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Attractive designs, creative content, and strategic planning by an experienced team. तहकीकात डिजिटल मीडिया को भारत के ग्रामीण एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों में समाज के अंतिम पंक्ति में जीवन यापन कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान करने के लिए निर्माण किया गया है ,जिसके माध्यम से समाज के शोषित ,वंचित ,गरीब,पिछड़े लोगों के साथ किसान ,व्यापारी ,प्रतिनिधि ,प्रतिभावान व्यक्तियों एवं विदेश में रह रहे लोगों को ग्राम पंचायत की कालम के माध्यम से एक साथ जोड़कर उन्हें एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया जायेगा एवं उनकी आवाज को बुलंद किया जायेगा।

पहले पिता का साया उठा, अब मां भी चली गईं, चार बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़कृपा शंकर चौधरी मोतीराम अड्डा। खोराबार थाना क...
08/09/2026

पहले पिता का साया उठा, अब मां भी चली गईं, चार बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़

कृपा शंकर चौधरी

मोतीराम अड्डा। खोराबार थाना क्षेत्र के भैसहां बाढ़न अकटहवा गांव में एक परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। कुछ समय पहले लंबी बीमारी के बाद पिता की मौत हुई और अब सर्पदंश से मां की भी जान चली गई। माता-पिता दोनों को खो चुके चार मासूम बच्चों के सामने अब जिंदगी की कठिन राह खड़ी हो गई है।

गांव निवासी सिरताजी देवी (45) पत्नी स्व. विद्या निषाद को सोमवार को सर्प ने डस लिया था। परिजन आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां इलाज के दौरान मंगलवार को उनकी मौत हो गई।

सिरताजी देवी के पति विद्या निषाद की कुछ समय पहले ही लंबी बीमारी के बाद मौत हुई थी। पति की मौत के बाद परिवार किसी तरह संभलने की कोशिश कर ही रहा था कि अब मां की भी मौत हो गई। सिरताजी देवी अपने पीछे चार बच्चों को छोड़ गई हैं। इनमें सबसे बड़ा पुत्र करीब 18 वर्ष का है, जबकि उसके बाद तीन बेटियां हैं। माता-पिता दोनों का साया सिर से उठ जाने के बाद इन बच्चों के सामने पालन-पोषण, पढ़ाई और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।

बताया जाता है कि पिता ने बीमारी के दौरान कर्ज भी लिया था। पिता की मौत के बाद परिवार पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा था। अब मां की असमय मौत ने बच्चों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन बच्चों के भविष्य को लेकर ग्रामीण भी चिंतित हैं।

जिस उम्र में बच्चों को माता-पिता के सहारे अपने भविष्य के सपने संजोने चाहिए थे, उसी उम्र में चारों बच्चों के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया। गांव में घटना की जानकारी होने के बाद शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और समाज के सक्षम लोगों से पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आने की उम्मीद जताई है।

आरक्षण का आधार जाति नहीं, वंचना क्यों हो?कृपा शंकर चौधरी भारत में आरक्षण केवल सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में सी...
08/09/2026

आरक्षण का आधार जाति नहीं, वंचना क्यों हो?

कृपा शंकर चौधरी

भारत में आरक्षण केवल सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में सीटों का बंटवारा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, ऐतिहासिक वंचना और समान अवसर से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। इसी कारण आरक्षण पर बहस होते ही समाज में भावनाएं भी उभरती हैं और राजनीतिक मतभेद भी। ऐसे समय में प्रभात रंजन सरकार द्वारा प्रतिपादित प्रगतिशील उपयोग तत्त्व—PROUT का आरक्षण संबंधी दृष्टिकोण एक अलग और विचारणीय दिशा प्रस्तुत करता है।

PROUT की मूल अवधारणा यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को केवल उसके जन्म या जातीय पहचान के आधार पर प्राथमिकता मिले। इसके बजाय वास्तविक आर्थिक और शैक्षणिक वंचना को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। प्रभात रंजन सरकार ने वर्तमान सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के लिए चार स्तर की प्राथमिकता का उल्लेख किया था—पहली प्राथमिकता गरीब पिछड़े परिवारों को, दूसरी गरीब गैर-पिछड़े परिवारों को, तीसरी गैर-गरीब पिछड़े परिवारों को और अंतिम प्राथमिकता गैर-गरीब गैर-पिछड़े परिवारों को। यहां “पिछड़ा” केवल जाति का पर्याय नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों के अर्थ में प्रयुक्त किया गया है जिन्हें अतीत में शिक्षा और सामाजिक सुविधाओं का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

यहीं से आरक्षण पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है—क्या किसी व्यक्ति की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन उसके परिवार की वास्तविक वंचना देखकर नहीं होना चाहिए?

मान लीजिए एक परिवार आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर है। माता-पिता अशिक्षित हैं, परिवार में किसी ने उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं की और कई पीढ़ियों से रोजगार के सीमित अवसर ही उपलब्ध रहे हैं। दूसरी ओर, उसी क्षेत्र में एक ऐसा परिवार है जिसे ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा माना जाता है, लेकिन आज वह आर्थिक रूप से संपन्न है और उसके परिवार के कई सदस्य उच्च शिक्षा तथा सरकारी सेवाओं में स्थापित हैं। क्या दोनों परिवारों को अवसर देने की जरूरत समान है? PROUT इस प्रश्न का उत्तर वंचित व्यक्ति को अधिक प्राथमिकता देकर देने की कोशिश करता है।

इस दृष्टिकोण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गरीब सामान्य वर्ग के व्यक्ति को भी उपेक्षित नहीं करता। यदि गरीबी और अवसरों की कमी किसी व्यक्ति की वास्तविक बाधा है तो केवल उसकी जातीय पहचान के कारण उसे सहायता से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इसी प्रकार ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के उन परिवारों को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो आज भी शिक्षा और आर्थिक अवसरों से पीछे हैं।

हालांकि यहां एक सावधानी भी जरूरी है। भारत में SC, ST और OBC आरक्षण का आधार केवल वर्तमान गरीबी नहीं है। इनके पीछे ऐतिहासिक सामाजिक और शैक्षणिक वंचना तथा प्रतिनिधित्व से जुड़े संवैधानिक उद्देश्य हैं। इसलिए PROUT के विचार को वर्तमान संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का सीधा विकल्प मानना उचित नहीं होगा। बल्कि इसे आरक्षण नीति के भीतर वास्तविक वंचित व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की दिशा में एक वैकल्पिक चिंतन के रूप में देखा जाना चाहिए।

PROUT का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है—आरक्षण को स्थायी व्यवस्था न मानना। प्रभात रंजन सरकार के विचार में जब तक समाज में आर्थिक और शैक्षणिक असमानता मौजूद है, तब तक पिछड़े लोगों के लिए विशेष प्रयास आवश्यक हैं। लेकिन ऐसी व्यवस्था का अंतिम लक्ष्य ऐसा समाज बनाना होना चाहिए जहां प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, रोजगार और न्यूनतम आवश्यकताओं की गारंटी हो और किसी को अवसर पाने के लिए आरक्षण का सहारा लेने की आवश्यकता न पड़े।

यही बात वर्तमान आरक्षण बहस को एक नई दिशा दे सकती है।

आरक्षण का उद्देश्य कितने लोगों को आरक्षण देना है, यह नहीं होना चाहिए; बल्कि यह होना चाहिए कि आरक्षण की जरूरत आखिर कब तक रहेगी।

यदि किसी गरीब परिवार के बच्चे को अच्छी शिक्षा, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, गुणवत्तापूर्ण विद्यालय और रोजगार का समान अवसर मिल जाए तो उसके लिए आरक्षण जीवन की अनिवार्यता नहीं रहेगा। इसलिए केवल आरक्षण की सीटें बढ़ाने की राजनीति के बजाय सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर अधिक ध्यान देना होगा।

PROUT की दृष्टि में पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए केवल आरक्षण पर्याप्त नहीं है। शिक्षा की असमानता दूर करना, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाना, छोटे एवं कुटीर उद्योगों को विकसित करना तथा परिवहन और संचार व्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक है।

आज आवश्यकता ऐसी नीति की है जो सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और अवसर की समानता—तीनों के बीच संतुलन बनाए।

आरक्षण पर बहस को ‘आरक्षण चाहिए या नहीं चाहिए’ की दो ध्रुवीय राजनीति से बाहर निकालकर यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए—

सबसे अधिक वंचित कौन है?
वह वंचित क्यों है?
उसे अवसर कैसे दिया जाए?
और ऐसी व्यवस्था कब बनेगी जब उसे विशेष अवसर की जरूरत ही न रहे?

यही प्रश्न PROUT के आरक्षण संबंधी चिंतन को आज भी प्रासंगिक बनाते हैं।

अंततः किसी भी आरक्षण नीति की सफलता इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि उसने कितनी सीटें बांटीं, बल्कि इससे होनी चाहिए कि उसने कितने वंचित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया।

न्याय का अर्थ केवल समान हिस्सा देना नहीं, बल्कि उस व्यक्ति तक अवसर पहुंचाना भी है जिसे उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

08/09/2026

खतरे में नौनिहाल!
नीचे: ब्रेकर नहीं, चारदीवारी अधूरी—हादसे का इंतजार क्यों?

11केवीए विद्युत लाइन शिफ्टिंग को लेकर कैथवलिया के ग्रामीणों में रोष, मुख्य अभियंता से की शिकायतरिपोर्ट विनोद कुमार सोनबर...
08/09/2026

11केवीए विद्युत लाइन शिफ्टिंग को लेकर कैथवलिया के ग्रामीणों में रोष, मुख्य अभियंता से की शिकायत

रिपोर्ट विनोद कुमार सोनबरसा बाजार एवं जगदीशपुर।

गोरखपुर/एम्स थाना क्षेत्र के ग्रामसभा कैथवलिया में 11
केवीए की एचटी विद्युत लाइन की शिफ्टिंग को लेकर ग्रामीणों और बिजली विभाग के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने आवासीय छतों और आबादी के बीच से लाइन खींचने का विरोध करते हुए मुख्य अभियंता विद्युत,गोरखपुर को शिकायती पत्र सौंपा है ग्रामीणों का आरोप है कि मकानों और घनी आबादी के बीच से 11केवीए की हाई-टेंशन लाइन निकाले जाने से भविष्य में हादसे का खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा नियमों के तहत घनी आबादी वाले इलाके से लाइन ले जाने के बजाय किसी अन्य सुरक्षित मार्ग का चयन किया जाना चाहिए। वही मुख्य अभियंता पत्रक देकर ग्रामीणों ने पुनः सर्वे करा कर लाइन शिफ्ट के कार्य करने की मांग की अवर अभियंता रणविजय कुमार बिंद ने बताया कि यह कार्य विद्यालयों के ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन को हटाकर बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से किया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस लाइन को स्थानांतरित किया जाना अत्यंत आवश्यक और जनहित से जुड़ा कार्य है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासकीय कार्यों और जनसुरक्षा परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न होने से कार्य प्रभावित होता है। फिलहाल, ग्रामीण जनसुरक्षा का हवाला देकर लाइन का मार्ग बदलने की मांग कर रहे हैं, वहीं विभाग स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियमत: कार्य संपन्न कराने के प्रयास में जुटा है।

07/09/2026

गौनर में दलित परिवार के घर हंगामा, प्रधान पर केस

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*गोरखपुर:- गौनर में दलित परिवार के घर हंगामा, प्रधान पर केस*
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*तहकीकात न्यूज़*

दो दशक से पंचायत भवन का इंतजार, कहां हों ग्राम सभा के विकास की बैठकें?जर्जर भवन बंद होने के बाद नहीं बना नया पंचायत भवन,...
07/09/2026

दो दशक से पंचायत भवन का इंतजार, कहां हों ग्राम सभा के विकास की बैठकें?

जर्जर भवन बंद होने के बाद नहीं बना नया पंचायत भवन, कई प्रधानों का कार्यकाल बीता

रिपोर्ट - कृपा शंकर चौधरी

गोरखपुर। विकासखंड खोराबार की ग्राम पंचायत कुई में करीब 20 वर्षों से पंचायत भवन की समस्या बनी हुई है। वर्षों पहले बना पंचायत भवन जर्जर होने के कारण बंद कर दिया गया, लेकिन इसके बाद नया भवन बनवाने की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी। इस दौरान कई ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो गया, मगर ग्रामीणों को अपना पंचायत भवन नहीं मिल पाया।

पंचायत भवन किसी भी ग्राम पंचायत के प्रशासनिक और विकास कार्यों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां ग्राम सभा की बैठकें, विकास योजनाओं पर चर्चा और ग्रामीणों से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित होती हैं। भवन नहीं होने के कारण ग्राम पंचायत को बैठकों और अन्य कार्यों के लिए वैकल्पिक स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन के अभाव में गांव की विकास प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को पंचायत स्तर की बैठकों और जरूरी कार्यों के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं हो पाता। वहीं, वर्षों से बंद पड़े पुराने जर्जर भवन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पुराने पंचायत भवन पर किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे की बात भी सामने आती रही है, जिसकी जांच कराया जाना जरूरी है।

मांग के बावजूद नहीं बनी बात

कुई ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि दिलीप चौधरी का कहना है कि नए पंचायत भवन के निर्माण के लिए संबंधित विभाग को कई बार जानकारी दी गई और जमीन उपलब्ध कराने तथा भवन निर्माण की मांग की गई, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि पंचायत भवन बनने से ग्राम सभा की बैठकें और विकास कार्यों से संबंधित गतिविधियां व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सकेंगी।

जल्द जमीन तलाशने का दावा

एडीओ पंचायत खोराबार अरविंद सिंह ने बताया कि पुराना पंचायत भवन जर्जर घोषित किया जा चुका है। नई पंचायत भवन के निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन उपलब्ध होते ही नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी कर पंचायत भवन का निर्माण कराया जाएगा।

सवाल यह है कि जब करीब दो दशक से ग्राम पंचायत बिना अपने भवन के काम चला रही है, तो अब तक जिम्मेदार विभाग की ओर से स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया? ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभागीय आश्वासन अब जमीन पर दिखाई देगा और जल्द ही कुई ग्राम पंचायत को अपना पंचायत भवन मिल सकेगा।

झंगहा महिला हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा, रेलकर्मी हिरासत मेंरिपोर्ट - कृपा शंकर चौधरी गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र ...
07/09/2026

झंगहा महिला हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा, रेलकर्मी हिरासत में
रिपोर्ट - कृपा शंकर चौधरी

गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र के गहिरा गांव में सड़क किनारे निर्वस्त्र अवस्था में मिले महिला के शव के मामले में पुलिस ने रविवार को अहम सुराग हासिल करते हुए देवरिया के बघौचघाट क्षेत्र के रहने वाले एक रेलकर्मी को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान रेलकर्मी ने महिला को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से स्कूटी पर बैठाकर गहिरा ले जाने तथा उसके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या करने की बात स्वीकार की है।

हालांकि पुलिस अभी मामले की अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर करेगी। सोमवार को महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

पुलिस के मुताबिक गुरुवार की सुबह गहिरा गांव के भूमिहारी टोला जाने वाले रास्ते के समीप महिला का शव बरामद हुआ था। शव की हालत को देखते हुए पुलिस ने हत्या समेत अन्य पहलुओं पर जांच शुरू की। जांच के दौरान महिला के बुधवार रात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने की जानकारी सामने आई।

स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर एक रेलकर्मी महिला को स्कूटी पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया। फुटेज के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की तलाश शुरू की और रविवार को उसे हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में सामने आई घटना की कड़ी

पुलिस के अनुसार पूछताछ में रेलकर्मी ने बताया कि वह महिला को स्कूटी से गहिरा की तरफ ले गया था। महिला बोल नहीं पाती थी। आरोप है कि वहां उसने महिला को शराब पिलाई और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। पुलिस के मुताबिक इसी दौरान आरोपी ने महिला का मुंह दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद वह स्कूटी से वापस शहर की ओर चला गया।

पुलिस अब आरोपी के बयान के साथ घटनास्थल, रेलवे स्टेशन और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है। हिरासत में लिए गए रेलकर्मी के मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है।

लखनऊ से जुड़ रही महिला की पहचान की कड़ी

महिला की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस जांच में यह जानकारी सामने आई है कि घटना से पहले महिला लखनऊ में देखी गई थी। पुलिस की एक टीम लखनऊ में भी महिला की पहचान और उसके परिवार के संबंध में जानकारी जुटा रही है। महिला के मोबाइल फोन से जिन लोगों से बातचीत हुई थी, उनसे भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या और दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए रेलकर्मी से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

किसी गुरु का किया हुआ प्रयास और आपके जीवन में परिवर्तन कमेंट से जरूर बताएं।
05/09/2026

किसी गुरु का किया हुआ प्रयास और आपके जीवन में परिवर्तन कमेंट से जरूर बताएं।

04/09/2026

🙏 जन्माष्टमी पर झंगहा थाना बना कृष्णमय! ❤️ अतिथियों का ऐसा आत्मीय स्वागत, जैसे अपने ही घर आए हों 🦚✨
#जन्माष्टमी #झंगहा_थाना #गोरखपुर #श्रीकृष्ण #कृष्णजन्माष्टमी #पुलिस_का_अपनापन #आस्था #गोरखपुर_न्यूज़

03/09/2026

खेत में मिला महिला का निर्वस्त्र शव! गले पर चोट के निशान… हत्या या दरिंदगी? गोरखपुर में सनसनी

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गोमती नगर
Lucknow
226010

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