26/10/2020
लखनऊ। निजीकरण का प्रस्ताव टलने के बाद भले ही बिजलीकर्मियों व अभियंताओं का आन्दोलन खत्म हो गया हो, लेकिन एक बार फिर बिजली इंजीनियरों के आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान अभियंताओं पर बिजली चोरी कराए जाने के आरोप लग रहे हैं। बीते दिनों मध्यांचल प्रबंधन ने बिजली चोरी में संलिप्तता पाए जाने पर ठाकुरगंज व जीपीआरए पॉवर हाउस के एसडीओ व जेई को निलंबित कर दिया था। जिससे आक्रोशित बिजली इंजीनियरों ने राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उत्तर प्रदेश के बैनर तले सोमवार को गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल मुख्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।इंजीनियरों ने लेसा, सिस व ट्रांसगोमती में की जा कार्यवाही को उत्पीड़नात्मक बताते हुए निलंबन को गलत बताया और इस कार्यवाही की घोर निंदा की। संगठन ने आरोप लगाया कि बिना किसी पुख्ता साक्ष्य के मात्र कार्य क्षेत्र के आधार पर एसडीओ रिजवान सिद्दीकी, शैलेंद्र कुमार धूसिया और जेई अरविन्द कुमार यादव, अनिल कुमार को निलंबित कर दिया गया था, जो गलत है। प्रदर्शन के दौरान प्रबंध निदेशक ने तत्काल संगठन के प्रतिनिधियों से वार्ता की पहल की और वार्ता सकारात्मक सम्पन्न हुई। जिसमें एमडी की ओर से शीघ्र ही प्रकरण को निस्तारित करने की सहमति दी गई।वहीं संगठन ने चेतावनी दी कि अगर वार्ता के मुताबिक निर्धारित समयावधि में निलंबित अभियंताओं को बहाल नहीं किया गया तो अभियंता उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। मध्यांचल एमडी व इंजीनियर्स संगठन के प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में कार्य क्षेत्र के आधार पर उत्पीड़न की कार्यवाही पर रोक लगाने पर भी सहमति बनी। संगठन ने विद्युत चोरी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान "विद्युत चोरी रोको" का भी निर्णय लिया। वार्ता में आश्वस्त किया गया कि बिजली चोरी रोकने, राजस्व बढ़ाने के साथ ही उपभोक्ता देवो भव: का पूरी तरह से पालन भी किया जाएगा। संगठन के प्रतिनिधि मंडल में इं. [ 175 more words ]
लखनऊ। निजीकरण का प्रस्ताव टलने के बाद भले ही बिजलीकर्मियों व अभियंताओं का आन्दोलन खत्म हो गया हो, लेकिन एक बार फिर ....