Jadeed Markaz

Jadeed Markaz Lucknow, Mumbai, Delhi se ek saath publish hone wala devnagri lipi me urdu ka pahla Weekly Newspaper Member of Madarsa modernization Committee Govt .for India.

Bio-data of Hisamul Islam Siddiqui (Chief Editor)

Name : HISAMUL ISLAM SIDDIQUI
Pseudonym : Hisam Siddiqui
Father’s Name : Late Shahid Ali
Date of Birth : 4th Jan 1953
Qualification : B.Com , LLB (From Lucknow University)
Profession : Journalism
Address : Jadeed Markaz building Khurram Nagar Lucknow -226022 (INDIA)
Phones : 0522-233552 9 (Residence)
0522-2324111, 2322553, Fax 2336234 (Office

)
Email : [email protected]
Mobile : 09839014532/ 9811443060
Experiences : Working as chief Editor
Jadeed markaz (Weekly) Hindi & Urdu being published fromLucknow, Mumbai, Delhi since 1991. Worked as a special correspondent of daily Azaem (Urdu), Lucknow 1978-1991 as journalist. Interviewed :Late Mrs Indira Gandhi ,Rajiv Gandhi ,Chandra Shekhar, Atal Bihari Vajpai ,
Mulayam Singh yadav .Narain Dutt Tiwari and so many other political & literary personalities.

* Urdu News Reader in ALL India Radio Lukhnow for more than five years

* Worked for Door Darshan Lucknow as a host of various socials & development programmers
for more than fours years

* Organized various social seminars and other programmes in Lucknow & Delhi

* Associated with documents and feature films production for more than ten years. Member of Film Censor Board Mumbai Committee for three years. Presented paper in an international conference in Malaysia on “Religious tolerance & pluralism in Democratic system” in 2002 . Member of National Monitoring Committee Educations in India constituted by HRD Ministry Govt .for India . Member of inquiry Committee of Sarva Shiksha Abhiyan in India. Countries visited As a journalist
United state of America, United kingdom (Britain), Germany, France, China, Japan, Malaysia, Hong kong, Switzerland, Poland, Bulgaria ,Nepal, Pakistan, Unnited Arab Emirates & Kingdom of Saudi Arabia .

नफरत के बारूद पर बैठा यूपी ”बीजेपी के लोक सभा मेम्बर ने एडमिनिस्टेªशन की इजाजत के बगैर डाक्टर अम्बेडकर की शोभा यात्रा नि...
25/05/2017

नफरत के बारूद पर बैठा यूपी


”बीजेपी के लोक सभा मेम्बर ने एडमिनिस्टेªशन की इजाजत के बगैर डाक्टर अम्बेडकर की शोभा यात्रा निकलवाई पुलिस ने रोका तो भीड़ के बीच खड़े होकर सीनियर पुलिस कप्तान को निकम्मा कह कर एक भीड़ से उनके घर पर हमला करा दिया। जवाब में दलितों ने नौ मई को रामनगर बादशाहपुर पुलिस चैकी को जला कर राख कर दिया। दलितों के हाथों ठाकुर नौजवान का कत्ल हुआ तो ठाकुरों ने दलितों के 25 घर जला दिए।“

”सिर्फ दो हफ्तों के अंदर सहारनपुर में दंगे फसाद के तीन भयानक वाक्यात पेश आए, तीनों में ही सरकारी इजाजत के बगैर जुलूस निकालने और जलसे करने की बुनियादी वजहें रहीं। एक मामले में तो बीजेपी के लोक सभा मेम्बर राघव लखनपाल शर्मा और उनकी पार्टी के मेम्बरान असम्बली सीधे-सीधे मुलव्विस थे। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पांच और नौ मई को ठाकुरों और दलितों के जुलूसों और धरनों ने हंगामा करा दिया।“

”वजीर-ए-आला योगी की वार्निग के बावजूद मुरादाबाद में खुद को बजरंग दल कहने वालों ने आरटीओ दफ्तर पर हमला बोलकर कहा कि अब हिन्दुओं की सरकार है इसलिए तमाम ठेके हम लेंगे या हमारी सिफारिश पर ही दिए जाएंगे। मेरठ और गाजियाबाद में स्वामी नरसिम्हानन्द सरस्वती, चेतना शर्मा परमिन्दर आर्या और अनिल यादव नौ से पन्द्रह साल के बच्चों के जेहन में जहर भर कर असलहा चलाने की टेªनिंग दे रहे हैं कोई पूछने वाला नहीं है।“

हिसाम सिद्दीकी
लखनऊ! उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी का बार-बार बयान कि प्रदेश में कानून अपने हाथों में लेने वालों और गले में भगवा अगौंछा डालकर कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, प्रदेश खुसूसन पच्छिमी उत्तर प्रदेश में रोज ब रोज पैदा हो रहे हिन्दुत्व के नए ठेकेदारों और खुद को भगवा ब्रिगेड कहने वालों की हरकतों की वजह से हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उत्तर प्रदेश नफरत के बम या बारूद के ढेर पर बैठा दिखने लगा है। सहारनपुर में पुलिस और एडमिनिस्टेªशन की तमाम कोशिशों के बावजूद महज दो हफ्ते के अंदर खतरनाक तबकाती (वर्ग आधारित) टकराव के तीन बड़े वाक्यात ने जिले के बच्चे-बच्चे को खौफजदा कर दिया है। दलित तबका जो अक्सर डरा-सहमा ही रहता था वह भी अब सख्त मुकाबले पर मैदान में आ चुका है। मुरादाबाद मे तो नौ मई को इंतेहा ही हो गई। आरटीओ आफिस में गाड़ियों में फस्र्टएड मेडिकल किट लगाने का ठेका देने की कार्रवाई हो रही थी। अचानक गले मंे और सरों पर भगवा अगौंछा डाले सौ से ज्यादा लोगों की एक भीड़ वहां पहुंचती है। उनकी लीडरी करने वाले बजरंग दल के ओहदेदार थे उनका कहना था कि बीजेपी सरकार बनवाने मंे हमारा भी बड़ा तआवुन (सहयोग) रहा है तोे अब ठेके पट्टों में भी हमें पूरा हिस्सा चाहिए। मुरादाबाद आरटीओ ने गाड़ियों में फस्र्ट एड मेडिकल किट लगाने का ठेका बीजेपी मेम्बर असम्बली के एक रिश्तेदार को दे दिया था। बजरंग दल और बीजेपी लीडरान के हाथों में पिस्तौलें और बंदूकें थीं तो बाकी भीड़ लाठी डण्डों और दूसरे असलहों से लैस थी। इन लोगोे ने जमकर हंगामा किया खुलेआम फायरिंग की और पुलिस तक पर पथराव व हमला तक किया। वीडियो में कैद तीन लोगों की फायरिंग करते हुए शिनाख्त हुर्ह। सीनियर पुलिस कप्तान मनोज तिवारी के मुताबिक पहचाने गए तीनों में गौरव भटनागर, अंकुर शर्मा और विशाल है। इनके अलावा फायरिंग करने वाले दो लोगों को मौके पर ही पकड़ा गया है। सहारनपुर मे तो जैसे ताकत आजमाई का मुकाबला हो रहा है। बीस अप्रैल को बीजेपी के लोक सभा मेम्बर राघव लखनपाल शर्मा ने बगैर इजाजत डाक्टर अम्बेडकर का जुलूस और शोभा यात्रा सड़क दूधली गंाव में निकलवाने की जिद करके दंगा कराया भीड़ के दरम्यान खड़े होकर उस वक्त जिले में तैनात सीनियर पुलिस कप्तान लव कुमार को बुरा भला और नालायक तक कह डाला फिर एक भीड़ के साथ जाकर सीनियर पुलिस कप्तान के सरकारी बंगले पर हमला करा दिया था तो नौ मई को धरना और मुजाहिरा कर रहे दलितों और पिछड़ों की एक भीड़ को पुलिस ने सड़कों से हटाने की कोशिश की तो भीड़ ने जमकर पथराव किया, कई गाड़ियों को जलाया फिर शहर कोतवाली की रामनगर बादशाहपुर पुलिस चैकी पर हमला करके तोड़फोड़ की फिर आग लगाकर चैकी को राख के ढेर में तब्दील कर दिया। इससे पहले पांच मई को शब्बीरपुर और उसके नजदीकी गांव शिमलाना समेत आठ-दस गांवों में महाराणा प्रताप जयन्ती का जुलूस भी बगैर इजाजत निकाले गए तो ठाकुरों और दलितों में टकराव हो गया इस टकराव में 26 साल के एक ठाकुर नौजवान सुमित राजपूत की जान चली गई और दो गांवों के दर्जन से ज्यादा दलितों के मकान जलाकर राख कर दिए गए।
सहारनपुर के लोक सभा मेम्बर राघव लखनपाल ने सीनियर पुलिस कप्तान के घर पर हमला कराया, सड़क दूधली गांव में मुसलमानों और दलितों में टकराव कराने की कोशिश की, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आरएसएस परिवार के हौसले और बुलंद हो गए। ठाकुरों ने राघव लखनपाल की तरह बगैर इजाजत पांच मई को महाराणा प्रताप का जुलूस निकालने और उनकी मूर्ति लगाने की कोशिश की यह कोशिश बड़े पैमाने पर दलितों और ठाकुरों के दरमियान टकराव की वजह बन गई। कई गांवों मंे दबंग ठाकुरों ने दलितों पर हमले करके उनके घरों को जला दिया। कम से कम तीस दलित परिवार ऐसे हैं जिनके यहां एक वक्त की रोटी और एक जोडी कपडा तक नहीं बचा। मेहनत मजदूरी करके जो रूपए बचाकर रखे थे वह भी जल गए। नौ मई को दलितों ने भी ‘भीम आर्मी’ की कयादत में सहारनपुर में धरना दिया सवर्ण ब्राहमणों और ठाकुरों की तरह उन्होने भी एडमिनिस्टेªशन से कोई इजाजत नहीं ली।
पुलिस ने शहर के गांधी पार्क में ‘भीम आर्मी’ की कयादत में हो रही दलितों की पंचायत रोकनी चाही तो दलितों का गुस्सा भडक गया। तकरीबन पूरा शहर और शहर के इर्द-गिर्द गांव तक दलितों ने आसमान सर पर उठा लिया। एक बस समेत बडी तादाद में गाड़ियां जला दी, सरकारी दफ्तरों को आग लगा दी। हालात इतने बेकाबू हो गए कि उन लोगोे ने रामनगर बादशाहपुर पुलिस चैकी पर हमला करके पहले तोडफोड की फिर चैकी को जलाकर राख के ढेर मंे तब्दील कर दिया। चैकी में खडी कई दर्जन मोटर साइकिलों और गाड़ियांे को जला दिया। कई पुलिस वालों की पिटाई की शहर पुलिस कप्तान, सर्किल अफसर और एसडीएम को भाग कर अपनी जान बचाते देखा गया। एक दूसरी पुलिस चैकी मल्ही पुर को भी जला दिया गया। मीडिया नुमाइंदों की पिटाई हुई जो भी दलितों के सामने आया पिटे बगैर नहीं बचा।
नौ मई को ही वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी मेरठ दौरे पर गए थे। दलितों से हमदर्दी जाहिर करने की गरज से उन्होने शेरगढी मलिन बस्ती का दौरा किया। योगी के कालोनी से निकलते ही दलितों का एक बड़ा हुजूम वहां इकट्ठा हो गया। उन्होने इल्जाम लगाया कि आदित्यनाथ योगी मलिन बस्ती मे आए लेकिन बस्ती में लगी अम्बेडकर की मूर्ति को माला न पहनाकर उन्होने जानबूझकर अम्बेडकर की तौहीन की है। देखते ही देखते यह भीड़ हंगामे पर उतर आई पूरे इलाके मंे लगी योगी आदित्यनाथ की होर्डिंग को तोड़ कर जला दिया शराब का एक ठेका, पेट्रोल पम्प और कुछ दुकानों में तोडफोड की, गैस सिलेडरों से लदी एक गाड़ी और पेट्रोल पम्प को आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हेें रोकने की कोशिश की तो उन लोगोे ने कहा कि डाक्टर अम्बेडकर की तौहीन करने के लिए योगी पहले पूरे दलित समाज से माफी मंागे उसी के बाद हम अपना आंदोलन खत्म करेंगे।
मुरादाबाद का मामला तो योगी सरकार की पूरी पोल पट्टी ही खोलता है। जहां आरटीओ आफिस से एक ठेका हासिल करने के लिए बीजेपी और बजरंग दल के लोग ही आपस में भिड़ गए। इन लोगों ने जो असलहा मुसलमानों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए रखा था उसका इस्तेमाल एक दूसरे पर ही कर डाला। एक दूसरे पर दबाव बनाने के लिए लाठी डंडो और तलवारों और बंदूक व रायफलों का इस्तेमाल किया। मारपीट और फायरिंग की वीडियो हर तरफ वायरल हो रहे है। इन्हीं वीडियोज में देखकर पुलिस ने बजरंग दल के तीन लोगों को गिरफ्तार किया। खबर लिखे जाने तक बाकी की तलाश जारी थी।
हैरत यह है कि पूरा पच्छिमी उत्तरप्रदेश हंगामों का शिकार था सहारनपुर से मेरठ और मुरादाबाद तक आगजनी और फायरिंग जैेसे वाक्यात होे रहे थे। लेकिन लखनऊ में चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी मुल्क की नई नस्ल को मुल्क की तारीख (इतिहास) बताते हुए तकरीर कर रहे थे कि बाबर हो, अकबर हों या औरंगजेब यह सभी हमलावर थे जो हिन्दुस्तान को लूटने के लिए आए थे। उन्होने कहा कि महाराणा प्रताप किसी एक इलाके के नहींे पूरे हिन्दुस्तान के राजा थे। हमारे मुल्क के हीरोे महाराणा प्रताप और शिवाजी ही हो सकते हैं मुगल हमलावर थे, हमलावर ही माने जाएंगे।
इन तमाम वाक्यात के पीछे अस्ल रोल उन लोगों का है जो हिन्दुत्व के नए ठेकेदार बनकर दहशतगर्दी की नर्सरी चलाने का काम करते है। इन लोगों ने मेरठ को अपना सेण्टर बना रखा है। एमटेक करके अब हिन्दू बच्चों को तरह-तरह के असलहों की टेªनिंग देने वाले परमिन्दर आर्या कहते हैं कि वह तो अपने बच्चों को हथियारों की टेªनिंग इसलिए दे रहे हैं कि आईएसआईएस ने 2020 मे हिन्दुस्तान पर अमला करने का टारगेट तय किया है उनका मुकाबला करने की टेªनिंग हम अपने बच्चों को दे रहे हैं। आर्या के साथ ही चेतना शर्मा भी छोटे-छोटे बच्चों और बच्चियों के जेहनों में जहर घोलने का काम कर रही हैं महज ग्यारह बरस की बच्ची शुभि सेक्विण्ट की रिपोर्टर कोे बयान दिलाती हैं कि मुसलमान लड़के हिन्दू लड़कियांे को बहकाकर अपने जाल में फंसाते हैं उनसे शादी का ड्रामा करते हैं फिर उन्हें मार डालते हैं ऐेेसे मुसलमानों का मुकाबला करने के लिए हम असलहा चलाने की टेªनिंग ले रहे हैं। चेतना शर्मा अखण्ड हिन्दुस्तान मोर्चा की खुदसाख्ता जोनल कमिशनर है। पेशे से वकील हैं चेतना एक नौ साल के छोटे बच्चे को यह सिखा कर कैमरे के सामने लाती हैं कि हम तो अपनी बहनों को मुसलमानों से बचाने के लिए असलहा चलाने की टेªनिंग ले रहे है। आर्या और चेतना शर्मा स्कूल जाने वाले नौ साल से तेरह साल की उम्र के बच्चे-बच्चियों को ही हर दिन शाम कोे दो घंटे की टेªनिंग करने के लिए लाए जाते हैं। चेतना शर्मा कहती हैं कि मुजफ्फरनगर दंगों में एके-47 रायफलों तक का इस्तेमाल हिन्दुओं पर हुआ था। वह कहती हैं कि उनके एक फोन मंे हवाट्स एप के सौ ग्रुप हैं एक और हमारे गुरू जी स्वामी नरसिम्हानन्द सरस्वती वैसे तो मंदिर के हेड पुजारी हैं लेकिन वह एक साथ दो ढाई लाख लोगों को मैसेज भेज सकते है। स्वामी नरसिम्हानन्द सरस्वती बताते हैं कि वह एमटेक है। इसलिए हम टेक्नोलाजी का इस्तेमाल करते है। धर्म की लड़ाई में हमें इण्टरनेट को भी एक असलहे की तरह इस्तेमाल करना होता है। इन लोगों के एक और साथी हैं अनिल यादव खुद को हिन्दू स्वाभिमान संघ का सदर बताते हैं। बमोटा गांव में अनिल यादव अखाड़े में बच्चों केा कुश्ती लड़ने और असलहा चलाने की टेªनिंग देते हैं। अपना रिवाल्वर दिखाते हुए कहते हैं कि हम बच्चों केा अगर बचपन से ही असलहों की टेªनिग नहीं देंगे तो वह आगे चलकर लड़ेंगे कैसे? लाइसेंसी हथियार हैं उनके पास इस सवाल पर अनिल यादव कहते हैं कि जब खाना जंगी (गृहयुद्ध) होगी तो लाइसेेस कौन पूछेगा? चेतना शर्मा के एमटेक गुरू स्वामी नरसिम्हानन्द सरस्वती इस्लाम पर इंतेहाई खतरनाक कमेण्ट करते हैं और बच्चों को बताते हैं कि इस्लाम का मतलब है अज्ञानता (जेहालत) और इस्लाम का मतलब है अंधकार (अंधेरा) जहां सिर्फ दहशतगर्दी सिखाई जाती है। मैं चाहता हूं जितने भी लोग हिन्दू धर्म छोड़कर मुसलमान बन गए थे वह वापस आ जाएंर्। अनिल यादव ग्यारह साल के गगन और अनुज को पहले खूब सिखा कर लाया कि कैमरे के सामने कहना है कि हम दहशतगर्दी से मुकाबले के लिए असलहा चलाने की टेªनिंग ले रहे हैं। लेकिन कैमरे के सामने गगन ने कहा कि जिंदगी में आगे बढने के लिए ही हम असलहा चलाने की टेªनिंग ले रहे हैं।
क्विंट की वेबसाइट पर इन टेªनिंग सेण्टरों की पूरी रिपोर्ट पड़ी है हजारों लाखों लोग इस रिपोर्ट को देख चुके है। इसके बावजूद अखिलेश यादव की पिछली सरकार और आदित्यनाथ योगी सरकार ने इनमें किसी से भी यह पूछने की जहमत नही की कि आखिर यह लोग तालिबान की तरह अपने बच्चों के जेहनों में जहर क्यों घोल रहे हैं?

हाई कोर्ट ने कहा बूचड़खाने बंद करना गलतलखनऊ! आदित्यनाथ योगी की कयादत में उत्तर प्रदेश मंे बनी बीजेपी सरकार की पहली कार्रव...
25/05/2017

हाई कोर्ट ने कहा बूचड़खाने बंद करना गलत

लखनऊ! आदित्यनाथ योगी की कयादत में उत्तर प्रदेश मंे बनी बीजेपी सरकार की पहली कार्रवाई गैरकानूनी थी जिसके तहत योगी सरकार ने पूरे सूबे के बूचड़खाने बंद करवा दिए थें। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस संजय हरकोली ने पिछले दिनों अपने फैसले में कहा कि बूचड़खाने चलाना सरकार की जिम्मेदारी है सरकार इससे बच नहीं सकती। दो जजों की बंेच ने उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त आर्डर देते हुए कहा कि सत्रह जुलाई तक सभी बूचड़खाने ठीक कराकर अदालत को इसकी इत्तेला दी जाए। अदालत ने गोश्त के कारोबारियों से कहा कि नए लाइसंेस के लिए वह मजाज अफसर के सामने दरख्वास्त पेश करके लाइसेंस हासिल करें इसी तरह बंद किए गए बूचड़खाने चलाने की भी अदालत ने हिदायत दी कि वह नए लाइंसेस हासिल करें। अदलत ने उत्तर प्रदेेश सरकार से कहा कि आप अपने जेहन मंे यह भी रखें कि भारत सरकार भी मआशी तरक्की के लिए मुर्गी फार्म, मछली फार्म, पालट्री फार्म यहां तक कि सुअर पालने तक की स्कीमों को बढावा दे रही हैं ऐसी सूरत मंे किसी सूबे मंे बूचड़खाने कैसे बंद किए जा सकते है। अदालत ने एक बहुत ही अहम बात कही कि सरकार और सरकार की जानिब से बनाई गई कोई कमेटी सरकारी पालीसी पर अमल करते वक्त उसके समाजी, मआशी और कानूनी असरात को समझने की कोशिश करे। हमारे सेक्युलर आईन (संविधान) के तहत इस बात का ख्याल रखना होगा कि सरकारें अवामी फलाह व बहबूद (कल्याण) के लिए होती हैं न कि तरह-तरह की पाबंदी लगाने के लिए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बंेच ने मोहम्मद मुस्तफा व दीगर की जानिब से अलग अलग दायर पटीशनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस संजय हरकोली ने सरकार को दिए गए अपने हुक्म में कहा कि सरकार की तश्कील कर्दा रियासती सतह की कमेटी सत्रह जुलाई तक हलफनामा दाखिल करके इस मामले मंे अपनी रिपोर्ट देगी। सरकार के पास काफी वक्त है। अपनी मशीनरी को काम पर लगाए और कानून के मुताबिक मुसबत कदम उठाए। अदालत ने कहा कि डिवीजनल कमिशनर, डीएम और एसपी सरकार की तश्कील कर्दा आला अख्तियाराती कमेटी के साथ मिलकर बूचड़ खानों के लिए सही जगह का इंतखाब करंे। वाजेह हो कि उत्तर प्रदेश की नई सरकार ने सूबे मंे बगैर लाइसंेस चल रही गोश्त की दुकानों और बूचड़खानों पर पाबंदी लगा दी थी। इसी पाबंदी के खिलाफ मुख्तलिफ दुकानदारों और दुकानदारों की तंजीमों ने अदालत में रिट पटीशन दायर की थी। रिट पटीशन में कहा गया था कि उनकी गोश्त की दुकानांे का लाइसेेस 31 मार्च 2012 को पूरा हो गया है इसके बाद उन्होने फिर रिन्यूवल की दरख्वास्त दी मगर सरकार लाइसंेसो को रिन्यूवल नहीं कर रही है वहीं यह भी कहा गया है कि सरकार एक तरह से गोश्त खाने पर पाबंदी लगाने की कोशिश कर रही है जो आईन (संविधान) हुकूक की खिलाफवर्जी है। पटीशनों में यह भी कहा गया कि लोगों को अपनी पसंद का खाना खाने का हक है, चाहे वह सब्जीखोरी हो या गोश्त खोरी। एक पटीशन में यह कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने रियासती सरकार को जदीद स्लाटर हाउस की तामीर की हिदायत दी थी जिसकी तासील में पिछली सरकार ने जदीद स्लाटर हाउसों की तामीर के लिए करोड़ों के फण्ड भी जारी किए थे मगर मौजूदा सरकार ने सारा काम ठप कर दिया है। दलील दी गई कि आईन लोगों को अपनी पंसद का कारोबार करने या पेशा अख्तियार करने का हक देता है। अगर सरकार किसी को गोश्त का कारोबार करने से रोकती है तो यह सरासर गैरआईनी है। यह भी दलील दी गई कि लोकल बाडीज से जुडे तमाम कानून के तहत सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कानून के मुताबिक जदीद स्लाटर हाउस खोले लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है। उल्टे सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के एहकामात की आड़ लेकर स्लाटर हाउस बंद कर रही है। इससे लोगों को न सिर्फ अपनी पसंद का खाना मिलने में दिक्कत हो रही है बल्कि लोग इस कारोबार से भी महरूम हो रहे है।
वाजेह हो कि असम्बली एलक्शन के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने नाजायज बूचड़खानों को चुनावी इश्यू बनाया था। पार्टी के कौमी सदर अमित शाह चुनावी जलसों मंे जोर देकर इस बात का जिक्र करते थे कि अगर उनकी पार्टी की सरकार आई तो हलफ लेते ही उस रात के बारह बजे तक गैर कानूनी बूचड़खानों को बंद करादेगी। सरकार बनने के अगले रोज बूचडखानो को बंद कराने का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर जायज और नाजायज बूचडखाने तो बंद ही करा दिए गए बकरे और मुर्गी के गोश्त यहां तक कि मछली की दुकानें भी बंद करा दी गईं। बकरे और बडे़ के गोश्त की दुकानों पर 12 मार्च तक तो एक सिरे से पाबंदी ही लगी थीं क्योंकि सरकार लाइसंेसों को रिन्यूव नहीं कर रही थी। अदालत के अंतरिम एहकाम आने के बाद कुछ नर्मी जरूर दिखाई दे रही है मगर महदूद सतह पर ही है।
अदालत ने सरकार की इस बात पर हैरत का इजहार किया कि स्लाटर हाउस कायम करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। रियासती सरकार की दलील थी स्लाटर हाउस और गोश्त की दुकानों को लाइसंेस देने का जाब्ता फूड सेफ्टी एक्ट के तहत है और अगर इसके तहत कोई अर्जी दे तो उसपर कानून के मुताबिक गौर किया जाएगा। इसपर हाई कोर्ट ने रियासती सरकार से कहा कि वह दिमाग में रखे कि मआशी तरक्की के लिए मरकजी सरकार भी काम कर रही है। वह मुर्गी पालने, मछली पालने, पालट्री यहां तक कि सुअर पालने जैसी सरगर्मियों को बढावा दे रही है, रोक नहीं रही है। अदालत ने कहा कि सरकार इस मामले मंे उथल पुथल की सूरतेहाल को रोके। सरकार लाइसेेस, स्लाटर हाउस रजिस्टेªशन दीगर कार्रवाइयों के लिए एक कमेटी बनाए और उससे आम लोगों को मुत्तला करे। उसे यकीनी बनाना होगा कि जहां बूचड़खाने नहीं हैं इस कारोबार को करने का शहरियों का हक ही न खत्म हो जाए। न ही इसकी वजह से देही और शहरी दोनों इलाकों में जानवरों से मिलने वाले खाने की सप्लाई मुतास्सिर नहीं होनी चाहिए। वहीं गैर कानूनी सरगर्मियों को रोकने के लिए सरकार कानून के मुताबिक मुनासिब कदम उठा सकती है।
हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद गोश्त के कारोबारियों के पिछले डेढ महीने से जो चेहरे मुरझाए हुए थे उनमंे ताजगी के आसार दिखाई दिए। लेकिन गोश्त के कारोबारी अब इस की तैयारियां कर रहे हैं कि फूड सेफ्टी एक्ट के तहत इस जाब्ते में रियायत दी जाए जिसमंे यह है कि मजहबी मकामात से सौ मीटर की दूरी पर गोश्त की दुकानें खोली जा सकती हैं। इस मामले मंे मस्जिद को अलग कर दिया जाए। आल इंडिया जमीयतुल कुरैश इस सिलसिले में जल्द ही एक पटीशन दायर करके अदालत से दरख्वास्त करेगी कि मस्जिद को अलग कर दिया जाए क्योंकि हमारे मजहब मे मस्जिद के पास गोश्त बेचने या खाने की कोई मनाही नहीं है।

18/01/2016

प्रणव धनावड़े ने स्कूली क्रिकेट में खेली 1009 रनो की नाट आउट इनिंग, वल्र्ड रिकार्ड कायम किया
क्या प्रणव को मिलेगा सचिन-कांबली जैसा मौका

प्रणव धनावड़े नाम के आटो ड्राइवर के बेटे ने स्कूली क्रिकेट में 1009 रनो की नाट आउट इनिंग खेल कर न सिर्फ वल्र्ड रिकार्ड कायम किया बल्कि 117 साल पुराने रिकार्ड को भी तोड़ने का कारनामा अंजाम दिया था। लेकिन उनकी इस लाजवाब इनिंग के बाद अब हरतरफ से एक सवाल यह पूछा जा रहा हैं कि क्या प्रणव को भी सचिन-कांबली की तरह मौका देकर टीम इंडिया में शामिल किया जाएगा या फिर दीगर उन खिलाडि़यो की तरह वह भी गुमनामी के अंधेरे में खो जाएगा जिन्होने सचिन तेन्दुलकर और विनोद कांबली से ज्यादा रन स्कूली क्रिकेट में बनाए थे लेकिन वह रणजी ट्राफी तक की टीम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि सरकार ने कहा हैं कि वह प्रणव की तालीम और कोचिंग का पूरा खर्चा उठाएगी।
प्रणव के कोच मोबीन शेख ने बताया कि प्रणव उनके पास नौ साल की उम्र में आया था, बाद में उन्होने उसे एमजीआई ग्राउंड भेजा जहां सचिन के बेटे अर्जुन तेन्दुलकर से उसकी दोस्ती हुई और उसकी सलाहियतो में भी इजाफा हुआ। मोबीन कहते हैं प्रणव शुरु में बहुत शरारती था जिसकी वजह से उन्होने उसे विकेट कीपिंग करने को कहा उसके बाद उसने क्रिकेट को काफी संजीदगी से लेना शुरु किया। पन्द्रह बरस के प्रणव धनावड़े के वालिद आटो ड्राइवर हैं उसके बावजूद उन्होने बेटे के शौक को पूरा करने के लिए कोई कोर कसर नहीं उठा रखी। स्टेडियम में प्रणव के कोच मोबीन शेख हैं तो स्कूल के कोच हरीश शर्मा हैं। दोनो ही अपने शागिर्द की कामयाबी से बेहद खुश हैं और दोनो का ही कहना हैं कि प्रणव आगे चलकर अच्छा क्रिकेटर बनेगा। लेकिन यह भी तभी मुमकिन हो सकेगा कि जब उसे मौका दिया जाए जिसके आसार न के बराबर हैं क्योकि सभी जानते हैं कि टीम इंडिया मेें सेलेक्शन के लिए सलाहियत से ज्यादा सिफारिश और पैसे का खेल होता हैं और जो इसके खिलाफ आवाज उठाता हैं उसका अंजाम अभिजीत काले जैसा होता हैं जिसने उस वक्त टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर रहे किरन मोरे पर दस लाख रुपए मांगने का इल्जाम लगाया था। आज अभिजीत काले कहां हैं कोई नहीं जानता।
प्रणव ने वायलंेगर मैदान पर एच.टी भंडारी अंडर-16 इंटर स्कूल टूर्नामेंट में के.सी गांधी की तरफ से खेलते हुए 1009 रन (नाट आउट) का पहाड़ खड़ा कर दिया जिसके बोझ तले दब कर उसकी मुखालिफ टीम आर्य गुरुकुल महज 72 रनो पर आउट हो गई। प्रणव ने अपने साढ़े छः घंटे की इनिंग के दौरान 323 गंेदो का सामना किया और 312 चैके व 59 छक्को की मदद से 312.38 के स्ट्राइक रन रेट से बगैर आउट हुए 1009 रन बनाए। इतने रन बनाकर प्रणव ने 1899 में जूनियर हाउस मैच में आर्थ कोलिंस के जरिए बनाए गए 628 (नाट आउट) के रिकार्ड को तोड़कर एक नया वल्र्ड रिकार्ड बनाया यहीं नहीं प्रणव के रनो की मदद से उसकी टीम ने 1465 रनो पर अपनी इनिंग खत्म करने का एलान किया तो यह भी एक वल्र्ड रिकार्ड बन गया पिछला रिकार्ड 1107 रनो का था जो विक्टोरिया की टीम ने 1926 में बनाया था। प्रणव के बनाए गए रन क्रिकेट के रिकार्डो की तारीख (इतिहास) का हिस्सा भले ही बन जांए मगर प्रणव को टीम इंडिया में जगह दिला पांएगे यह कहना बहुत मुश्किल हैं। मुंबई में स्कूली मुकाबलो और इंटर स्कूल्स टूर्नामेंट में रन बना ही करते हैं लेकिन पहली बार यह बात मंजरे आम पर तब आई जब सचिन तेन्दुलकर और विनोद कांबली की जोड़ी ने स्कूल सतह के हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में 24 फरवरी 1988 को 664 रनो की पार्टनरशिप का एक रिकार्ड बनाया था। उसी के बाद से दोनो को टीम इंडिया में मौका दिया गया था। सचिन और कांबली दोनो ने अपनी सलाहियत का मुजाहिरा भी किया मगर कांबली को क्रिकेट के स्टारडम के कीड़े ने काट लिया नतीजा यह 1996 के वल्र्ड कप के बाद से धीरे-धीरे उनका कैरियर खत्म ही हो गया। लेकिन सचिन और कांबली के बाद सेलेक्टर्स ने स्कूली क्रिकेट में रनो के अंबार लगाने के बावजूद किसी क्रिकेटर को मौका नहीं दिया। वह रिकार्ड बुक में तो जिंदा हैं मगर अमली जिंदगी में गुमनामी के अंधेरो में खो चुके हैं। संजीव जाधव इसकी मिसाल हैं जिसने सचिन और कांबली से पहले 422 रनो का स्कोर बनाया था मगर उसे मौका नहीं दिया गया।
मुंबई के ही क्रिकेटर सरफराज आलम ने स्कूल टूर्नामंेट में लाजवाब बल्लेबाजी का मुजाहिरा करते हुए 439 रनो की एक रिकार्ड इनिंग 2009-10 में खेली थी। उस वक्त भी यह शोर उठा कि शायद एक और सचिन सामने आया हैं, मगर कुछ दिन के बाद सब कुछ भुला दिया गया। एक बार फिर सचिन के अवतार का चर्चा उस वक्त हुआ जब मुंबई के लाजवाब क्रिकेटर और टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके वसीम जाफर के भतीजे अरमान ने उसी हैरिस शील्ड स्कूली टूर्नामेंट में 473 रन का स्कोर बनाकर एक नया वल्र्ड रिकार्ड 2013 में बनाया जिस टूर्नामेंट में रन बनाकर सचिन और कांबली टीम इंडिया में पहुंचे थे। लेकिन अरमान जाफर के काम न उसके चचा वसीम जाफर का नाम आया न उसके बनाए रनो का पहाड़ ही उसके काम आ सका। अभी वह मुंबई की तरफ से अंडर-19 टीम में खेल रहे हैं।
अरमान जाफर के रिकार्ड के चंद महीनो के अंदर 2013 में ही पृथ्वी शां नाम के लड़के ने स्कूली क्रिकेट में 546 रन ठोककर एक नया वल्र्ड रिकार्ड कायम किया था। पृथ्वी के रिकार्ड को देखकर लग रहा था कि उसका यह रिकार्ड अब जल्दी नहीं टूटेगा मगर तीन साल के अंदर ही प्रणव ने 1009 रन (नाट आउट) का एक ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया हैं जिससे पार पाना अब आसान नहीं होगा। जब 117 साल बाद 628 रनो का रिकार्ड टूटा हैं तो प्रणव का रिकार्ड टूटने में डेढ़-पौने दो सौ साल तो लगेगे ही। अभी प्रणव की उम्र महज पन्द्रह साल हैं अगर उसे जल्द ही किसी भी सीनियर टीम में मौका मिल गया तो उसकी सलाहियते निखर सकती हैं वर्ना उसका भी वही हाल होगा जो संजीव जाघव, सरफराज आलम, अरमान जाफर और पृथ्वी शां का हुआ हैं। अरमान जाफर मुंबई की अंडर-19 टीम में खेलकर मुसलसल रन बना रहें हैं तो लोग उसे जान भी गए लेकिन आज सरफराज और पृथ्वी शां कहां हैं, क्या कर रहे हैं, किस टीम में खेल रहे हैं उनके बारे में कोई भी कुछ नही जानता। प्रणव का भी कही ऐसा हाल न हो।

18/01/2016

कांग्रेस का दीवालियापन
कोई भी मुल्क चाहे जितना ताकतवर हो या कमजोर अगर पड़ोसी मुल्कों से उसके रिश्ते बेहतर और खुशगवार नहीं होते तो मुल्क न तो खातिरख्वाह (वांछित) तरक्की कर पाता है और न ही मुल्क में सुकून रहता है। हिन्दुस्तान के साथ भी ऐसा ही है। आज अगर यूरोपी मुल्कों की तरह साउथ एशिया में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा और चीन के साथ बेहतर और खुशगवार ताल्लुकात होते तो शायद नरेन्द्र मोदी जैसे किसी भी लीडर को ‘अच्छे दिन आएंगे’ जैसा नारा लगाने का मौका न मिला होता। हमारे मुल्क के तमाम पड़ोसियों में पाकिस्तान और चीन दो ऐसे मुल्क हैं जिनके साथ निस्बतन हमारे ताल्लुकात अक्सर खराब ही रहते हैं। चीन के साथ ताल्लुकात तो ताकत की आजमाइश की वजह से खराब रहते हैं लेकिन पाकिस्तान का मामला बिल्कुल मुख्तलिफ है। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान दोनों की मुल्कांे की सरकारें अक्सर एक दूसरे के साथ ताल्लुकात में कशीदगी बरकरार रखना चाहती हैं। क्योंकि दोनों मुल्कों की कई सियासी पार्टियांे के लीडरान को यह गलतफहमी रहती है कि एक दूसरे के खिलाफ बोलकर उन्हें अपने अपने मुल्कों में वोटों का कुछ ज्यादा फायदा हो सकता है। पाकिस्तान में यह भ्रम काफी हद तक टूटा है क्यांेकि गुजिश्ता दस सालों में वहां की दोनों बड़ी सियासी पार्टियां यानी भुट्टो खानदान की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) दोनोें ही हिन्दुस्तान से ताल्लुकात अच्छे और खुशगवार बनाने के वादे पर लड़ी और जीती हैं इधर हिन्दुस्तान में ऐसा नहीं है यहां आम लोग तो पाकिस्तान से दुश्मनी का रवैय्या नहीं रखते लेकिन दोनो बड़ी सियासी पार्टियों यानी कांग्रेस और बीजेपी के लीडरान को अभी भी यह गलतफहमी है कि पाकिस्तान को कोसने और पाकिस्तान के खिलाफ बोलने और दुश्मनी जैसा रवैय्या रखकर अपने वोटों मंे इजाफा किया जा सकता है। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी आज तो पाकिस्तान और वहां के वजीर-ए-आजम के साथ मोहब्बत भरी पंेगें बढाते दिख रहे हैं यही मोदी और उनकी पार्टी महज दो महीने पहले ही बिहार असम्बली एलक्शन के दौरान पाकिस्तान की मुखालिफत करके ज्यादा से ज्यादा हिन्दुओं के वोट लेने की कोशिश कर रहे थे। वह इस मकसद मे नाकाम ही साबित हुए थें चूंकि पाकिस्तान में हिन्दुस्तान को हिन्दू मुल्क और हिन्दुस्तान में पाकिस्तान को मुस्लिम मुल्क की तरह देखा जाता है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कई लीडर इस बात में यकीन रखते हैं कि मुस्लिम मुल्क होने के नाते पाकिस्तान को बुरा भला कहकर ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल किए जा सकते हैं।
पाकिस्तान के नाम पर भारतीय जनता पार्टी तो लोगों को भड़काकर कुछ वोट हासिल भी कर सकती है लेकिन कांग्रेस ऐसा करने मे कभी भी कामयाब नहीं हुई है। यह दीगर बात है कि कांगे्रस जब जब सत्ता से बाहर होती है तो वह पाकिस्तान के नाम पर बीजेपी जैसा रवैय्या अख्तियार करने की कोशिश करती है। इसे कांग्रेस का दीवालियापन ही कहा जाएगा कि आज कांग्रेस यह सोच रही है कि पाकिस्तान की हर सतह पर मुखालिफत करके उन कट्टरपंथियों के वोट हासिल कर सकती है जो कट्टरपंथी अक्सर बीजेपी के साथ ही रहते हैं। कांग्रेस का दीवालियापन यह भी है कि कट्टरपंथियों के खौफ की वजह से ही मनमोहन सिंह अपनी दस साल की सरकार के दौरान पाकिस्तानी पंजाब में अपने गांव तक जाने की हिम्मत नहीं कर पाए हालांकि पाकिस्तान ने उन्हें कई बार दावत दी और उनके गांव मंे उनके दौरे की तमाम तैयारियां भी पूरी की गई थीं। अब वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ ताल्लुकात बेहतर बनाने के लिए जरूरत से ज्यादा उतावलापन दिखाते हुए बगैर किसी तय प्रोग्राम के अफगानिस्तान से वापस लौटते हुए रास्ते मंे लाहौर मंे उतर कर नवाज शरीफ को उनके यौमे पैदाइश और उनकी नातिन की शादी की मुबारकबाद देने का काम किया तो कांग्रेस ने बगैर कुछ सोचे समझे उनके इस कदम की सख्त मुखालिफत शुरू करके अपने सियासी दीवालिएपन का सुबूत दिया है। मोदी अचानक पाकिस्तान गए तो कांग्रेस को उसपर सिर्फ दो सवाल करने चाहिए थे एक यह कि नरेन्द्र मोदी का यह दौरा हिन्दुस्तान के मफाद में है या वह वहां अपने दो दोस्तों की तिजारत और एक्सपोर्ट को फरोग (बढ़ावा) देने के लिए गए थे। सभी जानते हैं कि मोदी के सबसे करीबी दोस्त गौतम अडानी हैं। गौतम अडानी के कई किस्म के कारोबार हैं वह बिजली बनाने और बेचने का भी काम करते हैं वह पाकिस्तान को भी बिजली बेचते हैं और चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ उनका कारोबार बहुत बड़े पैमाने पर पहुंच जाए। उनके दूसरे और नए दोस्त है सज्जन जिन्दल जिनका स्टील का कारोबार है। उधर नवाज शरीफ पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम होने के साथ-साथ स्टील के सबसे बड़े कारोबारी हैं। जिन्दल और नवाज शरीफ के इत्तेफाक ग्रुप के साथ स्टील का कारोबार है। वह भी अपने कारोबार में बड़े पैमाने पर इजाफा करना चाहते हैं। वैसे तो सज्जन जिन्दल खानदानी एतबार से बहुत पुराने कांग्रेसी हैं उनके भाई नवीन जिन्दल दो हजार चार से दो हजार चैदह तक कांग्रेस के लोक सभा मेम्बर भी रहे हैं। उनके वालिद हरियाणा कांग्रेस के लीडर और प्रदेश मे बिजली वजीर रहे थे जिनका एक हवाई हादसे में इंतकाल हो गया था। उसके बाद उनकी वालिदा भी सीधे तौर पर कांग्रेस की लीडर रही हैं। कहा जाता है कि अब वह नरेन्द्र मोदी और नवाज शरीफ के दरम्यान पुल का काम कर रहे हैं। मोदी से दूसरा सवाल यह होना चाहिए था कि पाकिस्तान के साथ उन्होने जिस किस्म की मोहब्बत की शुरूआत की है उनका यह जज्बा कब तक और किस हद तक कायम रहेगा। यह सवाल तो हो नहीं रहे हैं। अब तो कांग्रेसी भी वही जुमले दोहरा रहे हैं जो अपोजीशन में रहने के वक्त बीजेपी के लीडरान बोलते रहते थे। कांग्रेस के ज्यादातर लीडरान यही कहते सुने गए है कि एक तरफ सरहद पर पाकिस्तान की जानिब से बार बार सीज फायर की खिलाफवर्जी हो रही है। हमारे फौजी शहीद हो रहे हैं दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ के घर पर चाय नाश्ता कर रहे हैं। कांग्रेस के एक तर्जुमान ने यहां तक कह दिया कि पहले तो मोदी अकड़ते फिर रहे थे फिर उन्होंने पाकिस्तान से सामने सर झुका दिया। यह बयान भी कांग्रेस जैसी कौमी पार्टी के तर्जुमान के शायाने शान नहीं था।
जहां तक मुख्तलिफ मुल्कांे के दरम्यान सिफारती (डिप्लोमेटिक) मामलात का सवाल है आमतौर पर तो तमाम मुल्क एक दूसरे के साथ अपने सिफारती ताल्लुकात अपनी एम्बेसीज के साथ कायम रखते हैं। दूसरा है ‘टैªक टू डिप्लोमेसी’ जो आम तौर पर उन मुल्कों में इस्तेमाल होती है जिनके ताल्लुकात आपस में अच्छे नहीं होते जैसे हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के दरम्यान हैं। इसी लिए दोनों मुल्क बगैर सरकारी एलान के अक्सर कुछ लोगों को अपना खुफिया नुमाइंदा बना कर मुख्तलिफ सतहों पर बात चीत करने के लिए भेजते रहते हैं। जहां तक वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी का सवाल है उन्होंने एक नई डिप्लामेसी ईजाद की दी है। वह है ‘टूरिज्म डिप्लोमेसी ’ यानी कि वह डिप्लोमेसी के बहाने दुनिया में सबसे ज्यादा मुल्कों का दौरा करने वाले वजीर-ए-आजम का अवार्ड हासिल करना चाहते हैं। उनकी ‘टूरिज्म डिप्लोमेसी’ भी ऐसी होती है कि वह चीन दौरे पर गए तो उसी के साथ मंगोलिया का भी दौरा लगा लिया और बड़े जोर शोर के साथ खबरे छपवाई गई कि वह मंगोलिया जाने वाले हिन्दुस्तान के पहले वजीर-ए-आजम हैं। उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि चीन और मंगोलिया के ताल्लुकात ऐसे नहीं रहे हैं कि दोनों मुल्कांे का दौरा एक साथ किया जाए। अफगानिस्तान से दिल्ली वापसी में लाहौर में रूकने का उनका फैसला भी बजाहिर खुद को बड़े दिलवाला साबित करने के लिए था। पाकिस्तान सरकार की जानिब से कहा गया कि भारत के वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने जब अफगानिस्तान से वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ को फोन किया तो तभी उन्होंने लाहौर मे उतरने की ख्वाहिश जाहिर की थी। नवाज शरीफ ने कहा आइए आपका इस्तकबाल है। जो भी हो अगर मोदी के इस तरह अचानक लाहौर जाने के पीछे अस्ल मकसद दोनों मुल्कांे के दरम्यान ताल्लुकात बेहतर और खुशगवार बनाने का है तो उनके इस कदम का खैरमकदम किया जाना चाहिए। यह दीगर बात है कि इस दौरे के अस्ल मकसद का अंदाजा आने वाले वक्त मे ही लग सकेगा।

18/01/2016

कहां गया मोदी का 56 इंच का सीना
पिछले साल गुरदासपुर और अब पठानकोट एयर फोर्स बेस। पाकिस्तानी दहशतगर्द भारी भरकम हथियार लेकर हमारे मुल्क में दाखिल होते हैं, दस बारह किलोमीटर तक घूमते हुए अपने निशाने तक पहुंच जाते हैं हमला करते हैं और नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार यह कहकर अपना पीछा छुड़ाने की कोशिशें करते दिखते हैं कि पाकिस्तानी दहशतगर्द गरोह साजिश करके हमारे मुल्क पर हमले करा रहे हैं। मोदी सरकार की हालत यह है कि पहली जनवरी की रात में दहशतगर्दों ने पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हमला किया, दो जनवरी को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पारिकर, होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह और फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली सभी ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए ट्वीट कर दिया कि सिक्योरिटी फोर्सेज के हमारे बहादुर जवानों ने सभी पांचों दहशतगर्दों को मार गिराया और यह आप्रेशन कामयाबी के साथ मुकम्मल हो गया। यह पैगाम अभी पूरे मुल्क में ठीक से पहुंचा भी नहीं था तीन जनवरी को पठानकोट एयरफोर्स बेस में फिर से गोलियां चलने लगीं पता चला कि दो दहशतगर्द तो बेस में छुपे ही रह गए थे। इससे ज्यादा शर्मनाक सूरते हाल और क्या हो सकती है कि पूरे एयरफोर्स बेस की छानबीन किए बगैर ही वजीर-ए-आजम समेत सभी सीनियर वजीरों ने बयान जारी करा दिए।
हम बात कर रहे हैं वजीर-ए-आजम बनने से पहले नरेन्द्र मोदी के जरिए की गई लफ्फाजियों की। 6 फरवरी 2013 को एक टीवी प्रोग्राम में अपने 56 इंच के सीने को दिखाते हुए कहा था कि पाकिस्तान को उसी की जुबान (भाषा) मंे जवाब देने की जरूरत है। उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि पाकिस्तान को लवलेटर लिखना बंद करो और पाकिस्तान को उसी जबान में जवाब दो जो जुबान वह समझता है। मोदी ने बड़े ही ड्रामाई अंदाज में कहा था कि पाकिस्तान हम पर हमला करता है और हम भागकर अमरीका जाते हैं ओबामा के सामने रोते हुए कहते हैं कि हमंे पाकिस्तान से बचाओ। मोदी ने कहा था कि अगर वह मुल्क के वजीर-ए-आजम होते तो मुंबई पर 26 नवम्बर का हमला ही न हो पाता और होता तो वह वैसी ही कार्रवाई करते जो हमने गुजरात में किया है। गुजरात में पाकिस्तानी दहशतगर्दों का तो कोई हमला हुआ नहीं था। वहां तो मोदी, उनकी सरकार, उनकी पार्टी बीजेपी इन सब को पैदा करने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसकी बनाई हुई बजरंग दल व विश्व हिंदूू परिषद जैसी दहशतगर्द तंजीमों ने गरीब निहत्थे मुसलमानों पर जुल्म की तमाम हदें पार कर दी थीं। मोदी अभी तक उन जालिमाना कार्रवाइयों पर फख्र करते हैं। अब नरेन्द्र मोदी खुद ही मुल्क के वजीर-ए-आजम हैं पाकिस्तान सरहद पर रोजाना ही सीज फायर की खिलाफवर्जी करता रहता है। पहले गुरदासपुर फिर जम्मू और अब पठानकोट, पाकिस्तानी दहशतगर्द और फौज बराबर हमारे मुल्क पर हमले करते जा रहे हैं और पाकिस्तान की जुबान में जवाब देने जैसी बातें करने वाले नरेन्द्र मोदी पाकिस्तानी वजीर-ए-आजम नवाज शरीफ के साथ गुपचुप बातें करते फिर रहे हैं। हर तरफ एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर अब नरेन्द्र मोदी का छप्पन इंच का सीना अचानक किसी डरपोक चूहे जैसा क्यों हो गया है। अब मोदी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने से भाग क्यों रहे हैं अब वह सख्त जवाब देने के बजाए नवाज शरीफ को मुबारकबाद देने और उनकी वालिदा के पैर छूने के लिए लाहौर में क्यों उतर गए? क्या वजीर-ए-आजम बनने के बाद नरेन्द्र मोदी बुजदिल हो गए हैं या 2013 मे वह महज वोट हासिल करने की गरज से आम हिन्दुओं को भड़काने के लिए मनमोहन सरकार पर पाकिस्तान के बहाने हमले कर रहे थे। उस वक्त तो वह बहुत अकड़ते फिर रहे थे अब आखिर मोदी की क्या मजबूरी है कि वह पाकिस्तान के साथ उसी जुबान मंे बात करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं जिस जुबान का जिक्र वह खुद किया करते थे। जब तक भारतीय जनता पार्टी अपोजीशन मंे थी उस वक्त तो मोदी भी बड़े बहादुर हुआ करते थे, आरएसएस लीडरान कहते फिरते थे कि अगर अमरीका पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार सकता है तो हिन्दुस्तान ऐसा क्यों नहीं कर सकता। सुषमा स्वराज कहती थीं कि पाकिस्तानी फौजियांे ने हमारे एक जवान का सर काटा है हम दस पाकिस्तानियों के सर काट कर लाएंगे। तो राजनाथ सिंह कहते थे कि मोदी में इतना दम है कि वह कराची से दाऊद इब्राहीम को बकरे की तरह गर्दन पकड़ कर ला सकते हैं। मोदी लाहौर जाकर नवाज शरीफ को उनके जन्म् दिन की मुबारकबाद देते और उनकी वालिदा के पैर छूते दिखते हैं। सुषमा स्वराज पाकिस्तान के साथ कम्पोजिट डायलाग की वकालत कर रही हैं और राजनाथ सिंह तमाशा देख रहे हैं। उधर पाकिस्तान और उसके दहशतगर्द किसी भी कीमत पर अपनी हरकतों से बाज आने के लिए तैयार नहीं हैं। सरहद पार से हिन्दुस्तान के अंदर दहशतगर्द गरोहों की घुसपैठ और हमले जारी हैं। आखिर पाकिस्तान के साथ उसी की भाषा में बात करने और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से नरेन्द्र मोदी डर क्यों रहे हैं?
नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को टूरिज्म डिप्लोमेसी के तहत अफगानिस्तान से दिल्ली वापस आते वक्त लाहौर मंे उतर गए थे आरएसएस कुन्बे ने उनकी इस पहल का खूब ढिंढोरा पीटा था और कहा था कि मोदी ने ऐसी बेमिसाल पहल करके पाकिस्तान ही नहीं पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। ऐसा करने वाले वह पहले हिन्दुस्तानी वजीर-ए-आजम हैं जिन्होंने इस तरह पाकिस्तान मे उतरने की हिम्मत दिखाई। उनकी हिम्मत के इस मुजाहिरे को एक हफ्ता भी नहीं गुजरा कि पाकिस्तान ने रिटर्न गिफ्ट मे हमारे सात बहादुर फौजियों की लाशें हमें थमा दीं। पाकिस्तान की यूनाइटेड जेहाद कौंसिल ने पठानकोट हमले की जिम्मेदारी ली इसके बावजूद पाकिस्तान यही कहता रहा है कि इस हमले मे उसका कोई हाथ नहीं है। जिस दिन पठानकोट पर पाकिस्तानी फिदाईन दहशतगर्दों का हमला हुआ ठीक उसी दिन नागपुर मंे आरएसएस चीफ मोहन भागवत अपने स्वयं सेवकों की भीड़ को देश और हिन्दुत्व की हिफाजत करने का हलफ (शपथ) दिला रहे थे। दावा किया गया कि एक लाख लोगों को हलफ दिलाया गया। आरएसएस चीफ आखिर यह कौन सी फौज खड़ी कर रहे हैं और देश भक्ति के बहाने किसके खिलाफ खड़ी कर रहे हैं। अगर आरएसएस के स्वयं सेवकों की फौज इतनी ही देशभक्त है तो इन देशभक्त स्वयं सेवकों को सरहद पर बीएसएफ और फौज की मदद में क्यों नहीं तैनात किया जाता। पाकिस्तान के साथ पंजाब में मिलने वाली सरहद से अक्सर पाकिस्तानी दहशतगर्द हिन्दुस्तान में घुसपैठ करते रहते हैं बीएसएफ उन्हें रोक पाने में नाकाम है या लापरवा ऐसी सूरत में अगर खुद को देशभक्त कहने वाले आरएसएस स्वयं सेवकों को सरहद पर तैनात कर दिया जाए तो यह लोग देश की हिफाजत करने का काम बखूबी कर सकेंगे। अगर अब भी यह लोग सरहद पर जाकर देश की हिफाजत का काम नहीं संभालते तो यही समझा जाएगा कि उन्हें लड़ने की जितनी भी टेªनिंग दी जाती है वह सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ दंगा फसाद कराने के मकसद से ही दी जाती है।
एक तरफ पाकिस्तानी दहशतगर्द जब चाहें हमारी सरहद मे घुसकर हमले करते रहते हैं। दूसरी तरफ मुल्क के स्यूडो देशभक्त किसी भी तरह उन लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए तैयार नहीं है जिन पर सरहद की रखवाली की जिम्मेदारी है। सरहद पर हर जगह बार्डर सिक्योरिटी फोर्स और कुछ दीगर पैरा मिलीट्री फोर्स के दस्ते तैनात रहते हैं इसके बावजूद पाकिस्तानी दहशतगर्द बड़ी तादाद में असलहों मोर्टार, राकेट लांचर और एके सीरीज की एसाल्ट रायफल लेकर हमारे मुल्क में घुस आते हैं सरहद से पन्द्रह से बीस किलोमीटर तक आराम से घूमते रहते हैं पुलिस कप्तान तक तो अगवा कर लेते हैं पंजाब के अंदर छुपे भी रहते हैं दो तीन छुपे रहने के बाद अपनी मर्जी मुताबिक मकाम पर हमले कर देते हैं। पंजाब पुलिस की भी उनपर नजर नहीं पड़ती। यह कोई मामूली चूक नहीं है जिन लोगों की चूक से ऐसा होता है उनकी शिनाख्त करके उनके खिलाफ सख्त तरीन कार्रवाई करनी पडेगी। अगर किसी पर जवाबदेही तय न की गई तो इस किस्म के दहशतगर्दी के हमले होते रहेंगे और हम मुंह छुपाकर घडि़याली आंसू बहाते रहेंगे जवाब नहीं दे सकेंगे।

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