर्ट की अग्रिम जमानत बरकरार
प्रयागराज के चर्चित POCSO मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट का जमानत आदेश फिलहाल प्रभावी बना रहेगा।
मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने यह सवाल उठाया कि यदि कथित घटनाओं की जानकारी पहले से थी, तो संबंधित अधिकारियों को सूचना देने में देरी क्यों हुई। अदालत ने इस पहलू को मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों में शामिल माना।
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक परीक्षण आवश्यक है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि शिकायत और सूचना देने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी है। साथ ही, हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि अग्रिम जमानत के स्तर पर सभी कानूनी प्रावधानों की अंतिम व्याख्या नहीं की जा सकती।
मामले की सुनवाई के दौरान मीडिया में नाबालिगों से संबंधित सामग्री के प्रसारण और उनकी पहचान की गोपनीयता को लेकर भी न्यायालय ने चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था कि ऐसे मामलों में बच्चों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश यथावत बना हुआ है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित न्यायालयों में जारी रहेगी।
(यह समाचार केवल न्यायालयी कार्यवाही और उपलब्ध कानूनी तथ्यों पर आधारित है। किसी भी पक्ष के विरुद्ध दोष सिद्ध होना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।)