29/01/2023
Gautam Adani: अडानी के चक्कर में डूब जाएंगे सरकारी बैंक और LIC? सेबी करेगा हरेक डील की जांच
अडानी ग्रुप के शेयरों में हाहाकार मचा हुआ है। ग्रुप के बारे में हाल में आई एक निगेटिव रिपोर्ट के बाद बैंकों और एलआईसी के शेयरों में भी शुक्रवार को भारी गिरावट आई। बैंकों का अडानी ग्रुप की कंपनियों पर करीब 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज है जबकि एलआईसी ने उनमें 70,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट
बैंकिंग और इश्योरेंस कंपनियों के शेयर भी हुई धराशायी
भारतीय बैंकों का अडानी ग्रुप पर 80,000 करोड़ का कर्ज
एलआईसी का अडानी की कंपनियों में 70,000 करोड़ निवेश
नई दिल्ली: अडानी ग्रुप (Adani Group) के शेयरों में शुक्रवार को लगातार दूसरे सत्र में भारी गिरावट आई। इसका असर बैंक एवं फाइनेंशियल शेयरों पर भी देखने को मिला। भारतीय बैंकों ने अडानी ग्रुप की कंपनियों को करीब 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है। दूसरी ओर एलआईसी (LIC) का अडानी ग्रुप की कंपनियों में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश है। इस कर्ज और निवेश के डूबने की आशंका से बैंकों और एलआईसी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के शेयरों में सात फीसदी से अधिक गिरावट आई जबकि एसबीआई (SBI) का शेयर 4.69 फीसदी गिर गया। देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी का शेयर एक समय 4.3 फीसदी तक गिर गया था लेकिन बाद में यह 3.25 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।
WealthMills Securities Pvt. के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट क्रांति बाथिनी ने कहा कि मार्केट में निगेटिव सेंटिमेंट हावी है जिसका असर बैंक स्टॉक्स में दिख रहा है। इसकी एक वजह अडानी ग्रुप के बारे में आई रिपोर्ट है। अडानी ग्रुप की टॉप पांच कंपनियों पर पिछले चार साल में कर्ज दोगुना हो गया है। ब्रोकरेज फर्म CLSA की एक रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप के कुल कर्ज में भारतीय बैंकों की हिस्सेदारी 40 फीसदी से भी कम है। इसके मुताबिक अडानी ग्रुप के कुल कर्ज में बैंकों का 38 फीसदी, बॉन्ड्स और कमर्शियल पेपर्स का 37 फीसदी और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन का 11 परसेंट है। वित्त वर्ष 2022 में अडानी ग्रुप पर दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जिसमें करीब 80,000 करोड़ रुपये बैंकों का था।
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एसबीआई का कितना कर्ज
कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि सरकारी बैंकों ने अडानी ग्रुप के निजी बैंकों की तुलना में दोगुना कर्ज दिया है। इसमें से 40 फीसदी कर्ज एसबीआई ने दिया है। इससे उन लोगों का पैसा डूबने के कगार पर पहुंच गया है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई एलआईसी और एसबीआई में निवेश की है। रमेश ने कहा कि अगर अडानी ग्रुप पर लगे आरोप सही हैं तो एसबीआई जैसे सरकारी बैंकों को भारी नुकसान हो सकता है। आदर्श पारसरामपुरिया की अगुवाई में एनालिस्ट्स में हाल में एक नोट में कहा कि अडानी ग्रुप में प्राइवेट बैंकों के मुकाबले सरकारी बैंकों का ज्यादा कर्ज है। एसबीआई का कहना है कि अडानी ग्रुप की कंपनियों में उसका कर्ज लिमिट से कम है। हालांकि बैंक ने इस राशि का खुलासा नहीं किया है।
एलआईसी ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाया है। 30 सितंबर, 2022 तक के आंकड़ों के मुताबिक एलआईसी का कुल इक्विटी पोर्टफोलियो 10.27 लाख करोड़ रुपये का था। इसमें से अडानी ग्रुप की कंपनियों में एलआईसी का निवेश करीब सात फीसदी है। हाल के महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में अपना निवेश कम किया है। पिछले साल सरकार एलआईसी का आईपीओ लाई थी। लेकिन इसका शेयर कभी भी अपने इश्यू प्राइस तक नहीं पहुंच पाया है।
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एलआईसी का निवेश
एलआईसी ने हाल में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी टोटल गैस और अडानी ट्रांसमिशन में अपना निवेश बढ़ाया है। अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी का निवेश 30 सितंबर, 2022 को 4.02 फीसदी था जिसका मूल्य 17,966 करोड़ रुपये था। इसी तरह अडानी टोटल गैस में एलआईसी की 5.77 फीसदी, अडानी ट्रांसमिशन में 3.46 फीसदी और अडानी ग्रीन एनर्जी में 1.15 फीसदी हिस्सेदारी है। इसी तरह अडानी पोर्ट्स में एलआईसी की हिस्सेदारी 11.9 फीसदी है। आज इसमें से कई कंपनियों के शेयरों में 20 फीसदी तक गिरावट आई। इससे एलआईसी को 16,300 करोड़ का नुकसान हुआ है। अडानी ग्रुप की सात कंपनियों में एलआईसी का निवेश है।
इस बीच मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) भी इस मामले में सतर्क हो गया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक सेबी पिछले साल अडानी ग्रुप द्वारा किए गए हरेक सौदे की बारीकी से जांच करेगा। अडानी ग्रुप ने हाल में कई बड़े सौदे किए हैं। इनमें अंबूजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड का अधिग्रहण शामिल है। साथ ही अमेरिका की शॉर्ट सेलर कपनी Hindenburg Research की रिपोर्ट की भी स्टडी की जाएगी। इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि अडानी ग्रुप ने इस आरोपों का खंडन करते हुए अमेरिका कंपनी के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है।
Adani Group Debt : 5 कंपनियों के IPO, एक भारी-भरकम FPO, क्या कर्ज के बोझ से काफी परेशान हैं गौतम अडानी?
Adani Group Debt : अडानी ग्रुप के कर्ज को लेकर चर्चा एक बार फिर गर्मा रही है। हालांकि, ग्रुप का कहना है कि कर्ज को लेकर कोई चिंता की बात नहीं हैं। 27 जनवरी को अडानी एंटरप्राइजेज का 20 हजार करोड़ रुपये का एफपीओ आ रहा है। वहीं, 3 से 5 साल में ग्रुप 5 आईपीओ लॉन्च कर सकता है।
Adani Group Debt : एक भारी-भरकम FPO, 5 कंपनियों के IPO... क्या कर्ज के बोझ से परेशान हैं गौतम अडानी?
हाइलाइट्स
3 से 5 साल में आ सकते हैं अडानी ग्रुप के 5 आईपीओ
एफपीओ के जरिए 20 हजार करोड़ जुटाएगी अडानी एंटरप्राइजेज
तेजी से अपना कारोबारी विस्तार कर रहा है अडानी ग्रुप
नई दिल्ली : बड़े बुजुर्गों की यह सीख आपने जरूर सुनी होगी कि बेटा उधार मत लेना चाहे रोटी सूखी खानी पड़े। लेकिन कारोबारी दुनिया में इसका उल्टा ही होता है। बड़े कारोबारी घराने कर्ज की नींव पर अपना व्यापार खड़ा करते हैं। कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो, कारोबारी विस्तार के लिए उसे कर्ज लेना ही पड़ता है। लेकिन अगर एसेट्स और लायबिलिटी में बैलेंस नहीं रहा तो नैया डूबने में भी समय नहीं लगता। कर्ज हो लेकिन एक लिमिट तक। कोरोबारी दुनिया में कर्ज की बात अडानी ग्रुप (Adani Group) का नाम लिये बिना संभव नहीं है। अडानी का कर्ज (Adani Group Debt) चर्चा में इसलिए है, क्योंकि पैसा जुटाने के लिए यह ग्रुप आने वाले समय में 5 आईपीओ लॉन्च करने वाला है। अडानी ग्रुप पर बार-बार यह आरोप लगते रहे हैं कि वह अपने कारोबारी विस्तार के लिए बेतहाशा कर्ज ले रहा है। भले ही गौतम अडानी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हों, लेकिन आंकड़े झूठ नहीं बोलते। 31 मार्च 2022 को पूरे हुए वित्त वर्ष में अडानी ग्रुप का कुल कर्ज 40 फीसदी बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। फिच ग्रुप के क्रेडिट साइट्स ने यह आंकड़ा जारी किया था। क्रेडिट साइट्स ने अडानी ग्रुप को ओवर लीवरेज्ड बताकर कर्ज पर चिंता जताई थी।
आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं अडानी
गौतम अडानी (Gautam Adani) और अडानी ग्रुप के अधिकारी कहते हैं कि किसी ने भी उनके सामने कर्ज को लेकर चिंता नहीं जताई है। गौतम अडानी ने खुद कहा है कि कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने में 30-40 फीसदी अपना पैसा और 60-70 फीसदी कर्ज लगता है। वे कहते हैं कि कर्ज के लिए अडानी ग्रुप की साख भारत सरकार के बराबर है। यानी सॉवरेन रेटिंग है। अब सवाल यह है कि जब कर्ज को लेकर चिंता नहीं है, तो शेयर क्यों गिरवी रखे जा रहे हैं। भारी भरकम एफपीओ और उसके बाद 5 कंपनियों के आईपीओ लाने की क्या जरूरत है? क्या गौतम अडानी बाजार से पैसा जुटाकर कर्ज का बोझ कम करना चाहते हैं?
सीमेंट कंपनियों के शेयर रखे थे गिरवी
सितंबर 2022 में अडानी ग्रुप द्वारा शेयर गिरवी रखे जाने की खबर सामने आई थी। अडानी ग्रुप ने अपनी दो सीमेंट कंपनियों के बड़ी संख्या में शेयर गिरवी रखे थे। ग्रुप ने एसीसी और अंबुजा सीमेंट के 10.36 खरब रुपये कीमत के शेयर गिरवी रखे थे। किसी भी कंपनी की बैलेंसशीट में शेयर प्लेज होने की जानकारी काफी नेगेटिव मानी जाती है। फिर भी अडानी ग्रुप ने शेयर गिरवी रखकर पैसा जुटाया। इससे पहले ब्लूमबर्ग के डेटा से रिपोर्ट सामने आई थी कि एशिया में दूसरा सबसे खराब डेट टू इक्विटी रेश्यो अडानी ग्रीन का रहा। डेट टू इक्विटी रेश्यो किसी भी कंपनी के फंडामेंटल्स को जांचने का एक अहम टूल होता है। इसमें कंपनी की कुल देनदारियों की शेयरधारकों की इक्विटी से तुलना की जाती है।
3-5 साल में आएंगे 5 आईपीओ
अब अडानी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जुगशिंदर सिंह ने कहा है कि अडानी ग्रुप अपनी और अधिक कंपनियों को अलग करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से पांच साल में कम से कम 5 यूनिट्स मार्केट में जाने को तैयार होंगी। अडानी ग्रुप इंडस्ट्रीज, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, अडानी रोड ट्रांसपोर्ट, अडानी कॉनेक्स के साथ ही ग्रुप की मेटल और माइनिंग यूनिट अलग कंपनियां बनेंगी। इसका सीधा सा मतलब है कि 2026 और 2028 के बीच अडानी ग्रुप की कम से कम 5 कंपनियों के आईपीओ मार्केट में आएंगे।
अडानी एंटरप्राइजेज का एफपीओ
कुछ ही दिन में अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज बाजार से बड़ी रकम जुटाने जा रही है। 27 जनवरी को अडानी एंटरप्राइजेज का एफपीओ मार्केट में आ रहा है। कंपनियां आईपीओ के बाद एफपीओ के जरिए अतिरिक्त शेयर जारी कर बाजार से पैसा जुटाती है। इस एफपीओ से अडानी ग्रुप 20 हजार करोड़ रुपये जुटाएगा। यह एफपीओ इतना बड़ा है कि अगर पूरा भरा तो भारत का दूसरा सबसे बड़ा एफपीओ होगा।
तेजी से कर रहे कारोबारी विस्तार
गौतम अडानी बंदरगाहों और कोयला खनन पर केंद्रित अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। वे एयरपोर्ट्स, डेटा सेंटर्स और सीमेंट के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर भी ध्यान दे रहे हैं। इस कारोबारी विस्तार के लिए पैसों की जरूरत है, जिसके लिए कर्ज लिया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अडानी ग्रुप की आक्रामक विस्तार योजनाओं से कहीं ग्रुप की कंपनियां कर्ज चले दब ना जाएं।