24/07/2026
"जो दिल की ज़बान समझ ले, वही अपना होता है..." ✨
Ek khoobsurat ghazal aap sabhi ke naam. ❤️
Aapko is ghazal ka kaun sa sher sabse zyaada pasand aaya? Comments me zaroor batayein!
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वो शाइस्ता भी है और यार वो शीरीं-ज़बाँ भी है,
फ़साहत और बलागत देखिए उससे बयाँ भी है।
जो वो ख़ामोश हो जाए तो महफ़िल डूब जाती है,
मगर जब बोलता है तो तबाही का समाँ भी है।
नफ़ासत उसकी बातों की दिलों को जीत लेती है,
वो जितना सादा-दिल है, उतना ही वो राज़दाँ भी है।
धड़कता दिल छुपाए से कहाँ छुपता है महफ़िल में,
वो रुकती-काँपती आवाज़ में दिल का बयाँ भी है।
तअल्लुक में तड़प है तो समझ लो इम्तिहाँ भी है,
मना लो तुम उसे 'फ़िरोज़', वो राहे-रवाँ भी है।
💭 तअल्लुक में तड़प हो तो वही रिश्ता ज़िंदा रहता है, और जो दिल की ज़बान समझ ले, वही अपना होता है।
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