13/01/2026
UP के हरदोई जनपद के थाना पाली में जो हुआ,वह उत्तर प्रदेश पुलिस के माथे पर कलंक
जो निलंबन के साबुन से आसानी से नहीं धुलने वाला।जिसे जनता ‘कानून का मंदिर’ मानती है,वहां एक सनकी पति ‘यमराज’ बनकर आया और पुलिस वाले मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।यह घटना चीख-चीख कर पूछ रही है—क्या थाने अब सुरक्षा के लिए हैं या अपराधियों की सहूलियत के लिए
कहानी 15 साल पुरानी गृहस्थी और ‘नए इश्क’ के द्वंद्व की है।रमापुर अटरिया गांव की रहने वाली 32 वर्षीय सोनी,जिसे अपना 13 साल का बेटा और पति अनूप का साथ कम और प्रेमी सुरजीत का साथ ज्यादा रास आया,अपनी जिद पर अड़ी थी।
7 जनवरी को प्रेमी संग फरार हुई सोनी को पुलिस ने ढूंढ तो लिया,लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।उधर, पति अनूप के सिर पर 'आहत अभिमान' का ऐसा भूत सवार था कि उसने ठान लिया—"तू मेरी नहीं, तो किसी की नहीं।" विडंबना देखिए, पत्नी प्रेमी के ख्यालों में थी,पति की जेब में लोडेड कट्टा था और बीच में बैठी पुलिस 'कुंभकर्णी नींद' में थी।
हैरानी की अनूप हथियार लेकर पाली थाने के अंदर तक कैसे पहुंचा? क्या थाने के गेट पर चेकिंग की व्यवस्था है या वहां सिर्फ ‘स्वागतम’ का बोर्ड टंगा है? एक अपराधी विवेचक और सिपाहियों की आंखों में धूल झोंककर,थाने के भीतर ही अपनी पत्नी के सीने में गोली उतार देता है।यह पुलिस की घोर लापरवाही नहीं तो और क्या है? सिपाही संजना और विवेचक विक्रांत का निलंबन तो बस एक सरकारी रस्म अदायगी है,जो हर बड़ी चूक के बाद निभाई जाती है।
इस खूनी खेल में सबसे बड़ी हार उस 13 साल के मासूम बेटे की हुई है,जो घर पर मां के लौटने की आस लगाए बैठा था।उसकी मां ‘इश्क’ की भेंट चढ़ गई और पिता ‘अहंकार’ में जेल चला गया।पाली थाना परिसर की जमीन पर गिरा खून तो सूख जाएगा,लेकिन सिस्टम पर लगे ये सवाल हमेशा गीले रहेंगे कि आखिर जब रक्षक ही सो रहे हों,तो सुरक्षा की उम्मीद किससे करें...?
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