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04/09/2025

राजनीतिक साज़िश के तहत फंसाए गए उमर ख़ालिद व अन्य को जमानत न देने का फैसला राजनीतिक

लखनऊ 4 सितम्बर 2025। रिहाई मंच ने छात्र नेता उमर ख़ालिद, शरजील इमाम, गुल्फिसां फातिमा, मीरान हैदर और अन्य की जमानत याचिका ख़ारिज होने पर कहा कि उन्हें राजनीतिक साज़िश के तहत फंसाया गया और अब जमानत न देकर जेल में सड़ने को मजबूर कर दिया गया है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यूएपीए जैसे मामलों में भी बेल नियम है, जेल अपवाद है के सिद्धांत से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा यह कहना कि केवल लंबी कैद व मुक़दमे में देरी के आधार पर जमानत देना सभी मामलों में सार्वभौमिक रूप से लागू होने वाला नियम नहीं है। न्यायालय द्वारा यह कहना कि जमानत देने या न देने का विवेकाधिकार संवैधानिक न्यायालय के पास है जो प्रत्येक मामले में विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इस पर सवाल करते हुए मोहम्मद शोएब कहते हैँ कि यह विशिष्ठ तथ्य एवं परिस्थितियां एक ही तरह के मामले में अलग-अलग नहीं हो सकती है। भाजपा नेता अनुराग ठाकुर के धमकी और उकसाने वाले बयान पर अदालत ने कहा था कि मुस्कुराते हुए बोला था इसलिए अपराध की श्रेणी में नहीं आता। शायद यह फैसला इसलिए दिया गया की आरोपी भाजपा के मंत्री थे।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि उमर ख़ालिद, शरजील इमाम, गुल्फिसां फातिमा, अथर खान, ख़ालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफ़ा उर रहमान, मीरान हैदर और शादाब अहमद जिनकी जमानत याचिका ख़ारिज की गई वे सभी देश के संवैधानिक ढांचे को मज़बूत करने के लिए संघर्ष करने वाले युवा थे। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी याद दिला दी कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को सिर्फ इसलिए कष्ट नहीं उठाना चाहिए क्योंकि उसका नाम खान है। आज बहस है कि मुस्लिम अभियुक्त होने की वजह से इस तरह का फैसला आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मुक़दमे को स्वभाविक रूप से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि जल्दबाजी में की गई सुनवाई अभियुक्तों और राज्य दोनों के लिए हानिकारक होगी। यहाँ सवाल उठता है कि पांच साल क्या कोई कम समय होता है इसलिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जबकि इसमें से कई अभियुक्त देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के छात्र रहे हैँ और देश के निर्माण के लिए उन्होंने गंभीर अध्ययन के साथ आंदोलन का रास्ता भी चुना। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इनपर व्हाट्सअप ग्रुप में शामिल होने और उकसाने जैसे आरोप हैँ। किसी को, किसी व्हाट्सअप ग्रुप में जोड़ देने से जुड़ने वाला कैसे आरोपी हो सकता है। जहां तक उकसावे वाली बात है नागरिकता आंदोलन के दौरान दिल्ली में कई बार आंदोलन कर रहे लोगों पर गोली चलाई गई। भाजपा के नेताओं ने खुलकर धमकी तक दी जिनपर न कोई कार्रवाई की गई और न ही उनके उकसावे पर दिल्ली में भड़के तनाव की साज़िश का उन्हें हिस्सा बनाया गया। आज़ादी के आंदोलन में इंक़लाब ज़िंदाबाद का नारा क्या आज़ाद भारत में लगाना गुनाह हो जाएगा। जेल में देर तक रहने वाले मामले का जिस तरह से सामान्यीकरण किया जा रहा है उससे यह प्रवृत्ती बढ़ेगी कि किसी के ऊपर भी आरोप लगा दीजिए और बिना सुनवाई वह जेल में बिना कसूर तय हुए सड़ता रहेगा।

राजीव यादव
9452800752

03/07/2025

करछना, प्रयागराज भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं का सरकार के इशारे पर उत्पीड़न- रिहाई मंच

योगी सरकार में पीड़ित परिवार से न मिलने देने का कैसा कानून

करछना थाने में दलित युवकों को कान पकड़वाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत हो कार्रवाई

लखनऊ 2 जुलाई 2025. रिहाई मंच और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेताओं ने करछना प्रयागराज में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की कठोर निंदा करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने कहा कि पिछड़े समाज की 8 वर्षीय बेटी के साथ बलात्कार और दलित युवक को जिंदा जला देने की घटना को लेकर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को रोक कर पुलिस ने सुनियोजित तरीके से मामले को भड़काया. सरकार बताए कि लॉ एंड ऑर्डर लागू करना किसका काम है क्योंकि यहाँ पुलिस पक्षपाती भूमिका में दिख रही. इस मामले में पुलिस ने करछना थाने में आरोपियों से कान तक पकड़वाया. सरकार बताए कि यह किस कानून के तहत उसने यह करवाया और किसके आदेश पर. क्या यह गैर कानूनी कर्रवाई दलित होने के नाते की गई. उन्होंने आगे यह कहा कि पुलिस कह रही है कि वीडियो के आधार पर वह कार्रवाई कर रही है. ऐसे में सरकार वायरल होते उन विडियो जिसमें गाड़ियों की तोड़फोड़ करते हुए पुलिस कर्मी दिख रहे हैं उनके खिलाफ क्या कर्रवाई की.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र नेता रहे डॉ आरपी गौतम ने कहा कि देश के किसी भी सांसद को किसी भी पीड़ित परिवार से न मिलने देना, देश की संसद का अपमान है. उन्होंने कहा कि करछना थाने में दलित नौजवानों का उत्त्पीड़न करती पुलिस का जो वीडियो वायरल है, सरकार और अनुसचित जाति/जन जाति आयोग तत्काल संज्ञान लेकर कर्रवाई करे. सजा देने के लिए न्याय पालिका है, सजा देने का काम पुलिस कैसे कर सकती है.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि करछना के बताए जा रहे वायरल वीडियो में पुलिस कुछ लोगों के साथ गाड़ियों की तोड़फोड़ करती नजर आ रही है. इससे घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठता है कि जिस पुलीस को कानून व्यवस्था क़ायम करना था वही तोड़फोड़ कर रही थी. उन्होंने कहा कि करछना में जिस तरह थाने में बैठाकर कान पकड़वाया गया क्या इटावा में अपने को ब्राह्मण कहकर कथा वाचक का अपमान करने वाले आरोपियों को भी कान पड़कर उठक बैठक करवाई गई! और क्या समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन पर हमला करने वाले करणी सेना के लोगों से कान पकड़वाकर माफी मंगवाई गई.

राजीव यादव
9452800752

12/12/2024

जस्टिस शेखर कुमार यादव का भाषण संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन, न्यायालय में उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए- रिहाई मंच

लखनऊ 12 दिसंबर 2024. रिहाई मंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान को हेट स्पीच कहा. जस्टिस यादव ने शर्मशार कर दिया है कि भारतीय न्यायालयों में घृणास्पद मानसिकता के जज बैठे हैं. मंच ने माननीय सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान के आलोक में उत्तर प्रदेश के सम्भल, वाराणसी, मथुरा, जौनपुर, बदायूं, बरेली समेत विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा दिए गए फैसलों और तमाम कार्रवाई की समीक्षा की मांग की है. मंच ने कहा कि संभल के बाद जिस तरह से जौनपुर अटाला मस्जिद मामला सामने आ रहा है वह समाज में तनाव पैदा कर रहा है. सम्भल में सर्वे के फैसले के बाद हिंसा भड़की ऐसे में मानवीय सुप्रीम कोर्ट जौनपुर मामले को संज्ञान में ले और यह सुनिश्चित हो कि कोर्ट सर्वे के आदेश न दें. यह कानून के उल्लंघन के साथ सांप्रदायिक सौहार्द का भी गंभीर मामला है. पुलिस बल या बुलडोजर से नहीं कानून को नागरिकों से संवाद करके स्थापित किया जाए.

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव का न्यायालय में कोई स्थान नहीं होना चाहिए. धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करके वह न्यायमूर्ति कहलाने के हकदार नहीं रह गए हैं. उनके इन बयानों के बाद न्यायाधीश के रूप में उनके पद पर बने रहने से नागरिकों का न्यायिक व्यवस्था से भरोसा कमजोर होगा. उनकी हेट स्पीच पर विधिक कार्रवाई की जाए. जस्टिस शेखर समेत अन्य न्यायधीशों का विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में जाना स्पष्ट करता है कि उन्होंने संविधान की शपथ तो ली है पर उनके विचार और आचरण उसके अनुरूप नहीं हैं. न्यायपालिका के राजनीतिक इस्तेमाल से देश कमजोर होगा. सामान्य टिप्पणियों पर आम नागरिक को जेल भेज दिया जाता है यहां तो न्यायमूर्ति जिन्होंने संविधान की रक्षा की शपथ ली है उन्होंने नफरती भाषा का प्रयोग किया है.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि संभल प्रकरण के बाद भी जिस तरह से जौनपुर अटाला मस्जिद, अजमेर शरीफ, बदायूं की मस्जिद को लेकर मामले आ रहे हैं उनसे स्पष्ट है कि देश की धर्मनिरपेक्षता और सद्भाव को तोड़ने की साजिश की जा रही है. न्यायपालिका पर उठ रहे सवालों को जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान ने और पुख्ता किया है कि न्यायिक प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति भी हिंदुत्वादी राजनीति से प्रेरित हैं. यह हमारे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है. सम्भल में ऐसे ही फैसले की वजह से हिंसा हुई जिसमें निर्दोषों की जानें गईं. जिस सर्वे की आपाधापी में इतनी बड़ी हैं हिंसा हुई, दो तारीखें बीतने के बाद भी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं जा सकी. ठीक इसी तरह जौनपुर की अटाला मस्जिद में सर्वे की मांग की गई है. जौनपुर के अटाला मस्जिद पर खुफिया नजर, पुलिस की बढ़ाई गई सतर्कता, मस्जिद के आस-पास रहने वाले लोगों को सूचीबद्ध किया जा रहा जैसी खबरें स्पष्ट करती हैं कि सब कुछ सामान्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सम्भल मामले में शांति सद्भाव पर जोर देने के बाद भी फतेहपुर में नूरी जामा मस्जिद पर बुलडोजर चलाया गया जबकि मामले को लेकर न्यायालय में सुनवाई होनी थी. इन परिस्थितियों में माननीय सुप्रीम कोर्ट को जौनपुर की अटाला मस्जिद को लेकर चल रहे प्रकरण को संज्ञान में लेना चाहिए.

रिहाई मंच ने कहा कि भारत में, पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत, 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आए किसी भी धार्मिक स्थल का स्वरूप नहीं बदला जा सकता. इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वाद स्वीकार किए गए और सर्वे का भी आदेश दे दिया गया. सर्वे के जरिए मुकदमे शुरू किए जा रहे हैं, जो कानून के खिलाफ है. सम्भल हिंसा के बाद अजमेर, जौनपुर, बदायूं की मस्जिदों में मंदिर के नाम पर सर्वे की खबरें समाज को विभाजित कर रही हैं. अयोध्या के बाद वाराणसी-मथुरा समेत विभिन्न जगहों की मस्जिदों में मंदिर ढूंढने और दावा करने का अभियान सा चला दिया गया है. एक न्यायाधीश बोलें कि उन्हें यह कहने में कोई झिझक नहीं है, कि देश, हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक लोगों की इच्छा के मुताबिक चलेगा. यह कानून है, कानून, यकीनन बहुसंख्यकों के मुताबिक काम करता है, उनका यह कथन धर्मनिरपेक्षता पर हमला है. देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों को कठमुल्ला और देश के लिए खतरनाक कहकर उन्होंने उन भारतीय संवैधानिक मूल्यों को खारिज किया जिसकी वह शपथ लेकर न्यायमूर्ति हैं. जस्टिस शेखर कुमार यादव द्वारा बताया जा रहा यह कानून भारतीय लोकतंत्र को बहुसंख्यकवाद में तब्दील करने की कोशिश है जिसकी इजाजत हमारा संविधान नहीं देता.

राजीव यादव
9452800752

26/11/2024

संभल में युवकों की मौत और हिंसा के लिए डीएम-एसपी पर हो कार्रवाई- रिहाई मंच

लखनऊ 26 नवंबर 2024. रिहाई मंच ने संभल में चार मुस्लिम युवकों की मौत और हिंसा के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई करने की मांग की है. मंच ने कहा कि संभल में शांति और सौहार्द के माहौल को बनाए रखने में प्रशासन असफल रहा और उस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप है. मृतकों के परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि लड़कों की मौत पुलिस की गोली से हुई है.

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने कहा कि संभल मामले में सांसद जियाउर्रहमान पर एफआईआर ने जो कि वहां मौजूद नहीं थे साफ कर दिया है कि यूपी में कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है. एडवोकेट जफर अली को मीडिया से बात करने के बाद पुलिस ने उठाकर आवाज को दबाने की कोशिश की. आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को सम्भल जाने से रोकना या फिर सामाजिक-राजनीतिक लोगों को संभल न आने देना सच को छुपाने की कोशिश है. इस मामले में याचिकाकर्ता, सर्वे टीम की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. जिस तरह से बहराइच में स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया कि भाजपा की शह पर साजिश रची गई ठीक इस मामले में भी यही आएगा. तीन हजार से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज करने वाली पुलिस बताए कि सर्वे टीम के साथ नारा लगाने वालों पर क्या एफआईआर हुई अगर नहीं तो क्यों नहीं. वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई की बात करने वाले प्रशासन को बताना चाहिए कि पुलिस द्वारा गोली चलाने और पत्थरबाजी वाले वीडियो पर क्या कार्रवाई की, क्या उन पर भी रासुका लगेगी.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि इतनी बड़ी हिंसा के बाद संभल के एसपी जिस तरह से हंस-हंसकर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे वो बेहद शर्मनाक है. इस तरह के असंवेदनशील और गैरजिम्मेदार अधिकारियों का पद पर बने रहना राष्ट्रहित में नहीं है. जिस तरह कार्रवाई की वह बात कर रहे और मीडिया में आ रहा है कि घरों में घुसकर पुलिस ने तोड़फोड़ किया ऐसे में फर्जी एफआईआर, गिरफ्तारी और दबिश के नाम पर उत्पीड़न किया जा रहा है. हिंसा में मारे गए युवकों के परिजनों के आरोपों को देखा जाए तो पुलिस द्वारा यह टारगेट किलिंग का मामला है. पुलिस यह कहकर नहीं बच सकती कि उसने गोली नहीं चलाई क्योंकि कई वायरल वीडियो में गोली ही नहीं पत्थरबाजी करती भी पुलिस नजर आई. इससे पहले भी 2 अप्रैल 2018 को दलित समाज द्वारा किए गए भारत बंद, 19-20 दिसंबर 2019 को हुए नागरिकता आंदोलन और किसान आंदोलन के दौरान भाजपा राज में गोलियों से आमजन मारे गए. पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को देखते हुए आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता कि पुलिस ने प्राइवेट हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया. सम्भल हो या उपचुनाव, जिस तरह से पुलिस ने महिलाओं तक पर असलहा ताना उसने यूपी पुलिस की मानसिकता को उजागर कर दिया है. पुलिस का कहना है कि उसने आंसू गैस और लाठियों का प्रयोग किया. गोली चलाने के आदेश के बिना अगर डीएम, एसपी की संभल में मौजूदगी में पुलिस गोलियां चला रही है तो स्पष्ट है कि आला अधिकारियों से उनकी पुलिस ही नहीं संभल रही. अगर ऐसा रहता तो उनपर कार्रवाई होती लेकिन ऐसा बिल्कुल न होना स्पष्ट करता है कि उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है. 19 नवंबर 2024 को देर शाम सर्वे और 24 की सुबह अलग-अलग गलियों से नारेबाजी करते हुए सर्वे टीम के आने के आरोपों को देखते हुए जिलाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठता है. वहीं इतने संवेदनशील मुद्दे पर पीस कमेटी, दोनों समुदायों और शहर के संभ्रांत व्यक्तियों को दरकिनार करना कहीं से भी उचित नहीं था.

राजीव यादव
9452800752

25/11/2024

संभल हिंसा और मौतों के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार, घटना की हो उच्च स्तरीय जांच- रिहाई मंच

लखनऊ 25 नवम्बर 2024. रिहाई मंच ने संभल में हुए तनाव और तीन नागरिकों की मौत के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. कोर्ट के आदेश के बाद हो रहे सर्वे के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की भूमिका पर माननीय सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए. इतने संवेदनशील मुद्दे पर आनन फानन में की गई कार्रवाई प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है जिसमें तीन परिवारों ने अपनों को खोया.

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने कहा कि कानून व्यवस्था स्थापित करना शासन-प्रशासन का काम है, जिद और बदले की मानसिकता के चलते संभल में हिंसा हुई. आज से शुरू होने वाले संसद सत्र में अदाडी समूह रिश्वत मामले को लेकर उठने वाले सवालों को दबाने के लिए संभल जैसी घटनाओं की साजिश की गई. 19 नवंबर 2024 को कोर्ट में दावा पेश करने के चंद घंटों बाद सर्वे का आदेश और उसी दिन सर्वे, पर बहुत से सवाल हैं. सर्वे टीम के साथ पुलिस की घेराबंदी में नारेबाजी का वीडियो किसी सर्वे टीम का नहीं बल्कि राजनीतिक समर्थकों का हुजूम था. लोगों द्वारा सवाल उठाने पर जिलाधिकारी और एसपी द्वारा सर्वे रोकने से इनकार करना कानून व्यवस्था की बड़ी चूक थी जिसकी वजह से जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ. कमिश्नर यह कहकर नहीं बच सकते कि तैयार होकर जुटी थी भीड़, आखिर खुफिया विभाग कहां था.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि नागरिकों की हिंसा में मौत के बाद पुलिस का यह कहना कि उपद्रवियों द्वारा पुलिस पर की गई फायरिंग में ही तीन लोगों की जान गई पर सवाल उठता है. संभल एसपी का कहना है कि बवाल के दौरान पुलिस ने गोली नहीं चलाई तो आखिर में वायरल वीडियो में कहां की पुलिस फायरिंग और पत्थरबाजी कर रही है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की बात कहने वाले प्रशासन को गोली चलाओ, मारो-मारो और गाली देने वाला पुलिस का कारनामा नहीं दिखा. हिंसा के शिकार युवकों के परिजनों ने पुलिस की गोली से मौत होने की बात कही है ऐसे में इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो. भविष्य बर्बाद होने की चेतावनी देने वाले पुलिस अधिकारियों ने अगर भविष्य के बारे में सोचा होता तो हिंसा नहीं होती. आखिर एक बार उसी मस्जिद का सर्वे हो चुका था तो कुछ नहीं हुआ और फिर दूसरी बार ऐसा क्या हुआ जो तनाव भड़का. प्रशासन कह रहा है कि सर्वे का विरोध करते हुए नारेबाजी और पत्थरबाजी होने लगी. यह जांच का विषय है कि आखिर सर्वे टीम के साथ चल रहे नारे लगाने वाले कौन थे. क्या इन नारा लगाने वाले और सर्वे का विरोध करने वालों के बीच यह तनाव बढ़ा. अगर ऐसा नहीं तो प्रशासन बताए कि तनाव के माहौल सर्वे टीम के साथ नारेबाजी करने वालों को क्यों नहीं रोका गया या अबतक उनपर क्या कार्रवाई की गई. क्या इसी तरह के नारों के उकसाए में आकर संभल में तनाव भड़क गया. रासुका के तहत कार्रवाई की बात कहने वाला प्रशासन बताए कि किस वजह से किसके कहने पर कानून व्यवस्था को ताक पर रख दिया गया जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो गया.

रिहाई मंच ने प्रयागराज के अधिवक्ता काशान सिद्दीकी को पुलिस द्वारा उठाए जाने की निंदा करते हुए तत्काल रिहाई की मांग की. गौरतलब है कि काशान सिद्दीकी की पत्नी अस्मा फातिमा जो कि पार्षद भी हैं ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज से शिकायत की है कि काशान को 24.11.24 को समय करीब 10:50 बजे रात क़ो पुलिस घर के पास से उन्हें करेली थाना पर ले गयी. उन्हें किस संबंध में उठाया गया है क्या उनके खिलाफ कोई मुक़दमा हुआ है या कोई वारंट है आदि कुछ भी नहीं बताया जा रहा है. जब कुछ अधिवक्ता और पत्नी और बहन करेली थाने पर पहुंच कर पूछताछ किया तो पुलिस कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाई, पुलिस का कहना है कि केवल पूछताछ के लिए लाया गया है. देर रात करेली थाने से भी उन्हें हटा दिया गया और उनके घर परिवार को भी उनके बारे मे कोई जानकारी नही दी जा रही है.

राजीव यादव
9452800752

14/10/2024

बहराइच सांप्रदायिक तनाव के लिए योगी जिम्मेदार, नहीं संभल रही कानून व्यवस्था- रिहाई मंच

व्यक्ति द्वारा झंडा उतारने और दूसरा झंडा लहराने वाले वायरल वीडियो की हो जांच

चुनावों में ध्रुवीकरण के लिए भड़काए जा रहे हैं सांप्रदायिक तनाव

लखनऊ 14 अक्टूबर 2024। रिहाई मंच ने बहराइच के महाराजगंज कस्बे में भड़के साम्प्रदायिक तनाव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था उनसे संभल नहीं रही है। मंहगाई-बेरोज़गारी जैसे मूलभूत सवालों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिकता भड़काई जा रही है।

यूपी समेत तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, झारखंड में हुए साम्प्रदायिक तनावों के लिए रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने कहा कि भाजपा चुनाव में ध्रुवीकरण के लिए साम्प्रदायिकता को भड़का रही है। साम्प्रदायिक तत्वों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि पुलिस की मौजूदगी में दंगा भड़काते हुए आगजनी कर रहें हैं। वीडियो से लोगों को चिन्हित करने वाली योगी सरकार लाठी-डंडो से लैश साम्प्रदायिक भीड़ कब चिन्हित कर करवाई करेगी।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि महराजगंज में हुए साम्प्रदायिक तनाव को लेकर आ रहे बयानों और झूठी अफवाओं के चलते साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई है। एक वायरल वीडियो सवाल उठाता है कि जिसमें एक व्यक्ति एक घर पर चढ़कर वहाँ फहर रहे हरे झंडे को खींचकर गिराता है जिस दौरान रेलिंग टूट जाती है और वह व्यक्ति उत्तेजना में दोनों हाथ उठाता है, भीड़ उत्तेजना में नारे लगाने लगती है और वह व्यक्ति भगवा झंडा लहराने लगता है। ऐसे में सवाल उठता है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में कैसे उसको घर में खींच लिया गया। अगर उस घर के लोग इतने मजबूत थे कि इतनी भीड़ में से उसको घर में घसीट लिया तो उनकी मौजूदगी में कोई कैसे उनके घर के ऊपर चढ़ जाता है। ऐसे में किसी तरह का निष्कर्ष अफवाहों को बढ़ाएगा। ऐसे में यह जाँच का विषय है।

मंच महासचिव ने कहा कि कहा जा रहा है कि विसर्जन यात्रा के दौरान पथराव की घटना का पूजा समिति के लोगों ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। वहीं कुछ का बयान है कि डीजे को लेकर हुए विवाद के बाद पथराव हुआ। जिसके बाद मृतक दूसरे समुदाय के घर के छत पर चढ़ जाता है और वहां लगा झंडा हटा देता है और भगवा झंडा लहराता है। उसके बाद उसी घर से पथराव होता है और उस घर के लोग उसको घर के अंदर खींचकर बेरहमी से मारते हैं जिससे वह मर जाता है। बयानों में अंतर्विरोध है। पथराव के बाद लाठी चार्ज से तनाव बढ़ गया यह कहकर मृतक द्वारा घर पर चढ़कर झंडा उतारने और झंडा लहराने और भीड़ द्वारा उसे ऐसे करने के लिए दिए जा रहे समर्थन वाले वायरल वीडियो को नकारने की कोशिश की जा रही है।

रिहाई मंच के सचेंद्र प्रताप यादव ने भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी पर साम्प्रदायिकता भड़काने के लिए कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले भी शलभ मणि ने देवरिया में प्रेम चन्द यादव के हत्या के बाद हेट स्पीच देकर जाति तनाव को बढ़ाया था।

राजीव यादव
9452800752

अतीक और अशरफ या उसके बेटे असद समेत पूरे मामले में न्यायालय की भी भूमिका पर सवाल उठता है कि छोटी छोटी बातों पर संज्ञान ले...
17/04/2023

अतीक और अशरफ या उसके बेटे असद समेत पूरे मामले में न्यायालय की भी भूमिका पर सवाल उठता है कि छोटी छोटी बातों पर संज्ञान लेने वाला न्यायालय आखिर क्यों इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, अगर लिया तो क्या योगी आदित्यनाथ सरकार और उनके प्रशासन ने उसकी अवहेलना की.

अतीक और अशरफ की हत्या करने वाले जिस तरह से जय श्री राम के नारे लगाए और जिसके बाद बधाई के संदेश दिए जा रहे हैं वो साफ करता है कि यह एक राजनैतिक हत्या है और जिसमें सबसे ज्यादा खतरनाक यह है कि इसमें स्टेट शामिल है. यानी स्टेट वॉयलेंस.

(समाज वीकली)- पुलिस हिरासत में मीडिया के कैमरों के सामने अतीक अहमद और अशरफ हत्या कांड पर रिहाई मंच महासचिव राजीव याद...

17/04/2023

यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में मोमबत्ती जलाकर दी गई श्रद्धांजलि (समाज वीकली)- लखनऊ 15 अप्रैल 2023. बलिया के छात्रनेता हेमंत या...

29/11/2022

िसंबर_2022 #अन्नदाता_के_संघर्ष_के_पचास_दिन
#चलो_खिरिया_बाग #मंदुरी_आजमगढ़

#किसानसंघर्षयात्रा

दोस्तों,
आज़मगढ़ की जनता यह बात समझ रही है कि सरकार पहले सरकारी एयरपोर्ट के नाम पर जमीन से हमें बेदखल कर देगी फिर उसे किसी देशी-विदेशी कंपनी को सौंप देगी। लोग यह समझते हैं कि खेती और गांव उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी जीविका व आवास उपलब्ध कराते हैं। महंगाई जिस गति से बढ़ रही है और मुद्रा का जिस गति से अवमूल्यन हो रहा है। मुआवजे की कोई भी राशि जमीन की तुलना में छोटी है। 15 सालों से मंदुरी में एयरपोर्ट बना हुआ है लेकिन स्थानीय लोगों के जीविकोपार्जन में उससे कोई लाभ नहीं है।

किसान संघर्ष यात्रा

कानपुर से आजमगढ़

30 -11-22 से 01-12-22

30 नवम्बर 2022 पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर अम्बेडकर नगर शाहगंज रोड टोल प्लाजा पर 12 बजे स्वागत

मिल्कीपुर पर्चा वितरण

पवई पर्चा वितरण

रामापुर पर्चा वितरण

चकिया पर्चा वितरण

माहुल पर्चा वितरण

दखिन गावां पर्चा वितरण

अम्बारी 3 बजे किसान-मजदूर संवाद

1 दिसंबर फूलपुर पर्चा वितरण

1 दिसंबर 10 बजे सरायमीर में पत्रकार साथियों के साथ वार्ता

संजरपुर पर्चा वितरण

फरिहा पर्चा वितरण

निज़ामाबाद पर्चा वितरण

सोफीपुर पर्चा वितरण

तहबरपुर पर्चा वितरण

नेवादा पर्चा वितरण

मंदुरी पर्चा वितरण

ढाई बजे खिरिया की बाग

किसानों-मजदूरों के इस संघर्ष में आप सभी सादर आमंत्रित हैं.

संपर्क नंबर - डॉ संदीप पांडे - 0522 2355978 ( लखनऊ )
राजीव यादव - 8210437705 ( आजमगढ़ )
विरेन्द्र यादव - 9838302015 (आज़मगढ़)
अनिल मिश्रा - 8707449208 ( उन्नाव )
केएम भाई - 7985181117 ( कानपुर )

हम, भारत के लोग, देश के अन्नदाता

29/06/2022

कन्हैया लाल की निर्मम हत्या नफरती राजनीति का परिणाम- रिहाई मंच

इलाहाबाद के राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं पर 25-25 हजार का ईनाम घोषित कर मुठभेड़ के नाम पर हत्या की साजिश

तीस्ता सीतलवाड़, पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी मोदी सरकार की बदले की कार्रवाई

लखनऊ 29 जून 2022. रिहाई मंच ने उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या की कड़ी भर्त्सना की और सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि नफरत की राजनीति ने देश को खतरे में डाल दिया है. मंच ने नुपुर शर्मा की अब तक गिरफ्तारी न होने को भी घटना का प्रमुख कारण माना है.
कानपुर तनाव को लेकर पाकिस्तानी कनेक्शन जैसी थ्योरी सूंघना मामले को विदेशी साजिश का हिस्सा कहने की कोशिश है. अटाला, इलाहाबाद की घटना में वांछित 5 अभियुक्तों पर 25-25 हजार पुरस्कार घोषित करते हुए पुलिस द्वारा एनकाउंटर का बयान जारी करना मुठभेड़ के नाम पर हत्या की साजिश की ओर इशारा करता है.
मंच ने वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार और पत्रकार जुबैर की गिरफ्तारी को बदले की कार्रवाई कहा. मंच ने जौनपुर के पवारा थाना क्षेत्र के रामपुर हरिगिर गांव निवासी सतीश प्रजापति के घर पर यादव समुदाय के लोगों द्वारा कुम्हार समुदाय की महिलाओं पर ताबड़तोड़ लाठी डंडे से हमले की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि देश में नफरत की राजनीति को बढ़ावा देने का परिणाम है उदयपुर की घटना. उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में राजनीतिक दखलंदाजी ने देश को खतरे में डाल दिया है जहां दो समुदायों को एक दूसरे का दुश्मन घोषित कर राज किया जा रहा है. मॉब लिंचिंग और उसके बाद वीडियो बनाकर उसे वायरल करना हत्यारी प्रवृत्ति बन गई है, जिसे उदयपुर की घटना में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि उदयपुर की घटना पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है नहीं तो कल एक-दूसरे पर विश्वास करना मुश्किल हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि नुपुर शर्मा, नवीन जिंदल की गिरफ्तारी अगर हो गई होती तो देश में न कहीं प्रदर्शन होते न उदयपुर की घटना. लेकिन खून की प्यासी राजनीति को यही भाता है कि देश में साम्प्रदायिकता की खाईं बढ़ती जाए. यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है नहीं तो जो पुलिस तीस्ता, आरबी श्रीकुमार, ज़ुबैर को गिरफ्तार कर सकती है वो आखिर नूपुर को क्यों नहीं. जकिया जाफरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद न्याय, लोकतंत्र को बचाने वालों की ही गिरफ्तारी एक गंभीर संकट की तरफ इशारा करती है कि न्यायपालिका का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि इलाहाबाद के वरिष्ठ वामपंथी नेता आशीष मित्तल, उमर खालिद, फ़ज़ल खां, जीशान रहमानी और शाह आलम को आरोपी बनाते हुए 25-25 हजार का ईनाम घोषित करना बदले की कार्रवाई है. जिस तरह इस मामले में पुलिस ने पुरस्कार घोषित करते हुए संयोगवश मुठभेड़ की बात कही है उससे साफ है कि इनका जीवन संकट में है. ऐसे के मानवाधिकार आयोग को संज्ञान में लेना चाहिए क्योंकि योगी राज में यूपी पुलिस पर मुठभेड़ के नाम पर हत्या के आरोप लगते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस जिन्हें ईनामिया घोषित कर रही है वो सभी राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता-नेता हैं. पुलिस द्वारा इस मामले में इनको चिन्हित करने का कारण सीएए विरोधी आंदोलन है. जिस आंदोलन में संविधान बचाने के लिए इंसाफ पसंद अवाम सड़कों पर उतर आई थी. न्याय हित में विधिक रूप से गिरफ्तार करने के दौरान संयोगवश मुठभेड़ की स्थिति बनने की बात कहने वाली पुलिस बताए कि किस न्याय हित में किसके इशारे पर जावेद को मिली नोटिस के नाम पर उनकी पत्नी के घर पर बुलडोजर चला दिया गया.

द्वारा
राजीव यादव
महासचिव, रिहाई मंच
9452800752

16/06/2022

बुलडोजर की कार्रवाई कर नजीर बनाने वाले विभिन्न आरोपों से घिरे योगी खुद पर कब कार्रवाई करके बनाएंगे नजीर- रिहाई मंच

इलाहाबाद 16 जून 2022. इलाहाबाद में दस जून को हुए तनाव के बाद रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने इलाके का दौरा करते हुए वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात की. मंच ने अम्बेडकर नगर में वांछित के नाम पर पोस्टर जारी करने, कथित रूप से सहारनपुर में पुलिस द्वारा लोगों को कमरे में बंद करके बेरहमी से पिटाई और हाथरस में लोगों के घरों पर नोटिस चस्पा करने को बदले की कार्रवाई कहा.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने जावेद मोहम्मद के घर गिराने की घटना पर कहा कि अगर आरोपी के नाम पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई कर योगी नजीर बना रहे हैं तो सबसे पहले उन्हें खुद पर लागू करना चाहिए. हत्या, दंगा, बलवा समेत विभिन्न आरोपों से घिरे योगी आदित्यनाथ अगर यह समझते हैं कि आरोप लगने भर से दोष सिद्ध हो जाता है तो ऐसे में उन्हें खुद को दोषी मानकर रिकवरी लॉ का इस्तेमाल कर खुद नजीर बनना चाहिए. योगी की पुलिस जावेद मोहम्मद को दोषी मानती है तो ऐसे में कैसे किस कानून के तहत उनकी पत्नी के मालिकाने वाले मकान को ढहा दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ मुस्लिम विरोधी मानसिकता के तहत ऐसा कर रहे हैं. उनके कई मुस्लिम विरोधी बयानों के खिलाफ मामला अदालतों में लंबित है. नुपुर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई न होने के पीछे भी कारण है कि योगी-मोदी समेत तमाम भाजपा के नेता इसीलिए नेता हैं कि वे संघ प्रायोजित मुस्लिम विरोधी राजनीति को बढ़ाते हैं.

मंच महासचिव ने विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है की जब योगी आदित्यनाथ अपने संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए साम्प्रदायिक राजनीति का विस्तार करते हुए गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़ मंडल समेत पूरे पूर्वांचल को सम्प्रदायिक हिंसा में शामिल कर रहे थे तब अगर इनके खिलाफ कार्रवाई हुई होती तो ये स्थितियां नहीं होती. बुलडोजर की कार्रवाई के जरिए योगी बदले की कार्रवाई के तहत विरोधियों को कुचल रहे हैं.

द्वारा
राजीव यादव
महासचिव, रिहाई मंच
9452800752

11/06/2022

कानून व्यवस्था की दुहाई से नहीं नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी से बहाल होगी शांति- रिहाई मंच

सरकार बताए नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी से वह किस दिक्कत में पड़ जाएगी, जो नहीं हो रही गिरफ्तारी

लखनऊ 11 जून 2022. रिहाई मंच ने नुपुर शर्मा के बयान के बाद हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के तहत तत्काल नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की. देश-प्रदेश में अराजकता की स्थिति के लिए भाजपा सरकार को दोषी ठहराया. सूबे के हाथरस, अम्बेडकर नगर, मुरादाबाद, सहारनपुर, इलाहाबाद समेत सात जिलों में ग्यारह एफआईआर दर्ज हुए जिसके तहत 237 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं सहारनपुर में दो व्यक्तियों के घर पर बुलडोजर चलाकर ढहा दिया है और इलाहाबाद में भी बुलडोजर, रासुका गैंगेस्टर की धमकी दी जा रही है. मंच ने कहा की कानून व्यवस्था की बात करने वाले योगी आदित्यनाथ को प्रदर्शकारियों के साथ खड़ा होना चाहिए क्योंकि वो भी नुपुर द्वारा किए जा रहे कानून व्यवस्था तोड़ने वाले कृत्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. प्रशासन समाज के जिम्मेदार लोगों से शुरू करे संवाद.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटने का दावा करने वाले योगी आदित्यनाथ और केंद्र की भाजपा सरकार जानबूझकर नुपर शर्मा को गिरफ्तार न करके अराजकता की स्थिति बनाए रखना चाहती है. भाजपा ने नुपर को प्रवक्ता के पद से हटा दिया पर गिरफ्तारी न करके वो विरोध-प्रदर्शनों को हवा देकर साम्प्रदायिक विभाजन कायम रखना चाहती है. एक नुपर की गिरफ्तारी न होने के चलते आज सैकड़ों लोग पुलिसिया हिंसा के शिकार और जेल की सलाखों के पीछे ठूंसे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये सब आरएसएस की रणनीति के तहत हो रहा है. कभी कश्मीर फाइल्स, कभी हलाल, कभी ज्ञान व्यापी, कभी मथुरा तो अब नुपुर शर्मा के जरिए नफरत की खेती की जा रही है. जिस सवाल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को जवाब देना पड़ रहा है उस सवाल को हल न करके मुस्लिम विरोध-प्रदर्शनों की आक्रमक छवि को प्रस्तुत करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि इन विरोध-प्रदर्शनों के पीछे फंडिंग और साजिश देखने वाली सरकार अगर भाजपा प्रवक्ताओं द्वारा फैलाए जा रहे नफरत के बवंडर को रोकती तो सड़कों पे ये तूफान न आता. योगी सरकार इस मौके को दमन के मौके के रूप में देखकर कार्रवाई कर रही है.

राजीव ने इलाहाबाद में तनाव के बाद सीएए विरोधी आंदोलन के नेताओं को प्रशासन द्वारा निशाने पर लेने को बदले की कार्रवाई कहा. प्रदर्शनों में बच्चों के शामिल होने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग चिंता जता रहा है पर उसे इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि इन नफरती बयानों ने मुल्क में कैसी आग लगा दी कि बच्चे भी सड़क पर आ गए. ऐसे में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की सिफारिश करनी चाहिए.

द्वारा
राजीव यादव
महासचिव, रिहाई मंच
9452800752

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