Mere Vichaar

Mere Vichaar Meri kuch ankahi baate

02/03/2026

26/02/2026

Aapko Inme se kitne mantra yaad hai..

90% लोगो को इसका जवाब नही पता क्या आप इसका सही जवाब जानते हैं ? कमेंट में इसका उत्तर बताये
25/02/2026

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24/02/2026

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क्या आप ये पहले से यह जानते थे?  आप किस परीक्षा की तैयारी कर रहे है?
23/02/2026

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23/02/2026

Mind Refreshing Song🥰🥰

31/08/2025

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15/03/2024

गांव के बियाह
पहले गाँव मे न टेंट हाऊस थे और न कैटरिंग, थी तो बस सामाजिकता। गांव में जब कोई शादी ब्याह होते तो घर घर से चारपाई आ जाती थी, हर घर से थरिया, लोटा, कलछुल, कराही इकट्ठा हो जाता था और गाँव की ही महिलाएं एकत्र हो कर खाना बना देती थीं। औरते ही मिलकर दुलहिन तैयार कर देती थीं और हर रसम का गीत गारी वगैरह भी खुद ही गा लिया करती थी।
तब DJ अनिल-DJ सुनील जैसी चीज नही होती थी और न ही कोई आरकेस्ट्रा वाले फूहड़ गाने। गांव के सभी चौधरी टाइप के लोग पूरे दिन काम करने के लिए इकट्ठे रहते थे। हंसी ठिठोली चलती रहती और समारोह का कामकाज भी। शादी ब्याह मे गांव के लोग बारातियों के खाने से पहले खाना नहीं खाते थे क्योंकि यह घरातियों की इज्ज़त का सवाल होता था। गांव की महिलाएं गीत गाती जाती और अपना काम करती रहती। सच कहु तो उस समय गांव मे सामाजिकता के साथ समरसता होती थी।
खाना परसने के लिए गाँव के लौंडों का गैंग समय पर इज्जत सम्हाल लेते थे। कोई बड़े घर की शादी होती तो टेप बजा देते जिसमे एक कॉमन गाना बजता था-मैं सेहरा बांधके आऊंगा मेरा वादा है और दूल्हे राजा भी उस दिन खुद को किसी युवराज से कम न समझते। दूल्हे के आसपास नाऊ हमेशा रहता, समय समय पर बाल झारते रहता था और समय समय पर काजर-पाउडर भी पोत देता था ताकि दुलहा सुन्नर लगे। फिर द्वारा चार होता फिर शुरू होती पण्डित जी लोगों की महाभारत जो रातभर चलती। फिर कोहबर होता, ये वो रसम है जिसमे दुलहा दुलहिन को अकेले में दो मिनट बतियाने के लिए दिया जाता था लेकिन इत्ते कम समय में कोई क्या खाक बात कर पाता। सबेरे कलेवा में जमके गारी गाई जाती और यही वो रसम है जिसमे दूल्हे राजा जेम्स बांड बन जाते कि ना, हम नही खाएंगे कलेवा। फिर उनको मनाने कन्यापक्ष के सब जगलर टाइप के लोग आते।
अक्सर दुलहा की सेटिंग अपने चाचा या दादा से पहले ही सेट रहती थी और उसी अनुसार आधा घंटा या पौन घंटा रिसियाने का क्रम चलता और उसी से दूल्हे के छोटे भाई सहबाला की भी भौकाल टाइट रहती लगे हाथ वो भी कुछ न कुछ और लहा लेता...फिर एक जय घोष के साथ रसगुल्ले का कण दूल्हे के होठों तक पहुंच जाता और एक विजयी मुस्कान के साथ वर और वधू पक्ष इसका आनंद लेते।
उसके बाद दूल्हे का साक्षात्कार वधू पक्ष की महिलाओं से करवाया जाता और उस दौरान उसे विभिन्न उपहार प्राप्त होते जो नगद और श्रृंगार की वस्तुओं के रूप में होते.. इस प्रकिया में कुछ अनुभवी महिलाओं द्वारा काजल और पाउडर लगे दूल्हे का कौशल परिक्षण भी किया जाता और उसकी समीक्षा परिचर्चा विवाह बाद आहूत होती थी और लड़कियां दूल्हा के जूता चुराती और 21 से 51 में मान जाती। इसे दूल्हा दिखाई कहा जाता था.
फिर गिने चुने बुजुर्गों द्वारा माड़ौ (विवाह के कर्मकांड हेतु निर्मित अस्थायी छप्पर) हिलाने की प्रक्रिया होती वहां हम लोगों के बचपने का सबसे महत्वपूर्ण आनंद उसमें लगे लकड़ी के शुग्गों ( तोता) को उखाड़ कर प्राप्त होता था और विदाई के समय नगद नारायण कड़ी कड़ी 10/20 रूपये की नोट जो कहीं 50 रूपये तक होती थी।
वो स्वार्गिक अनुभूति होती कि कह नहीं सकते हालांकि विवाह में प्राप्त नगद नारायण माता जी द्वारा 2/5 रूपये से बदल दिया जाता था।
आज की पीढ़ी उस वास्तविक आनंद से वंचित हो चुकी है जो आनंद विवाह का हम लोगों ने प्राप्त किया है.
लोग बदलते जा रहे हैं, परंपरा भी बदलते चली जा रही है, आगे चलकर यह सब देखन को मिलेगा की नही अब इ त विधाता जाने लेकिन जो मजा उस समय मे था, वह अब धीरे धीरे बिलुप्त हो रहा है।

सब समय समय की बात है। आपको कौन सा समय बेहतर लगता है कमेंट जरुर करें।

सिर्फ इसलिए कि आप इसमें फिट हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सही जगह पर हैं। हममें से ज़्यादातर लोग जहाँ फ़िट बैठ जाते हैं,...
12/03/2024

सिर्फ इसलिए कि आप इसमें फिट हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सही जगह पर हैं। हममें से ज़्यादातर लोग जहाँ फ़िट बैठ जाते हैं,उसी जगह को अपने लिए बनी हुई जगह मान लेते हैं, जबकि आपकी खूबियां आपकी बनावट की सरहद में बंधी हुई नही हैं ।

एक लड़का,जिसकी म्यूज़िक पर ज़बरदस्त पकड़ थी । वह कितने ही तरह के इंस्ट्रूमेंट्स पर अपने हाथ और समझ का हुनर रखता । यही नही लौकी और कद्दू के सूखे हुए कवर से वह गज़ब का संगीत पैदा करता । हमने तो उसे सेठे-बांस-नरकुल से उपजे संगीत में झूमते हुए देखा था । उसने संगीत में पढ़ाई भी की मगर अचानक उसके पिता,जो सरकारी अध्यापक थे,गुज़र गए ।

घर में कई भाइयों के बीच उसे बड़े होने की वजह से अनुकम्पा में वह नौकरी मिल गई । मैं भी उस वक़्त था,जब यह फ़ैसला चल रहा था कि नौकरी कौन करे । वह लड़का नौकरी करने के लिए पूरे मन से तैयार था । जबकि हमें लगता था कि उसके अंदर जो संगीत है, उसे एक खुला आसमान चाहिए और खुला आसमान चुनौती तो लाता है, लेकिन वो लड़का वह चुनौती लेने को तैयार नही था ।

बहुत साल बाद हम उसके स्कूल गए । वह हिंदी का अध्यापक था और साथ में स्कूल की सभी एक्टिविटी में शामिल रहता था । बच्चों को संस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तैयारियों में मदद करता, मुझसे बात करता हुआ,अपने कलम से मेज़ को बजाते हुए कह रहा था लो जी, हम तो यहां फ़िट हो गए । सुबह से शाम तक बच्चे, फिर घर परिवार और क्या ही चाहिए ।

वह बोल रहा था और मेरी नज़र में नौशाद दौड़ रहे थे । वह नौशाद जिन्हें उनके वालिद एक सुक़ून भरी ज़िन्दगी में फ़िट ही तो कर रहे थे । बड़े घर से होने के बावजूद,तमाम पाबंदियों को तोड़कर नौशाद ने कहीं भी फ़िट होना ही तो नही चुना और घर के दरवाज़े से मुँह मोड़कर संगीत का एक संसार रच दिया ।
चित्र में दी गई प्लेट फ़िट हैं, गिरेंगी नही, टूटेगी नही क्योंकि सारा कंफर्ट तो है, मगर यह जगह उनके मिज़ाज, उनके वक़ार,उनकी पसन्द की नही है । बस वह यहां फ़िट हैं और यहीं वह अपनी सारी ज़िन्दगी काट भी सकती हैं । ज़िन्दगी काटना और ज़िन्दगी जीना,यह फ़र्क़ इन प्लेटों की तरह तमाम लोगों को नही पता होता,आप किसे किसे बताएं कि जो तुम्हारा फ़िट होना है, वह मेरी ज़िन्दगी नही है....

हो सकता है वह लड़का नौशाद न बन पाता मगर उस रास्ते पर चलता हुआ बिखर जाता । अब वह सिमटा हुआ है और उस जगह फ़िट है, जो जगह शायद उसके लिए नही थी । हम सब अक्सर वहीं फ़िट हो जाते हैं, जहां हमारा आकार तो आ जाता है मगर विचार मर जाता है...

मेरी इस मेहनत के लिए क्या कोई 1 लाइक और शेयर भी नही करेगा😔😞
08/03/2024

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इनकी शादी 12 जुलाई को है यह 5 महीने पहले ही प्री वेडिंग का नया तमाशा शुरू हो गया है। इन लोगों की देखा देखी कुछ उच्च वर्ग...
07/03/2024

इनकी शादी 12 जुलाई को है यह 5 महीने पहले ही प्री वेडिंग का नया तमाशा शुरू हो गया है। इन लोगों की देखा देखी कुछ उच्च वर्ग के लोग भी इसी तरह का पैटर्न अपना लेंगे और धीरे-धीरे मध्यम वर्ग तक जो इस चीज को आर्थिक रूप से झेलने के लिए भी तैयार नहीं है उन लोगों के अंदर भी यह बात पहुंच जाएगी की शादी तो इस तरह से ही होती है पहले ही शादी का खर्चा बहुत गैर जिम्मेदाराना तरीके से गैर जरूरी चीजों ने बढ़ा दिया है।
इससे पहले ही एकता कपूर के वाहियात सीरियलों ने नए नए अजीबो-गरीब रीति रिवाज चला दिए हैं जिनके देखा देखी आज मध्यम वर्ग भी उनकी नकल कर रहा है और पानी की तरह पैसा बहा रहा है चाहे कर्ज ही क्यों ना लेना पड़े, यह बड़ा चिंता का विषय है क्योंकि की ऐसे खर्चों से उच्च वर्ग को भले ही ज्यादा फर्क न पड़े लेकिन मध्यम वर्ग की कमर टूट जायेगी और शादी से जीवन में खुशी की जगह कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ ज्यादा बढ़ जाएगी।।
इस पर आप लोगो का क्या विचार है कमेंट में जरूर बताएं 🙏🙏

06/03/2024

इसीलिए कहा जाता हैं कि शिक्षा बहुत जरूरी होती है 😂😂
"मामला लीगल है" मूवी का एक बेहतरीन सीन 🔥

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