10/06/2019
-E-Mulakaat Se-1 Ep-1
गए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास... खुद को ऐसी अवस्था में पाने का सोचकर ही मन खजमजाहट (irritation) से भर जाता है। लेकिन, यह अवस्था काफी सुखदायी और ज्ञानवर्धक भी हो सकती है ऐसा मैंने गत 1 जून 2019 को पहली बार अनुभव किया। मैं अपने एक छोटे भाई सरीखे मित्र के कार्यालय अपने किसी काम से गया था। मित्र कार्यालय में थे नहीं और उनको पहुँचने में लगभग आधा घंटा लगने वाला था। इस दौरान उनकी सहकर्मी ने मुझे सम्मान के साथ बैठाया और इंतज़ार मुझे भारी न लगे, पानी-चाय आदि की व्यवस्था करवाई।
पहले से परिचित होने के कारण वो भी वहीं बैठकर मेरा हाल-चाल लेने लग गयीं। इसी दौरान वो बोलीं, सर पत्रकारिता के कुछ नए बच्चे आए हुये हैं और मैं चाहती हूँ कि आप एक बार उन सबसे मिलें।
हर पल कुछ नया सीखने की ललक, मित्र महोदय के आने का इंतज़ार और एक बेहद विनम्र आग्रह..., मना करने का सवाल ही खड़ा नहीं होता।
आग्रह सहर्ष स्वीकार किया और चल पड़े उस कमरे की ओर जहां बच्चे बैठे थे।
परिचय हुआ सबसे और फिर मैंने बच्चों से उनके बारे में जानने की कोशिश की। बच्चों ने पूरी ईमानदारी से बताया भी लेकिन कुछ हिचकिचाहट के साथ। ज़ाहिर सी बात है कि अधपके बाल वाले बेतरतीब अधेड़ से पहली बार मुलाक़ात होगी तो बच्चों का हिचकिचाना लाज़मी है।
खैर, इन सबके बावजूद बच्चों ने अपने परिचय से लेकर भविष्य की योजनाओं तक पर सार्थक बातचीत की। यही नहीं बच्चों ने अपने मन-मस्तिष्क में चल रही उथल-पुथल के समाधान की गरज से सवाल भी किये। मैंने भी पूरी ईमानदारी से उनके सवालों का यथोचित जवाब दिया। मैं कह सकता हूँ कि जून 2019 में इन बच्चों के साथ बिताए वो कुछ पल आज (4 जून 2019) तक इस माह के सबसे यादगार पल हैं।
मुझे लगता है कि आधी ज़िंदगी जी चुके मुझ जैसे व्यक्ति को कैसा लगा इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उन बच्चों जो आने वाले कल में देश का भविष्य हैं को यह मुलाक़ात कैसी लगी। उन बच्चों में से कुछ के कमेन्ट, द्वारा उचित माध्यम, मेरे पास आ चुके हैं जिनको एक-एक करके मैं आप सबसे शेयर करूंगा। इस उम्मीद के साथ कि इस पोस्ट को पढ़ने वाले आप सभी सम्मानित जन इस गोल्डेन जेनेरेशन का अपने व्यावसायिक, बौद्धिक और व्यवहारिक ज्ञान से भरपूर मार्गदर्शन करेंगे...
इस मुलाक़ात के अनुभवों को साझा करते हुये पूजा जी लिखती हैं...
Today I met Atul Sir for the first time, I used to hear a lot about him from Priya so I had some fixed opinion about him in my mind. When I saw him entering the room, an image immediately formed about him that he is very rude. But after I had a conversation with him regarding my content queries my perception changed. Now I will say, I liked him because he is a straight forward person and I love people with such nature. He observes a person while talking and then he do a personal analysis of that person. He does not bother's whether a person will use it or not. And post analysis he even gives feedback and suggestions on things or habit that can be improved. This what Atul Sir is like.
इतनी बेबाकी से अपनी बात कहने के लिए पूजा जी का मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। पूजा सच को सच और झूठ को झूठ कहने का जो साहस आप में है वो ही आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है। इसे ताउम्र यूं ही ज़िंदा और तरोताजा रखिएगा। हर रोज़ खुद को बीते कल से बेहतर बनाने का ईमानदार प्रयास करिए। एक बात हमेशा याद रखिएगा कि 'ज़िंदगी की दौड़' कभी भी 'बैसाखियों' के सहारे नहीं जीती जा सकती। इसलिए जीवन में चुनौतियाँ स्वीकार करिए, इन पर जीत हासिल करने का हुनर अपने अंदर पैदा कीजिये और देश ही नहीं दुनिया में अपनी पहचान बनाइये...
ढेर सारा आशीर्वाद...