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NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा इस्तीफा; PM मोदी को भेजी चिट्ठी, बोले- 'छात्रों का भवि...
25/07/2026

NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा इस्तीफा; PM मोदी को भेजी चिट्ठी, बोले- 'छात्रों का भविष्य राजनीति से ऊपर'

नई दिल्ली: देश में NEET-UG परीक्षा को लेकर मचे भारी बवाल, जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को भेज दिया है। सोशल मीडिया पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया कि उनके लिए देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक टकराव या विवाद से कहीं ऊपर है।

इस्तीफे की वजह और चिट्ठी की बड़ी बातें:
प्रधानमंत्री को भेजी अपनी चिट्ठी में धर्मेंद्र प्रधान ने निम्नलिखित प्रमुख बातें लिखी हैं:

छात्रों का भविष्य सर्वोपरि: उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव की वजह से अधर में लटके या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके। इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।

सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई: धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिलते ही सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई, दोबारा परीक्षा कराई गई और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया।

राजनीति और दुष्प्रचार से दुख: उन्होंने लिखा कि 21 जून को दोबारा सफलतापूर्वक परीक्षा कराई गई और 16 जुलाई को नतीजे भी आ गए, जिसमें गरीब और वंचित परिवारों के कई बच्चों ने सफलता पाई। लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने राजनीति चमकाने के लिए छात्रों को गुमराह किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।

व्यथित करने वाली घटनाएं: धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें अंदर से बेहद व्यथित किया है। यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य का सवाल है।

चिट्ठी के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और अपने मंत्रालय के सहयोगियों का आभार जताया और कहा कि वे आगे भी सार्वजनिक जीवन में देश के युवाओं और भारत माता की सेवा में निष्ठा से लगे रहेंगे।

बताओ ये क्या है?
16/07/2026

बताओ ये क्या है?

वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट (West Asia) से इस वक्त की सबसे बड़ी, भयानक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। होर्मुज स...
08/07/2026

वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट (West Asia) से इस वक्त की सबसे बड़ी, भयानक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद, अमेरिका ने बीती रात ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और शक्तिशाली सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के भीतर 80 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की है। इस भारी सैन्य हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने नाटो (NATO) समिट के दौरान ईरान के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंकते हुए 'सीजफायर खत्म' होने की घोषणा कर दी है।

डोनाल्ड ट्रम्प का सबसे आक्रामक बयान— मुख्य बातें:
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के रवैये पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

'सीजफायर पूरी तरह खत्म': राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा, "जहां तक मेरा सवाल है, ईरान के साथ समझौता और सीजफायर अब पूरी तरह खत्म (Over) हो चुका है। अब उनके साथ बातचीत में समय बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है।"

बीमार मानसिकता का आरोप: ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार करते हुए ट्रम्प ने कहा, "ईरान को बीमार मानसिकता वाले, क्रूर और हिंसक लोग चला रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से अब कोई डील नहीं करना चाहता।"

जनाजे के बीच रॉकेट दागने पर भड़के: ट्रम्प ने तंज कसते हुए गुस्सा जाहिर किया और कहा, "हमने उनसे कहा था कि जाकर अपने पूर्व नेता (अयातुल्ला खामेनेई) का अंतिम संस्कार शांति से करो, लेकिन वो अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में जहाजों पर रॉकेट दागने लगे। यह कतई बर्दाश्त नहीं होगा।"

क्यों भड़का अमेरिका और रातभर में क्या हुआ?:

कमर्शियल जहाजों पर हमला: दरअसल, पिछले 24 घंटों में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल तेल और गैस टैंकरों को निशाना बनाया था, जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और सीजफायर का खुला उल्लंघन माना।

80 से ज्यादा ठिकाने तबाह: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी विमानों और ड्रोनों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च पैड्स और तटीय रडार केंद्रों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है।

देश में बाल विवाह (Child Marriage) और नाबालिगों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ...
08/07/2026

देश में बाल विवाह (Child Marriage) और नाबालिगों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से एक बेहद बड़ा, कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि बाल विवाह पर रोक लगाने वाले कानून देश के सभी नागरिकों और धर्मों पर समान रूप से लागू होते हैं। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) से ऊपर नहीं हो सकता।

कानून की सर्वोच्चता और हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणियां— मुख्य बातें:
अदालत द्वारा दी गई इस व्यवस्था के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

पॉक्सो एक्ट है सर्वोपरि: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) एक विशेष और धर्मनिरपेक्ष (Secular) कानून है। यह देश के बच्चों की सुरक्षा के लिए है, इसलिए यह किसी भी धार्मिक या पर्सनल लॉ से ऊपर माना जाएगा।

सभी धर्मों पर लागू होगी रोक: कोर्ट ने साफ किया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नाबालिग बच्चों के भविष्य और अधिकारों की रक्षा करना है। इसे किसी भी धर्म या पर्सनल लॉ के नाम पर नजरअंदाज या उल्लंघन नहीं किया जा सकता। यह रोक देश के हर नागरिक पर अनिवार्य रूप से लागू होती है।

पर्सनल लॉ की आड़ में बचाव नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्सनल लॉ की आड़ लेकर नाबालिग बच्चों की शादी को कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता। बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संरक्षण किसी भी रीति-रिवाज से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

देश में छिड़ी नई कानूनी बहस:
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद देश में बाल विवाह के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई को एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इस फैसले ने एक बार फिर देश में पर्सनल लॉ की सीमाओं और बाल अधिकारों की सर्वोच्चता पर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): राम मंदिर में कथित चढ़ावा और चंदा चोरी (Donation Embezzlement) के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी सि...
08/07/2026

अयोध्या (उत्तर प्रदेश): राम मंदिर में कथित चढ़ावा और चंदा चोरी (Donation Embezzlement) के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी सियासी और धार्मिक घमासान के बीच अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक में बड़ा कदम उठाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया है। वहीं, ट्रस्ट के कद्दावर सदस्य कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) को ट्रस्ट का नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है।

इस्तीफे की वजह और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल— मुख्य बातें:
ट्रस्ट की इस तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

आरोपों के बीच लिया गया फैसला: राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण सामने आने और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद, दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है।

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बयान: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के नियमों के तहत दिए गए इस्तीफों को स्वीकार करना अनिवार्य था। हालांकि, ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण में चंपत राय के ऐतिहासिक और अमूल्य योगदान की सराहना भी की।

बैठक से बाहर रहे आरोपी पदाधिकारी: इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान तीनों आरोपी पदाधिकारी— चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव पूरी तरह से बैठक से बाहर रहे और उनकी अनुपस्थिति में ही यह बड़ा फैसला लिया गया।

कौन हैं नए महासचिव कृष्ण मोहन?: चंपत राय की जगह लेने वाले कृष्ण मोहन 1978 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हैं। खास बात यह है कि कृष्ण मोहन ने ही राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी को लेकर थाना रामजन्मभूमि में 8 नामजद लोगों के खिलाफ पहली एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी। फरवरी 2025 में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।

प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए एक व्यापक ओवरहॉल किया जाएगा। अब 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की अगली बैठक में कुछ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

देश की सियासत और विशेषकर कांग्रेस खेमे से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर चढ़...
08/07/2026

देश की सियासत और विशेषकर कांग्रेस खेमे से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जारी भारी विवाद के बीच, कांग्रेस के बेहद वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का बड़ा ऐलान कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने साफ किया है कि अब वे अपनी जिंदगी का अगला पड़ाव केवल और केवल धर्म की रक्षा के लिए समर्पित करेंगे।

80 की उम्र, शानदार सियासी सफर और संन्यास की वजह— मुख्य बातें:
अपने इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए दिग्विजय सिंह ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं:

पार्टी हाईकमान को दी जानकारी: दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने खुद कांग्रेस हाईकमान से बात की है और कहा है कि अब चुनावी राजनीति में उनकी जगह किसी अन्य चेहरे या नेता को आगे लाया जाना चाहिए।

अब सिर्फ धर्म की रक्षा: उन्होंने अपने भविष्य के संकल्प को स्पष्ट करते हुए दोटूक शब्दों में कहा, "अब मेरा काम सिर्फ धर्म रक्षा है। इसमें कोई भी राजनीति नहीं होगी।"

राजनीतिक उपलब्धियों का सफरनामा: अपने लंबे और कद्दावर राजनैतिक करियर को याद करते हुए सिंह ने कहा, "मैं अब 80 साल का हो गया हूँ। मेरी पार्टी ने मुझे पांच बार विधायक बनाया, दो बार लोकसभा से सांसद बनाया और दो बार राज्यसभा से सांसद बनाया।"

राम मंदिर विवाद के बीच आया बड़ा फैसला:
राजनैतिक गलियारों में दिग्विजय सिंह के इस अचानक आए फैसले को राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। दिग्विजय सिंह इस मुद्दे पर लगातार मुखर रहे हैं, और अब राजनीति से पूरी तरह दूरी बनाकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने के उनके इस फैसले ने देश के राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। माना जा रहा है कि उनके इस कदम के बाद मध्य प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस के भीतर बड़े सांगठनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Singh

“मस्जिद में कोई जात नहीं पूछता, मंदिर में जात पूछी जाती है” — नेहा भारती का बयानसामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते...
06/07/2026

“मस्जिद में कोई जात नहीं पूछता, मंदिर में जात पूछी जाती है” — नेहा भारती का बयान

सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नेहा भारती ने कहा कि जब वह मस्जिद जाती हैं तो कोई उनसे उनकी जात नहीं पूछता, जबकि मंदिर में जात पूछे जाने का अनुभव होता है। उन्होंने इस टिप्पणी के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर सवाल उठाए।

नेहा भारती का यह बयान सामाजिक समानता और धार्मिक स्थलों में भेदभाव को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में सामने आया है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस विषय पर बहस तेज हो गई है।

धार्मिक स्थलों पर भेदभाव और सामाजिक समानता का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। इस मामले में अलग-अलग लोगों और संगठनों की अलग-अलग राय है।

उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव होने में अभी समय बाकी है, लेकिन राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां और जुबानी जंग अभी स...
06/07/2026

उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव होने में अभी समय बाकी है, लेकिन राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां और जुबानी जंग अभी से चरम पर पहुंच चुकी हैं। समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने सूबे की सियासत को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। शिवपाल यादव ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए साफ किया है कि प्रदेश की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है।

सपा की सरकार और अखिलेश यादव की ताजपोशी— शिवपाल यादव के दावे की मुख्य बातें:
पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडिया के सामने दिए गए इस बड़े बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

बीजेपी की विदाई का दावा: शिवपाल सिंह यादव ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि उत्तर प्रदेश में इस बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसी भी कीमत पर वापस नहीं आने वाली है। जनता बीजेपी की नीतियों से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है।

2027 में सपा की प्रचंड जीत: उन्होंने दावा किया कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। पार्टी पूर्ण और प्रचंड बहुमत के साथ सूबे में अपनी सरकार बनाने जा रही है।

अखिलेश यादव होंगे मुख्यमंत्री: शिवपाल यादव ने साफ तौर पर ऐलान किया कि चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे।

विपक्ष और आंतरिक साजिशों पर प्रहार: अपने दौरों के दौरान शिवपाल यादव ने विपक्षी नेताओं और अफवाह फैलाने वालों को भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को कमजोर करने या उसमें फूट डालने की कोशिश करने वाले तमाम राजनीतिक षड्यंत्र पूरी तरह नाकाम साबित होंगे।

गरमाई उत्तर प्रदेश की राजनीति:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवपाल यादव का यह बयान सपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और 2027 के चुनावी मोर्चेबंदी को धार देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लोकसभा चुनावों के बाद से ही समाजवादी पार्टी लगातार जमीन पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। शिवपाल यादव के इस खुले दावे के बाद अब उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर बेहद तेज होना तय माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक नाबालिग लड़की के कथित जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion) के प्रयास का गंभीर मामला सा...
06/07/2026

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक नाबालिग लड़की के कथित जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion) के प्रयास का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में गहन पड़ताल के बाद कुल 7 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। तीन दिनों तक चली डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित 11 गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

📱 3 दिन की जांच और डिजिटल सबूतों ने खोली पोल
यह मामला 3 जुलाई को कोतवाली थाने पहुंचा था, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की:

चैट और डेटा स्कैन: पुलिस ने किशोरी के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की।

शनिवार रात कार्रवाई: ठोस सबूत मिलने के बाद पुलिस ने शनिवार देर रात सातों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

🩰 डांस क्लास से शुरू हुई थी साजिश!
पीड़िता के पिता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कुछ चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं:

शुरुआती मुलाकात: पीड़ित 13 वर्षीय किशोरी स्थानीय स्तर पर डांस सीखने जाती थी। वहीं उसकी मुलाकात एक अन्य नाबालिग किशोरी से हुई।

बढ़ता दबाव: आरोप है कि इस मुलाकात के बाद कुछ अन्य लोग भी किशोरी के संपर्क में आए और धीरे-धीरे उस पर धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक दबाव बनाने लगे।

मोबाइल पर भेजे जाते थे मैसेज:
परिवार का दावा है कि आरोपियों द्वारा किशोरी के मोबाइल फोन पर धर्म परिवर्तन से जुड़े कई संदिग्ध मैसेज और निर्देश भेजे गए थे, ताकि उसे प्रभावित किया जा सके।

🔍 ऐसे सामने आया पूरा मामला
घरवालों को काफी समय से बेटी की बदलती गतिविधियों और उसके मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर संदेह हो रहा था। जब माता-पिता ने बेटी का फोन चेक किया, तो उसमें मिली चैट्स ने उनके होश उड़ा दिए। इसके तुरंत बाद परिजनों ने बिना देर किए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

👮 पुलिस का क्या कहना है?
इटावा पुलिस के अनुसार, मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। डिजिटल डेटा और बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी आरोपों की सत्यता उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच के आधार पर तय की जाएगी।

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताब...
06/07/2026

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) ने चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से वर्तमान 25 प्रतिशत से अधिक को नियमित (स्थायी) सेवा में बनाए रखने का एक बड़ा प्रस्ताव सरकार को भेजा है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है।

🔄 क्या है मौजूदा नियम और नया प्रस्ताव?
अभी का नियम: वर्तमान प्रावधान के अनुसार, 4 साल की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर स्थायी तौर पर सेना में रिटेन (नियमित) किया जाता है, जबकि शेष को सेवामुक्त कर दिया जाता है।

नौसेना (Navy) का प्रस्ताव: भारतीय नौसेना ने सबसे बड़ा बदलाव सुझाया है। नौसेना ने स्थायी सेवा में रखने का यह प्रतिशत 25% से बढ़ाकर सीधे 75% करने की मांग की है।

थल सेना (Army) और वायुसेना (Air Force) का प्रस्ताव: इन दोनों अंगों ने स्थायीकरण के इस आंकड़े को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।

⚖️ रक्षा मंत्रालय में समीक्षा जारी
सूत्रों के अनुसार, सेनाओं के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) में चर्चा हो सकती है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक मंजूरी या अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

एक और विकल्प पर भी विचार:
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सरकार कुल कोटे (Overall Quota) में बदलाव नहीं भी करती है, तो भी कुछ विशेष और तकनीकी इकाइयों (Specialized Units) में निर्धारित 25% के भीतर ही अधिक संख्या में योग्य अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

📈 भर्ती संख्या में भी होगी भारी बढ़ोतरी
सेना में जवानों की कमी को दूर करने और बलों की परिचालन क्षमता (Operational Capability) को और मजबूत करने के लिए भर्ती का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है:

पिछला चक्र: पिछले वर्ष करीब 70 हजार अग्निवीरों की भर्ती की गई थी।

आगामी चक्र: अगले भर्ती चक्र में इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 90 हजार किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

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