31/05/2026
🔴 #सपेरों_का_देश_कहने_वालों_को_हमारा_जवाब: "अनेकता में एकता, यही है हमारी विशेषता!"
आज मीडिया में एक बहस पर नज़र गई। चर्चा इस बात पर थी कि कैसे नॉर्वे जैसे देशों या पश्चिमी मीडिया द्वारा आज भी भारतीयों को 'सपेरों का देश' (Snake Charmers) कहकर संबोधित कर दिया जाता है। इस पर हमारे देश के बुद्धिजीवी तुरंत एक अंतहीन डिबेट में फंस गए कि— "नॉर्वे ने ऐसा कैसे कहा? उसकी हिम्मत कैसे हुई? प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नंबर वन पर रहने वाला, महज 54 लाख की आबादी वाला देश हमें ऐसा कैसे बोल सकता है?"
लेकिन यहाँ सोचने वाली बात कुछ और है...
🔴 #क्या_हमारा_आत्मसम्मान_इतना_कमज़ोर है?
क्या हम भारतीयों का आत्मसम्मान इतना खोखला हो चुका है कि किसी गैर-भारतीय की एक छोटी सी, पूर्वाग्रह से ग्रसित टिप्पणी मात्र से वह डगमगा जाए? किसी बाहरी देश के सर्टिफिकेट से हमारा गौरव तय नहीं होता।
हमें गर्व करने के लिए किसी और के अप्रूवल की ज़रूरत नहीं है। अगर किसी ने हम पर यह तंज़ कसा भी है, तो एक बात बिल्कुल सत्य है— उसने हमारी केवल बाहरी परत देखी है, हमारी गहरी जड़ों को वह कभी समझ ही नहीं पाया।
🔴 #दुनिया_में_जितने_देश_उतनी_तो_हमारे_यहाँ_भाषाएँ हैं!
मुझे किसी बाहरी देश की तारीफ से फर्क नहीं पड़ता, मैं तो बस इस बात से गौरवान्वित होता हूँ कि हमारे भारत में जितनी भाषाएँ और बोलियाँ शान से बोली जाती हैं, दुनिया में शायद कुल मिलाकर उतने देश भी नहीं होंगे!
हमारे यहाँ एक बहुत ही खूबसूरत और पुरानी कहावत है:
‼️"कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बानी।"‼️
हर कुछ किलोमीटर पर हमारे देश का पानी बदल जाता है, और कुछ दूरी पर हमारी भाषा और बोली बदल जाती है। इतनी विविधताओं, इतनी संस्कृतियों और इतने विचारों को अपने भीतर समेट कर भी हम सब एक सूत्र में बंधे हैं।
🔴 #सपेरा_होना_कोई_अपमान_नहीं_हमारी_विशेषता_अलग है
अगर वो हमें 'सांप और सपेरों' से जोड़कर देखना चाहते हैं, तो उन्हें देखने दीजिए। लेकिन हमारा वास्तविक परिचय यह है: "अनेकता में एकता, यही हमारी असली विशेषता।"
हज़ार साल पुरानी सभ्यता, ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म और अद्भुत भाषाई विविधता का नाम भारत है। किसी 54 लाख की आबादी वाले देश की टिप्पणी हमारे 140 करोड़ से ज़्यादा के इस महासागर जैसे देश की अस्मिता को छोटा नहीं कर सकती। अपने अस्तित्व पर गर्व करना सीखिए, दूसरों के बयानों पर विचलित होना बंद कीजिए!