10/03/2026
क्रांतिज्योति माता Savitribai Phule की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित, शिक्षा और समानता के लिए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प
सिधौली (सीतापुर)। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारिका एवं महिला शिक्षा की अग्रदूत क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि (10 मार्च) के अवसर पर सिधौली क्षेत्र में एक श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं तथा बहुजन समाज के जागरूक नागरिकों ने भाग लेकर माता सावित्रीबाई फुले को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ उपस्थित रहे। उन्होंने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया और कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन त्याग, संघर्ष और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जिस समय महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा से दूर रखा जाता था, उस समय सावित्रीबाई फुले ने समाज में शिक्षा की अलख जगाकर एक ऐतिहासिक सामाजिक क्रांति की शुरुआत की।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर समाज में शिक्षा और समानता का जो आंदोलन शुरू किया, उसने भारत के सामाजिक इतिहास को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले को विद्यालय जाते समय समाज के कट्टरपंथी तत्वों के विरोध और अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और महिलाओं तथा वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा देने का कार्य निरंतर जारी रखा।
उन्होंने कहा कि आज समाज में महिलाओं की शिक्षा और भागीदारी जिस स्तर तक पहुंची है, उसमें सावित्रीबाई फुले जैसे महान व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपने जीवन का प्रमुख लक्ष्य बनाएं और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा समाज में समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष अभय प्रताप सिंह त्यागी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जो उनके संघर्ष का परिणाम है।
प्रदेश उपाध्यक्ष बंसराज भारती ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने समाज में व्याप्त जातिगत और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समानता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने में सक्षम हैं।
राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सोनम गौतम ने कहा कि सावित्रीबाई फुले महिलाओं के अधिकारों की सशक्त प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि आज भी हमें उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए कार्य करना चाहिए।
प्रदेश उपाध्यक्ष मीना भारती ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर समाज को नई सोच दी।
डॉ. कुलदीप गौतम ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का आधार भी है। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को समाज सुधार का सबसे प्रभावी साधन बनाया।
सुनीत चौधरी ने कहा कि समाज में समानता और न्याय स्थापित करने के लिए शिक्षा का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि हमें समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए।
प्रदीप बौद्ध ने कहा कि बहुजन समाज के उत्थान के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन में इसी दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया।
अनवर बक्श ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का योगदान केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पूरे समाज को जागरूक करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमें उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपनाने तथा समाज में शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और महिलाएं उपस्थित रहे और सभी ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।