Lucknow Lead

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26/03/2024

#रंगोत्सव #होलीकोत्सव

25/05/2020

ईद मुबारक

                  #जीतेगा_हिन्दुस्तान_हारेगा_कोरोना        Beri
04/05/2020


#जीतेगा_हिन्दुस्तान_हारेगा_कोरोना






Beri










During this time of pandemic when everyone is scared and locked in their house,here is a song to bring some ray of hope. To boost morale and bring some comfo...

12/06/2019

-E-Mulakaat Se-1 Ep-3
आइये जानते हैं गत 1 जून 2019 को हुयी मुलाक़ात के बारे में दीप्ति जी की क्या प्रतिक्रिया है...

Deepti
A single moon can remove all the darkness of night and shows the path to a clueless traveller, the shine of a moon leads to beautiful choices made by a traveller. Today, I feel like a clueless voyager guided by a charismatic shine of the moon. Voyager will fall, lost and fail but that one shine will help him to experience and learn in the world full of chaos.

दीप्ति जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने मुझे अपनी सुरीली आवाज़ में एक बेहद लोकप्रिय गाना भी सुनाया। दीप्ति जी गागर में सागर भरने की कूव्वत काफी कम लोगों में होती है। निजी तौर पर मेरा मानना है कि ईश्वर कुछ लोगों को ऐसी खूबियाँ खुद से देकर ही इस दुनिया में भेजता है। माता-पिता और गुरुजन इन ईश्वर प्रदत्त खूबियों को पहचान कर तराशने में अपनी भूमिका का निर्वहन बेहद खूबसूरती के साथ कर देश-दुनिया-समाज में हमको विशेष पहचान दिलाते हैं।
उतार-चढ़ाव इस धरती पर मौजूद हर व्यक्ति के जीवन में आता है। खुशियाँ हों या ग़म, अच्छा हो या ख़राब दौर हम सबके जीवन में आता है। और यही हमें परिपक्व (मेच्योर) बनाता है। हमारे व्यक्तित्व को मज़बूत बनाता है। हमारी सोच के दायरे को व्यापक बनाता है। हमारे अंदर के इंसान को संयमित करता है और जीवन के संघर्षों में सफल होने की शक्ति का संचार करता है।
जीवन में किसी भी स्तर पर दुविधा उत्पन्न हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है। हाँ, दुविधा की वजह से अपने कदम पीछे कर लेना गलत हो सकता है। फिर सवाल उठता है कि हम करें तो क्या करें!
मेरा अनुभव कहता है कि जीवन में जब भी ऐसी दुविधा वाली स्थिति हो या कहीं कुछ गलत/अनुचित हो जाने की शंका हो तो हमको उस स्थिति और अपनी रणनीति पर सबसे पहले अपने माता-पिता से पूरी गंभीरता के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए। ऐसा करने से हम कुछ भी गलत/अनुचित करने से खुद को बचा पाने के साथ ही सामने आई स्थिति से भी सफलतापूर्वक निपट पाएंगे।
अंत में इतना और कहना चाहूँगा कि सबसे पहले अपने अंदर छुपी प्रतिभाओं को तलाशें, इसके बाद वरिष्ठों के मार्गदर्शन में इनको तराशें और इस दुनिया को खुशी-खुशी अपना तरन्नुम गुनगुनाने के लिए तैयार कर दें...
हाँ, एक बात और हमेशा ध्यान रखिएगा कि जो शिक्षा, संस्कार और सलाहियत आपके बड़ों ने आपको दिया है उसे अपने छोटों के साथ बांटने में जीवन पर्यंत कभी कोई कंजूसी या कोताही नहीं करिएगा...
खूब सारी दुआएं और आशीष...

10/06/2019

-E-Mulakaat Se-1 Ep-1

गए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास... खुद को ऐसी अवस्था में पाने का सोचकर ही मन खजमजाहट (irritation) से भर जाता है। लेकिन, यह अवस्था काफी सुखदायी और ज्ञानवर्धक भी हो सकती है ऐसा मैंने गत 1 जून 2019 को पहली बार अनुभव किया। मैं अपने एक छोटे भाई सरीखे मित्र के कार्यालय अपने किसी काम से गया था। मित्र कार्यालय में थे नहीं और उनको पहुँचने में लगभग आधा घंटा लगने वाला था। इस दौरान उनकी सहकर्मी ने मुझे सम्मान के साथ बैठाया और इंतज़ार मुझे भारी न लगे, पानी-चाय आदि की व्यवस्था करवाई।
पहले से परिचित होने के कारण वो भी वहीं बैठकर मेरा हाल-चाल लेने लग गयीं। इसी दौरान वो बोलीं, सर पत्रकारिता के कुछ नए बच्चे आए हुये हैं और मैं चाहती हूँ कि आप एक बार उन सबसे मिलें।
हर पल कुछ नया सीखने की ललक, मित्र महोदय के आने का इंतज़ार और एक बेहद विनम्र आग्रह..., मना करने का सवाल ही खड़ा नहीं होता।
आग्रह सहर्ष स्वीकार किया और चल पड़े उस कमरे की ओर जहां बच्चे बैठे थे।
परिचय हुआ सबसे और फिर मैंने बच्चों से उनके बारे में जानने की कोशिश की। बच्चों ने पूरी ईमानदारी से बताया भी लेकिन कुछ हिचकिचाहट के साथ। ज़ाहिर सी बात है कि अधपके बाल वाले बेतरतीब अधेड़ से पहली बार मुलाक़ात होगी तो बच्चों का हिचकिचाना लाज़मी है।
खैर, इन सबके बावजूद बच्चों ने अपने परिचय से लेकर भविष्य की योजनाओं तक पर सार्थक बातचीत की। यही नहीं बच्चों ने अपने मन-मस्तिष्क में चल रही उथल-पुथल के समाधान की गरज से सवाल भी किये। मैंने भी पूरी ईमानदारी से उनके सवालों का यथोचित जवाब दिया। मैं कह सकता हूँ कि जून 2019 में इन बच्चों के साथ बिताए वो कुछ पल आज (4 जून 2019) तक इस माह के सबसे यादगार पल हैं।
मुझे लगता है कि आधी ज़िंदगी जी चुके मुझ जैसे व्यक्ति को कैसा लगा इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उन बच्चों जो आने वाले कल में देश का भविष्य हैं को यह मुलाक़ात कैसी लगी। उन बच्चों में से कुछ के कमेन्ट, द्वारा उचित माध्यम, मेरे पास आ चुके हैं जिनको एक-एक करके मैं आप सबसे शेयर करूंगा। इस उम्मीद के साथ कि इस पोस्ट को पढ़ने वाले आप सभी सम्मानित जन इस गोल्डेन जेनेरेशन का अपने व्यावसायिक, बौद्धिक और व्यवहारिक ज्ञान से भरपूर मार्गदर्शन करेंगे...

इस मुलाक़ात के अनुभवों को साझा करते हुये पूजा जी लिखती हैं...

Today I met Atul Sir for the first time, I used to hear a lot about him from Priya so I had some fixed opinion about him in my mind. When I saw him entering the room, an image immediately formed about him that he is very rude. But after I had a conversation with him regarding my content queries my perception changed. Now I will say, I liked him because he is a straight forward person and I love people with such nature. He observes a person while talking and then he do a personal analysis of that person. He does not bother's whether a person will use it or not. And post analysis he even gives feedback and suggestions on things or habit that can be improved. This what Atul Sir is like.

इतनी बेबाकी से अपनी बात कहने के लिए पूजा जी का मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। पूजा सच को सच और झूठ को झूठ कहने का जो साहस आप में है वो ही आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है। इसे ताउम्र यूं ही ज़िंदा और तरोताजा रखिएगा। हर रोज़ खुद को बीते कल से बेहतर बनाने का ईमानदार प्रयास करिए। एक बात हमेशा याद रखिएगा कि 'ज़िंदगी की दौड़' कभी भी 'बैसाखियों' के सहारे नहीं जीती जा सकती। इसलिए जीवन में चुनौतियाँ स्वीकार करिए, इन पर जीत हासिल करने का हुनर अपने अंदर पैदा कीजिये और देश ही नहीं दुनिया में अपनी पहचान बनाइये...
ढेर सारा आशीर्वाद...

12/03/2019

बचपन की यादों के झरोखे से दिखती हुई एक मिठास - कम्पट... आप इससे परिचित हैं! आप इसे किस नाम से जानते हैं! इससे जुड़ी आपकी क्या यादें हैं, क्या आप आज भी इसके जरिए अपना बचपन जीते हैं! उसे यहां शेयर करने में संकोच न करिए... इससे हम आपको अवश्य ही कुछ बहुत मीठा खुशियों से भरा जानने को अवश्य मिलेगा... https://amikachitranshi.com
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