09/07/2026
#जेवर_विधानसभा: क्या इस बार गुर्जर समाज के प्रतिनिधित्व की बारी है?
उत्तर प्रदेश की जेवर विधानसभा इन दिनों राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दलों और संभावित दावेदारों के बीच राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी में भी टिकट को लेकर कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार पार्टी सामाजिक समीकरण, जनसंख्या और स्थानीय नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए गुर्जर समाज से प्रत्याशी घोषित करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों और क्षेत्र के अनेक लोगों का मानना है कि जेवर विधानसभा में गुर्जर समाज का प्रभाव उल्लेखनीय है। विधानसभा में इस समाज के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक मानी जाती है। वहीं पिछले दो विधानसभा चुनावों में ठाकुर समाज के प्रतिनिधि विधायक रहे हैं। ऐसे में अनेक स्थानीय कार्यकर्ताओं और नागरिकों का तर्क है कि इस बार सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन के दृष्टिकोण से गुर्जर समाज को अवसर दिया जाना चाहिए।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय नेतृत्व का है। चुनाव केवल जातीय समीकरणों से नहीं, बल्कि जनता के बीच सक्रियता, उपलब्धता और विश्वास से भी जीते जाते हैं। इस संदर्भ में श्री नरेंद्र भाटी 'डाढ़ा' का नाम प्रमुखता से सामने आता है। वे लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और आम जनता के सुख-दुख में सहभागी रहने वाले जननेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। चाहे दिन हो या रात, किसी भी सामाजिक या व्यक्तिगत समस्या में उनकी उपस्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय रहती है। यही कारण है कि गांव-गांव और गली-मोहल्लों में उनका नाम लगातार सुनाई देता है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में श्री नरेंद्र भाटी डाढ़ा ने लगभग 50 हजार मत प्राप्त कर अपनी मजबूत जनस्वीकृति का परिचय दिया था। भले ही उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उस चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि जेवर की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद भी उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए रखी, जिससे उनका जनाधार और मजबूत हुआ है।
इसके विपरीत, क्षेत्र में टिकट के अन्य इच्छुक दावेदार भी हैं, किंतु स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा रहती है कि उनमें से कुछ की क्षेत्र में निरंतर उपस्थिति या स्थानीय जुड़ाव उतना मजबूत नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से किसी भी प्रत्याशी की सबसे बड़ी पूंजी जनता के बीच उसका निरंतर संपर्क और विश्वास होता है।
भारतीय जनता पार्टी समय-समय पर संगठन, कार्यकर्ता, सामाजिक संतुलन, जीत की संभावना और स्थानीय स्वीकार्यता जैसे अनेक मानकों पर उम्मीदवारों का चयन करती रही है। यदि पार्टी जेवर विधानसभा में इन सभी पहलुओं का समग्र मूल्यांकन करती है, तो गुर्जर समाज से एक मजबूत और स्थानीय चेहरे पर विचार होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
अंततः लोकतंत्र में अंतिम निर्णय राजनीतिक दल के नेतृत्व और जनता के हाथ में होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जेवर विधानसभा की राजनीति यह संकेत अवश्य दे रही है कि इस बार स्थानीय नेतृत्व, जनसंपर्क, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक स्वीकार्यता जैसे मुद्दे टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन्हीं कारणों से अनेक राजनीतिक पर्यवेक्षक और क्षेत्र के नागरिक श्री नरेंद्र भाटी 'डाढ़ा' को भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक मजबूत संभावित दावेदार के रूप में देख रहे हैं।