12/03/2024
सिर्फ इसलिए कि आप इसमें फिट हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सही जगह पर हैं। हममें से ज़्यादातर लोग जहाँ फ़िट बैठ जाते हैं,उसी जगह को अपने लिए बनी हुई जगह मान लेते हैं, जबकि आपकी खूबियां आपकी बनावट की सरहद में बंधी हुई नही हैं ।
एक लड़का,जिसकी म्यूज़िक पर ज़बरदस्त पकड़ थी । वह कितने ही तरह के इंस्ट्रूमेंट्स पर अपने हाथ और समझ का हुनर रखता । यही नही लौकी और कद्दू के सूखे हुए कवर से वह गज़ब का संगीत पैदा करता । हमने तो उसे सेठे-बांस-नरकुल से उपजे संगीत में झूमते हुए देखा था । उसने संगीत में पढ़ाई भी की मगर अचानक उसके पिता,जो सरकारी अध्यापक थे,गुज़र गए ।
घर में कई भाइयों के बीच उसे बड़े होने की वजह से अनुकम्पा में वह नौकरी मिल गई । मैं भी उस वक़्त था,जब यह फ़ैसला चल रहा था कि नौकरी कौन करे । वह लड़का नौकरी करने के लिए पूरे मन से तैयार था । जबकि हमें लगता था कि उसके अंदर जो संगीत है, उसे एक खुला आसमान चाहिए और खुला आसमान चुनौती तो लाता है, लेकिन वो लड़का वह चुनौती लेने को तैयार नही था ।
बहुत साल बाद हम उसके स्कूल गए । वह हिंदी का अध्यापक था और साथ में स्कूल की सभी एक्टिविटी में शामिल रहता था । बच्चों को संस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तैयारियों में मदद करता, मुझसे बात करता हुआ,अपने कलम से मेज़ को बजाते हुए कह रहा था लो जी, हम तो यहां फ़िट हो गए । सुबह से शाम तक बच्चे, फिर घर परिवार और क्या ही चाहिए ।
वह बोल रहा था और मेरी नज़र में नौशाद दौड़ रहे थे । वह नौशाद जिन्हें उनके वालिद एक सुक़ून भरी ज़िन्दगी में फ़िट ही तो कर रहे थे । बड़े घर से होने के बावजूद,तमाम पाबंदियों को तोड़कर नौशाद ने कहीं भी फ़िट होना ही तो नही चुना और घर के दरवाज़े से मुँह मोड़कर संगीत का एक संसार रच दिया ।
चित्र में दी गई प्लेट फ़िट हैं, गिरेंगी नही, टूटेगी नही क्योंकि सारा कंफर्ट तो है, मगर यह जगह उनके मिज़ाज, उनके वक़ार,उनकी पसन्द की नही है । बस वह यहां फ़िट हैं और यहीं वह अपनी सारी ज़िन्दगी काट भी सकती हैं । ज़िन्दगी काटना और ज़िन्दगी जीना,यह फ़र्क़ इन प्लेटों की तरह तमाम लोगों को नही पता होता,आप किसे किसे बताएं कि जो तुम्हारा फ़िट होना है, वह मेरी ज़िन्दगी नही है....
हो सकता है वह लड़का नौशाद न बन पाता मगर उस रास्ते पर चलता हुआ बिखर जाता । अब वह सिमटा हुआ है और उस जगह फ़िट है, जो जगह शायद उसके लिए नही थी । हम सब अक्सर वहीं फ़िट हो जाते हैं, जहां हमारा आकार तो आ जाता है मगर विचार मर जाता है...