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इसमें कुछ सच्चाई ऐसी है जो नकदी नहीं जा सकती है कृपया इसको सभी लोग ध्यान पूर्वक पड़े अच्छे से कमेंट करें इसमें इसमें से ...
01/04/2026

इसमें कुछ सच्चाई ऐसी है जो नकदी नहीं जा सकती है कृपया इसको सभी लोग ध्यान पूर्वक पड़े अच्छे से कमेंट करें इसमें इसमें से कश्यप श्रेष्ठ है या ब्राह्मण

19/03/2026
07/03/2026

👉मनुस्मृति के विरुद्ध अंग्रेजो ने सन् 1795 के अधिनियम 11 द्वारा शुद्रों (OBC) को भी सम्पत्ति रखने का कानून बनाया जिसका सवर्णो, विशेषकर ब्राह्मणों, ने विरोध किया। इस अधिनियम से पूर्व जाटों, अहीरों, गुर्जरों, पटेलों, कायस्थों, आदि शूद्र जातियों को भूमि का मालिकाना हक नहीं था।

👉मनुस्मृति के विरुद्ध, सन् 1773 में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय व्यवस्था "समानता के सिद्धांत" पर आधारित की गई। 6 मई, 1775 को इसी कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण 'नन्द कुमार देव" को फांसी दी गई थी।

👉सन् 1804 के अधिनियम 3 द्वारा अंग्रेजों ने कन्या हत्या पर रोक लगाई। (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर या माँ के स्तन पर धतूरे का लेप लगा कर या गढ्ढा खोदकर उसमें दूध डालकर कन्या को डुबो कर मारा जाता था।)

👉मनुस्मृति के विरुद्ध, सन् 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार सभी जातियों, दलितों, महिलाओं और धर्मों के लोगों के लिए समान कर दिया।

👉मनुस्मृति के विरुद्ध, सन् 1813 में ही अंग्रेजों ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर कर दिया।

👉मनुस्मृति के विरुद्ध, सन् 1817 में अंग्रेजों ने समान नागरिक संहिता कानून बना कर प्रत्येक नागरिक के लिए समान न्याय व्यवस्था की। (1817 से पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर घोर भेदभाव पूर्ण था। एक अपराध के लिए ब्राह्मण को कोई सजा नही जबकि उसी अपराध के लिए शुद्र को कठोरतम दंड दिया जाता था।)

👉सन् 1819 के अधिनियम 7 द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शुद्र स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई। (शुद्रों की शादी होने पर दुल्हन को दूल्हे के घर न जाकर कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक सेवा देनी पड़ती थी जिससे शूद्र स्त्रि तो शुद्ध/पवित्र होती लेकिन हरामी ब्राह्मण अपवित्र नहीं होता था)। ब्राह्मण शूद्रों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोडते थे।

👉सन् 1830 में अंग्रेजों ने नरबलि प्रथा पर पूर्ण रोक लगाई। (देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों (स्त्री या पुरुष ) को मन्दिर में सिर पटक पटक कर मार कर भेंट चढ़ा देता था।)

👉सन् 1833 के अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव पर अंग्रेजों ने रोक लगा दी जिससे योग्यता ही सेवा का आधार स्वीकार किया गया तथा कम्पनी के अधीन किसी भी भारतीय नागरिक को जन्म-स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार पर पद से वंचित नही रखा जा सकता था।

👉अंग्रेजों ने सन् 1834 में पहले भारतीय विधि आयोग का गठन किया। कानून बनाने की व्यवस्था जाति, वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

👉अंग्रेजों ने सन् 1835 में प्रथम पुत्र को गंगा दान प्रथा पर रोक लगाई। (ब्राह्मणों ने नियम बनाया था कि शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो उसे गंगा में फेंक देना चाहिये। आमतोर पर पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं स्वस्थ पैदा होता है। यह बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न पाए इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे।)

👉7 मार्च, 1835 को लार्ड मैकाले ने शिक्षा नीति को राज्य का विषय बना कर उच्च शिक्षा को अंग्रेजी भाषा के माध्यम से देना अनिवार्य बना दिया। मैकाले ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना दिया।

👉1835 में ही कानून बना कर अंग्रेजों ने शुद्रों/दलितों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

👉दिसम्बर 1829 के अधिनियम 17 द्वारा औरतों को मृत पति के साथ जलाना अवैध घोषित कर 'सती प्रथा' का अंत किया।

👉अंग्रेजों ने देवदासी प्रथा पर रोक लगाई। ब्राह्मणों के दबाव से शुद्र अपनी लडकियों को मन्दिरों की सेवा के लिए दान कर देते थे। मन्दिर के पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चे पैदा होने पर उन्हें फैंक देते थे। और उस बच्चे को हरिजन नाम देते थे। 1921 की जातिवार जन गणना के आंकड़ों के अनुसार अकेली मद्रास प्रेजीडेंसी में कुल जनसंख्या 4 करोड़ 23 लाख थी जिसमें 2 लाख से भी अधिक देव- दासियां मन्दिरों में अनाथ पड़ी थी। यह कुप्रथा अभी भी दक्षिण भारत के कुछ मन्दिरो में अवैध रूप से चल रही है।

👉अंग्रेजों ने 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

👉1849 में अंग्रेजों ने कलकत्ता में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित किया।

👉1857 में अंग्रेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के 3 विश्व विद्यालय कलकत्ता, मद्रास और मुम्बई में स्थापित किये। 1902 मे विश्वविद्यालय आयोग का गठन किया।

👉6 अक्टूबर,1860 को अंग्रेजों ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) बनाया जिसके द्वारा लार्ड मैकाले ने भारत में जाति, वर्ण, धर्म और लिंग के बिना एक समान दंड विधान (Criminal Law) लागु कर शदियों से जकडे शूद्रों की जंजीरों को काट डाला।

👉1863 मे अंग्रेजों ने कानून बनाकर चरक पूजा पर रोक लगाई। (आलिशान भवन, पुल या कूआँ निर्माण पर शुद्रों को पकड़ कर जिन्दा चिनवा दिया जाता था। ब्राह्मणों ने ऐसी मान्यता बना रखी थी कि ऐसा करने से भवन, पुल या कूँआ ज्यादा दिनों तक टिकाऊ रहेगें।)

👉1867 में बहू विवाह प्रथा पर पूरे देश में प्रतिबन्ध लगाने के उद्देश्य से अंग्रेजों की बंगाल सरकार ने एक कमेटी गठित की।

👉1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक हुई। 1948 में पण्डित नेहरू ने कानून बना कर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।

👉1872 में अंग्रेजों ने सिविल मैरिज एक्ट द्वारा 14 वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष से कम आयु के लड़को का विवाह वर्जित कर बाल विवाह पर रोक लगाई।

👉अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में भर्ती किया लेकिन गांधी, नेहरु जैसे सवर्णों के दबाव के कारण अंग्रेजों ने 1946 में चमार रैजिमैंट को बंद कर दिया तथा महार रेजिमैंट में भर्तियां सभी जातियों के लिए खोल दी गई।

👉रैयत वाणी पद्धति (Land Revenue System) बनाकर अंग्रेजों ने प्रत्येक पंजीकृत किसान को भूमि का स्वामी बनाकर उनसे बिना बिचौलिए के सीधा कृषि लगान लिया जाता था। (रैयत किसान को कहते हैं)

👉1918 में अंग्रेजों ने साऊथ बरो कमेटी को भारत में भेजा। यह कमेटी भारत में सभी जातियों का विधि मण्डल (कानून बनाने की संस्था) में भागीदारी के लिए आया था। छत्रपति शाहूजी महाराज के कहने पर पिछङो के नेता भाष्कर राव जाधव ने एवम् अछूतों के नेता डा बी आर अम्बेडकर ने अपने लोगों की विधि मण्डल में भागीदारी के लिये मेमोरेंडम दिया।

👉1919 में अंग्रेजो ने भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।

👉1919 में ही अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर यह कह कर रोक लगा दी थी कि ब्राह्मणों के अंदर न्यायिक चरित्र यानि निष्पक्षता नही होता।

👉25 दिसम्बर,1927 को डा अम्बेडकर द्वारा मनुस्मृति का दहन किया गया। मनुस्मृति में शूद्रों और महिलाओं को गुलाम तथा भोग की वस्तु समझा जाता था। एक पुरूष को तो अनगिनत शादियां करने का धार्मिक अधिकार था लेकिन महिला अधिकार विहीन तथा दासी की स्थिति में थी। एक-एक औरत के कई-कई सौतने हुआ करती थी। मनुस्मृति में औरतों और शूद्रों के लिए केवल गुलाम होना ही लिखा है जिसको दुष्टबुद्धि मनु ने धर्म का नाम दिया।

👉1 मार्च,1930 को डा. अम्बेडकर द्वारा काला राम मन्दिर प्रवेश के लिए नासिक में आंदोलन चलाया जिसका अंग्रेजों और मुसलमानों ने समर्थन किया।

1927 में अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों को सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।
👉नवम्बर, 1927 में अंग्रेजों ने साइमन कमीशन की नियुक्ति की जो 1928 में भारत के अछूत लोगों की स्थिति का सर्वे करने और उनको अतिरिक्त अधिकार देने के लिए भारत आया। इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी और लाला लाजपत राॅय ने इसके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया जिस कारण साइमन कमीशन अधूरी रिपोर्ट लेकर वापस चला गया। इस पर अंतिम फैसले के लिए अंग्रेजों ने भारतीय प्रतिनिधियों को 12 नवम्बर, 1930 को लन्दन गोलमेज बैठक में बुलाया।

👉24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने 'कम्युनल अवार्ड' घोषित किया जिसमें दलितों को दिए गए प्रमुख अधिकार निम्न थे:-

A--वयस्क मताधिकार;

B--विधान मण्डलों और संघीय सरकार में जनसंख्या के अनुपात में अछूतों को आरक्षण का अधिकार।

C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह अछूतों (SC/ST) को भी प्रथक निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) का अधिकार मिला जिसके तहत प्रथक निर्वाचन क्षेत्रों में केवल अछूत प्रतिनिधि ही खड़े होंगे और उनका चुनाव भी केवल अछूत मतदाता ही करेगें।

D--प्रतिनिधियों को चुनने के लिए अछूतों को दो बार वोट करने का अधिकार मिला जिसमें एक बार सिर्फ अपने प्रतिनिधियों को वोट देंगे तथा दूसरी बार सामान्य प्रतिनिधियों को वोट देगे।

👉19 मार्च, 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्ध डा. अम्बेडकर ने मुम्बई विधान परिषद में आवाज उठाई। जिसके बाद अंग्रेजों ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया।

👉अंग्रेजों ने 1 जुलाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय की कार्य साधक कौंसिल में लेबर मेंबर (Cabinet Minister के बराबर) बनाया। मजदूरों की भलाई के लिए डा अम्बेडकर ने अनेकों कानून बनाए, उदाहरणत: 14 घंटे की ड्यूटी को 8 घंटे की ड्यूटी, रविवार की छुट्टी, बेसिक वेतन का 8.3 % Provident Fund, maternity leaves, इत्यादि।

1937 में अंग्रेजों ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट का चुनाव करवाया।

👉1942 में अंग्रेजों से डा अम्बेडकर ने 50 लाख हेक्टेयर (1,23,55,000 एकड़) भूमि को अछूतों में बाँट देने के लिए अपील की थी जिसके लिए अंग्रेजों ने 20 वर्षों की समय सीमा तय की थी लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद सवर्ण शासकों ने कुछ नहीं किया।।

अंग्रेजों ने शासन प्रशासन में ब्राह्मणों की भागी दारी को 100% से घटाकर मात्र 6.5% पर लाकर खड़ा कर दिया था जिससे वे तिलमिला उठे थे।

इन्ही सब कारणों की वजह से ही ब्राह्मणों ने अग्रेजों के खिलाफ़ अपनी आजादी की क्रांति शुरू की दी क्योकि अग्रेजों ने शुद्रों, दलितों/अछूतों और महिलाओं को सारे अधिकार दे दिये थे और सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी में लाकर खडा कर दिया था जो ब्राह्मणों को बिल्कुल पसंद नहीं था।

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