20/05/2026
अनुमंडल अस्पताल से डिलेवरी मरीजों को अवैध नर्सिंग होम भेजने का मामला गरमाया
स्वास्थ्य विभाग में दायर परिवाद पर 25 मई को सुनवाई, अस्पताल कर्मियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
मधुबनी/बेनीपट्टी।
बेनीपट्टी अनुमंडल अस्पताल से डिलेवरी मरीजों को कथित रूप से अवैध निजी नर्सिंग होम भेजे जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस मामले को लेकर सामाजिक सह आरटीआई कार्यकर्ता त्रिलोक नाथ झा द्वारा स्वास्थ्य विभाग में दायर लोक शिकायत परिवाद के बाद प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, आगामी 25 मई 2026 को सुबह 11 बजे स्वास्थ्य विभाग, पटना स्थित विभागीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कार्यालय में सुनवाई निर्धारित की गई है। परिवाद में बेनीपट्टी अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक समेत कई स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
परिवादी त्रिलोक नाथ झा ने आरोप लगाया है कि अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित नहीं रहते और मधुबनी स्थित निजी क्लिनिक का संचालन करते हैं। साथ ही आरोप लगाया गया है कि अस्पताल से डिलेवरी एवं अन्य मरीजों को नर्स, आशा कार्यकर्ताओं और कथित बिचौलियों के माध्यम से निजी नर्सिंग होम में भेजा जाता रहा है।
डिलेवरी मरीज को निजी अस्पताल भेजने का आरोप
परिवाद में हाल के एक चर्चित मामले का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि बेनीपट्टी के समीपवर्ती गांव के निवासी राजेश यादव अपनी पत्नी की डिलेवरी करवाने अनुमंडल अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मौजूद अस्पताल कर्मियों एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने तथा डॉक्टर के देर से आने की बात कहकर उन्हें निजी अस्पताल जाने की सलाह दी गई।
इसके बाद मरीज को एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां परिजनों ने कथित रूप से आर्थिक दोहन एवं शोषण शुरू होने का आरोप लगाया। स्थिति बिगड़ने पर राजेश यादव ने स्थानीय समाजसेवियों को मोबाइल पर सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्काल प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को मामले से अवगत कराया। इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी, डीएसपी तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निजी अस्पताल में छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान वहां भर्ती मरीजों को सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित कराया गया तथा संबंधित निजी अस्पताल को अवैध संचालन के आरोप में सील कर दिया गया। बताया जा रहा है कि हाल ही में सिविल सर्जन द्वारा उक्त संस्थान पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे अवैध घोषित कर बंद करने का आदेश भी जारी किया गया था।
“नेगेटिव लिस्ट” में डालने पर भी सवाल
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व में दायर शिकायत को पहले जिला स्तर से अनुमंडल स्तर पर स्थानांतरित किया गया और बाद में उसे “नेगेटिव लिस्ट” में डाल दिया गया। शिकायतकर्ता ने इसे मामले को कमजोर करने एवं निष्पक्ष कार्रवाई से बचने का प्रयास बताया है।
परिवादी ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि आखिर सरकारी अस्पताल में मरीज को चिकित्सक नहीं होने की बात कहकर क्यों गुमराह किया गया।
CCTV फुटेज और रजिस्टर जांच की मांग
लोक शिकायत परिवाद में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की मांग की गई है। इनमें—
अस्पताल एवं निजी क्लिनिक के CCTV फुटेज का मिलान,
अनुमंडल अस्पताल के ओपीडी एवं इमरजेंसी रजिस्टर की जांच,
निजी क्लिनिक एवं नर्सिंग होम के मरीज रजिस्टर का परीक्षण,
आशा कार्यकर्ताओं, नर्सों एवं कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच,
तथा शिकायत को “नेगेटिव लिस्ट” में डालने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा शामिल है।
“मेडिकल माफियाओं से सांठगांठ” का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोक नाथ झा ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ प्रशासनिक पदाधिकारी एवं कर्मियों की कथित मिलीभगत मेडिकल माफियाओं से हो सकती है, जिसके कारण गरीब मरीजों का शोषण हो रहा है और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की छवि धूमिल हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पताल में समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध रहती, तो मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा नहीं लेना पड़ता। इस तरह की घटनाओं से गरीब परिवारों को आर्थिक एवंमानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों को भी अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करना पड़ता है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है तथा लोगों की नजरें अब 25 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।