Shri Dhan Laxmi

Shri Dhan Laxmi Shri Dhan Laxmi is a news paper. we have daily and weekly both news paper with the same name in UP

30/09/2022
31/05/2019

घास - फूस का घर, आने - जाने के लिए साइकिल और पेंशन की राशि को गरीब बच्चों के लिए दे देना। मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हुय....

29/03/2019

अयोध्या- कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को भाजपा पर देश के संविधान और लोकतंत्र को नष्ट करने क....

28/03/2019

मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनाव प्रचार मुहिम शुरू करते हुए बृहस्पत...

03/03/2019

नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ लोगों द्वारा अपने ही देश का विरोध करने को राष्ट्र के समक्ष चुनौती बत...

16/01/2015

आराजकता और दहशतगर्दी की औकात
धर्म के नाम पर अराजकता फैलाना, बे-कसूर लोंगों की हत्या करना और धर्मान्तरण पर अपनी तीखी टिप्पणी करना अराजकता फैलाने वालो की एक शान की पहचान है। जो लोग दूसरो की जान लेकर अपने आन्दोलनो या फिर जिहाद को जायज ठहराते है, वह पूरे विश्व की समाज में आतंकवादी के रूप में है। जिनकी पहली दलील यह सुनने को मिलती है कि उनके विचारो से भिन्न और उन पर टिप्पणी करने वालो तथा उनको नेस्तनाबूद करने वालो की जान लेने मे जरा सा भी उन्हें संकोच नही है। अपनी घटनाओं को अंजाम देने के बाद यह भी साबित करने के लिए स्वीकार करते है कि विरोधियों को इससे भी अधिक बुरे परिणागमो को भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। यानी वह समय-समय पर देश व विदेशों में दहशत का माहौल बनाया करते है। जिन धार्मिक मामलों के सहारे यह दहशतगर्दी लोग दरिन्दगी को पेश करते है उनसे एक प्रश्न है जिस धर्म को वह मानते है क्या वह धर्म इस बात की इजाजत देता हैं कि उन लोगों का खुले आम कत्ल कर दो जो उनके घर्म को ना मानते हो या फिर जो धर्म के बारे में एक अपनी निजी राय देने की ताकत पैदा करे उनका सरेआम कत्ल कर दो।
मेरा एक निजी अनुभव है कि धर्म की, वह चारो पवित्र किताबे भी इस बात की इजाजत नही देती है कि एक दूसरे धर्म के प्रति घृणा रखनी चाहिए। फिर विश्व में वह कौन लोग है जो धर्म की आड़ में अराजकता और दहशतगर्दी फैलाने का काम करने का प्रयास कर रहे हैं।
मै इस बात से सहमत हॅू कि दहशत का माहौल पैदा करने वाले केवल शक्ति प्रदर्शन के सहारे लोकतत्र के मनसूबो पर पानी फेरना चाहते है, या फिर उनका इरादा इतना होता है कि देश की सरकार उनकी बंदूक की नोक पर चले। इसके लिए अराजकता और दहशत फैलाने वाले लोग अपने-अपने धर्मो के सहारे अपने ही लोगों का लहू पीने का काम करते है। जिनके एजेण्ट धर्म के वह ठग है जो अपने आप को धर्मगुरू कहलवाने का डंका पिटवाते रहते है देश-विदेश की अवाम अज्ञानता से भरी, कूप मण्डूक की भाॅति, रूढि़वादी विचारों से चलने वाली, भोली भाली है जो उनके आयोजनो को सफल बनाती हैे। सबसे बड़ी दुःखद बात यह है इन आयोजनों में देश विदेश की राजनीतिक पार्टियों के सफेदपोश लोग इन पर अपना सहयोगी हाथ बनाये रखते है।
हम अपनी बात की बानगी इसी बात से देना चाहते है कि अभी हाल में ही फाॅ्रस की शार्ली एबदो की एक पत्रिका के संपादक सहित पत्रकारो पर आतंकवादियों ने हमला किया था जिसमें लगभग 12 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी यह लोग अपने धर्म का नारा लगाते हुए हत्या करके फरार हो गये थे। इस काण्ड को लेकर भारत के उत्तर प्रदेश के बसपा समर्थित नेता हाजी याकूब कुरैशी के द्वारा मीडिया के सामने बयान दिया गया कि फ्रांस में जो मीडिया के ऊपर कातिलाना हमला हुआ था, वह ठीक था, यदि कातिल उन्हें मिल जाये तो वह 51 करोड का पुरस्कार उन्हें देंगे। इस बात से यह लगता है वह अपने आप को एक ओर सेक्यूलरवादी नेता कहते हैं तो दूसरी ओर अराजकता फैलाना उनकी पहली प्राथमिकता भी देखने को मिली।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ ने माना कि पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़ बन चुका है। जहाॅ एक नही कई आतंकवाद के गुरू छुपे रहे और अभी छुपे होने की संभावनाएं भी है। यह तभी संभव जब तक पाकिस्तान उन्हें पनाह दिये हुए है। ओसामा बिन लादेन की हत्या जिस प्रकार से अमेरिकी सैनिको द्वारा पाकिस्तान में की गई उससे पाकिस्तान की झूठ का पिटारा खुल चुका है। यानी वह आंतंकवादियों को छुपाने का कार्य करता है। धर्म के आधार पर कानून चलाने वालो में से पाकिस्तान भी उनमें से एक है जहाॅ बात तो धर्म की जाती है। लेकिन वास्तव में यदि वह धर्म के नाम पर चले तो वहाॅ अमन-चैन हो, भविष्य में पेशावर जैसी धटना ही न घटित होती। परन्तु पाकिस्तान को यह कब समझ में आयेगा कि उसके अपने 40,000 लोग इस आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके है।
हम अब ध्यान भारत की ओर आकर्षित कराना चाह रहे है यहाॅ भी विदेशों से अराजकता की हवा के झोके आते रहते है। केन्द्र में वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी के नेतृत्व करने वाले व्यक्ति की लोकप्रियता जम्मू से कन्याकुमारी तक बढ़ती जा रही है। इस बात से हैरान यहाॅ की विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के मुखियाओ की नींद हराम हो चुकी, वह हैरान है, जबकि ऐसे समय उन्हें लोकतंत्र को और बेहतर मजबूत बनाने के लिए धीरज से काम लेना चाहिए। परन्तु वह धर्मान्तरण पर अपनी बयानबाजी करते हैं। जो इस बात का प्रमाण है कि वह सेक्यूलर नही है क्योकि सेक्यूलर वही है जो विवादो को हवा न दे। धर्मान्तरण करना कोई नही बात नही है यह होता आया है और होता रहेगा। धर्मान्तरण पर मुझे आज भी याद है कि हरियाणा के एक राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाले ही नही अपितु सरकार में थे जिन्होने इस्लाम धर्म स्वीकार करके शादी कर ली थी तब धर्मान्तरण का मुद्दा क्यो नही बना, हालाॅकि फिर उनकी घर वापसी भी हुई लेकिन फिर भी धर्मन्तरण का मुद्दा नही बना तो फिर अब क्यो? यानी धर्मान्तरण पर जो भी लोग अपनी-अपनी बयान बाजी कर रहे है। यदि राजनीतिक तौर पर जनता का प्रतिनिधित्व करता हैं तो वह जनता में अराजकता का माहौल बना रहा है। इसे रोकना शासन और प्रशासन का काम तो हैं लेकिन उसे और अधिक हवा देने का काम नही।
हम सत्ता में रहे या फिर विपक्ष में यह सभी को ध्यान देना होगा कि वह ऐसी बयानबजी न करे जिससे अराजकता का माहौल बने, बल्कि ऐसे बयानों को मीडिया में कहे जिससे देश की जनता में प्रेम का व्यवहार बने। क्योकि चुनाव जीतने के बाद हर एक वह जनप्रतिनिधि सभी लोगों का शुभचिन्तक होकर सदन में कार्य करता हैं भले ही उस प्रतिनिधि के लिए व्यक्ति ने अपने मत का प्रयोग किया हो या फिर न किया हो। यही लोकतंत्र की ताकत है। जिसमें आवाम में सुख मिलता।

05/01/2015

नेतृत्व का मंथन
पुराने साल की आखिरी रात थी, कि एक बार फिर बदायूॅ पुलिस ने प्रदेश सरकार की छवि पर बदनुमा दाग लगा दिया। हैवानियत और बढ़ते अपराधों तथा कतिपय भ्रष्ट नेताओं की करतूतों से सूबे की सरकार की छवि गिरती जा रही हैं यहाॅ का मुखिया एक ही रट लगाये हुए है-‘‘सज रहा है आज, सॅवर रहा है कल’’। वह कैसे सॅवरे हुए कल की कल्पना करते है और उल्टे यदा-कदा मीडिया पर ही आरोप लगाते हुए देखे गये कि मीडिया को उनके अच्छे काम करने को अधिक प्रचारित करना चाहिए।
एक कुशल नेतृत्व करने वाले के लिए उसकी आलोचनाएॅ उसकी चुनौतियां होती हैं न कि आलोचनाओ से किसी की छवि बिगड़ती और बनती हैं। इसलिए मैं तो यही मानता हॅू कि सूबे के मुखिया को अपने नेतृत्व की इस प्रकार की नजीर पेश करनी चाहिए कि आवाम की जनता उनके सुशासन को याद रखें।
शाही घराने में जन्में यादव सिंह पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने और भ्रष्टाचार के ऐसे आरोप लगे कि अनेतावाम की जनता ने भी दाॅतो तले उॅगली दबा ली थी, परन्तु सूबे की सरकार ने उन्हें सस्पेण्ड तक नही किया, काफी हीला-हवाली के बाद विलम्ब से उन पर निलम्बन की गाॅज गिरी।
लखनउ के मोहनलाल गंज के बलसिंह खेड़ा गाॅव के एक प्राथमिक विधालय में एक युवती हवस का पहले शिकार हुई उसके बाद उसकी निर्दयतता पूर्वक हत्या कर दी गई। प्रारम्भिग घटना की जाॅच करने वाले एक से एक अधिकारी इस बात का बयान देते हुए दिखे थे कि पूरे काण्ड को अंजाम देने वाले तीन से चार लोग है, लेकिन बाद में सब कुछ ढाॅक का पाॅत सिद्व हुआ, क्योकि सलाखों की जेल के पीछे एक ही अपराधी राम सेवक यादव है। यह बात आवाम की जनता के गले की नीचे नही उतर रही है। लेकिन वह चुप रहने के सिवा अब कुछ नही कर सकती है।
मायावती सरकार की भाॅति ही सूबे की सरकार का कैबनेट मंत्री गायत्री प्रजापति लोकायुक्त की जांच के घेरे मे घिरता जा रहा हैं तो उसने यह राग अलापना शुरू कर दिया कि वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति है और पिछड़े वर्ग से है। जिसके कारण उसके विरोधियों की उसकी लोकप्रियता पसन्द नही हैं अब उसे गलत फंसाया जा रहा हैं। हाल ही में एक कोर्ट ने महोबा के एक विधायक कप्तान सिंह और उसके भतीजे पर एक हत्याकाण्ड में उसे शातिर अपराधी माना हैं, वह जेल की सलाखों में कैद है।
हम याद दिलाना चाहते हैं कि बदायूॅ की उन दो बहनों की हत्याकाण्ड की जिन्हें एक पेड़ से लटका दिया गया था। यहाॅ की पुलिस पहले इस बात का दावा करती रही कि लड़कियों के साथ पहले बलात्कार किया गया उसके बाद उनकी हत्या करके एक पेड़ से लटका दिया गया। विपक्षियों ने सरकार को आड़े हाथ लिया और सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर सवालियाॅ प्रश्न उठाये। सूबे के मुखिया साहब ने सरकार की किरकरी होते देख प्रशासन को दूध का दूध पानी का पानी करने का आदेश दे डाला और जाॅच एजेन्सियों ने यह खुलासा कर दिया कि दोनो बहनों के साथ बलात्कार हुआ ही नही था।
रात गई और बात गई का मामला आवाम की जनता के दिलो-दिमाग से अभी भुलाया भी नही जा सका था कि बदायॅू के मूसाझाग के थाने में 31 दिसम्बर 2014 की रात को पुलिस आवास में ही एक मजदूरी करने वाले घर की 16 वर्षीय बालिका को दो सिपाहियो द्वारा अगवाकर के बलात्कार करने की घटना से सूबे की सरकार की छवि बिगाड़ने का नया अध्याय जोड़ दिया है।
निश्चय ही आवाम इस बात से हैरान है कि इस बार भी दोना बलात्कारी सिपाही यादवों के परिवार से ताल्लुक रखने हैं, क्राइम बाॅ्रच की टीम को सर्विलांस से मिली जानकारी के अनुसार उनकी लोकेशन इटावा की ओर मिल रही है। टीम ने वहाॅ पर उन्हें पकड़े के लिए अपना डेरा तो जमा दिया, परन्तु गिरफतारी नही कर पायी। सरकार ने भी आनन-फानन में मामले को अधिक हवा न मिलने पाये तो पीडि़ता की माॅ को पाॅच लाख रूपया मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलवा दिया। यानी सरकार इस बार इस बात को खूब समझ चुकी है कि पीडि़ता के साथ उत्तर प्रदेश के दोनो सिपाही अवनीश यादव और वीरपाल यादव ने ही बलात्कार किया हैं।
मुखिया जो को यह समझना होगा कि जब सूबे की पूर्व मुखिया सुश्री मायावती ने राजधानी में पत्थरो की सजावट से भी आवाम का दिल नही जीत पाई, और चन्द मुट्टी भर उनके मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप ने उन्हें सत्ता के गलियारों से बाहर कर दिया तो मेटो सिटी और आगरा एक्सप्रेस-वे तथा आईटी हब का निर्माण करने के बाद सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था की हीला-हवाली में उन्हें आवाम की जनता आम चुनावों में कितना साथ देंगी। क्योकि राजनीति में इतिहास गवाह है जब-जब सुरक्षा और कानून वयवस्था पर सवालिया निशान उठे और सत्ता पक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो उसको सत्ता के गलियारे के बाहर का रास्ता देखना पड़ा, क्योकि उस समय आवाम की जनता के लिए उसके द्वारा किया गया विकास का चार्ट ‘‘उॅट के मुॅह में जीरा’’ ही साबित होता आया है और आगे भी ऐसा होगा। इसलिए यह तो अब सबक यूपी के मुखिया को लेना ही होगा कि यदि वह चाहते है कि ‘‘सज रहा हैं आज संवर रहा है कल’’ तो उन्हें सूबे की सरकार की गिरती छवि को राकना होगा, जो उनके कुशल नेतृत्व का परिचय देगा।

Ek like to banta kya kahte hai is photography ke liye???
22/04/2013

Ek like to banta kya kahte hai is photography ke liye???

Address

Lucknow
226003

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shri Dhan Laxmi posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share