26/10/2025
अभी एक वीडियो देखा जिसमे कायस्थ समाज के लोग कुम्हरार विधानसभा से bjp का बायकॉट कर रहे क्योंकि कायस्थों की सीट काटकर किसी और को दे दी गयी है |
कायस्थों का राजनीतिक डाउन फाल एक रिसर्च का विषय है , थोड़ा बहुत गिरावट तो सबमे आया है लेकिन इतनी गिरावट की 1-2 टिकट के लिए मोहताज हो जाये ? मतलब सोचकर भी अजीब लगता है कि जो समाज 1950-1980 के दशक तक राजनितिं मे ब्राह्मणों के बाद सबसे पॉवरफुल था ,जो आजादी से पहले इतने स्वतन्त्रा सेनानी, नेता दिये वो आज 1-2 विधानसभा टिकट के लिए भी काबिल नही माने जा रहे समझ से परे है |
ऐसा भी नही है कि आबादी नगण्य हो, बिहार में 0.60% आबादी है सरकारी आंकड़ों के हिसाब से और इतनी आबादी काफी है अपनी पहचान बनाने के लिए ,up में गुज्जर और भूमिहार की आबादी भी इतनी है लेकिन वो राजनितिं में एक्टिव है ,उनका प्रतिनिधित्व भी ठीक है ,लेकिन up हो या बिहार हर जगह कायस्थों की राजनीतिक स्थिति दयनीय है ,यही नही केंद्र की राजनितिं में भी कायस्थ गायब है, फिलहाल में एक भी केंद्रीय मंत्री कायस्थ नही है |
मुझसे कई भाई पूछते है कि भैया किसी ठाकुर को टिकट मिल जाएगा तो आपका क्या भला होगा ?
मैं उनसे कहता हूं कि डायरेक्ट भला तो नही होगा लेकिन इनडायरेक्ट काफी भला होगा ,अगर कल को मैं राजनितिं में आऊ तो मेरा मनोबल तो इतना ऊंचा होगा कि मैं उस सीट के लिए दावेदारी कर सकू ,मुझे ये तो नही कहा जायेगा कि नही आपकी इस सीट पर दावेदारी नही बनती ,कम से कम एक नाकाबिल स्वजातीय मेरे लिए रास्ता तो बनाकर जाएगा |
जो लोग मुझे जानते है वो ये भली भांति जानते है कि व्यक्तिगत जीवन मे जातिवाद से दूर हु ,मेरे रूममेट लड़के OBC ही रहे है, बेस्ट फ्रेंड जो है वो OBC ही है लेकिन मैं राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व के लिए कट्टर जातिवादी हु क्योंकि मुझे भली भांति पता है कि लोकतंत्र में अगर मांग नही करोगे और चुप चाप जिंदाबाद मुर्दाबाद करते रहोगे तो कायस्थ ऐसी स्थिति आने में देर नही लगेगी |
बाकी मैं कायस्थ भाइयों के साथ हु,मैं तो कहता हूं उन्हें बिहार विधानसभा में मिनिमम 5 सीट,1 लोकसभा सीट,1 राज्यसभा और सन्गठन में अच्छे पद की मांग करनी चाहिए |इतना तो उनका हक बनता ही है ..