Poem Planet

Poem Planet This is poem world. here we enjoy all type of poem ,music and folk song composed by all people

27/09/2025

बाबा!
मुझे उतनी दूर मत ब्याहना

जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर
घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हें

मत ब्याहना उस देश में
जहाँ आदमी से ज़्यादा

ईश्वर बसते हों
जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँ

वहाँ मत कर आना मेरा लगन
वहाँ तो क़तई नहीं

जहाँ की सड़कों पर
मन से भी ज़्यादा तेज़ दौड़ती हों मोटरगाड़ियाँ

ऊँचे-ऊँचे मकान और
बड़ी-बड़ी दुकानें

उस घर से मत जोड़ना मेरा रिश्ता
जिस में बड़ा-सा खुला आँगन न हो

मुर्ग़े की बाँग पर होती नहीं हो जहाँ सुबह
और शाम पिछवाड़े से जहाँ

पहाड़ी पर डूबता सूरज न दिखे
मत चुनना ऐसा वर

जो पोचई और हड़िया में डूबा रहता हो अक्सर
काहिल-निकम्मा हो

माहिर हो मेले से लड़कियाँ उड़ा ले जाने में
ऐसा वर मत चुनना मेरी ख़ातिर

कोई थारी-लोटा तो नहीं
कि बाद में जब चाहूँगी बदल लूँगी

अच्छा-ख़राब होने पर
जो बात-बात में

बात करे लाठी-डंडा की
निकाले तीर-धनुष, कुल्हाड़ी

जब चाहे चला जाए बंगाल, असम या कश्मीर
ऐसा वर नहीं चाहिए हमें

और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ
जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाए

फ़सलें नहीं उगाईं जिन हाथों ने
जिन हाथों ने दिया नहीं कभी किसी का साथ

किसी का बोझ नहीं उठाया
और तो और!

जो हाथ लिखना नहीं जानता हो ‘ह’ से हाथ
उसके हाथ मत देना कभी मेरा हाथ!

ब्याहना हो तो वहाँ ब्याहना
जहाँ सुबह जाकर

शाम तक लौट सको पैदल
मैं जो कभी दुख में रोऊँ इस घाट

तो उस घाट नदी में स्नान करते तुम
सुनकर आ सको मेरा करुण विलाप

महुआ की लट और
खजूर का गुड़ बनाकर भेज सकूँ संदेश तुम्हारी ख़ातिर

उधर से आते-जाते किसी के हाथ
भेज सकूँ कद्दू-कोहड़ा, खेखसा, बरबट्टी

समय-समय पर गोगो के लिए भी
मेला-हाट-बाज़ार आते-जाते

मिल सके कोई अपना जो
बता सके घर-गाँव का हाल-चाल

चितकबरी गैया के बियाने की ख़बर
दे सके जो कोई उधर से गुज़रते

ऐसी जगह मुझे ब्याहना!
उस देश में ब्याहना

जहाँ ईश्वर कम आदमी ज़्यादा रहते हों
बकरी और शेर

एक घाट पानी पीते हों जहाँ
वहीं ब्याहना मुझे!

उसी के संग ब्याहना जो
कबूतर के जोड़े और पंडुक पक्षी की तरह

रहे हरदम हाथ
घर-बाहर खेतों में काम करने से लेकर

रात सुख-दुख बाँटने तक
चुनना वर ऐसा

जो बजाता हो बाँसुरी सुरीली
और ढोल-माँदल बजाने में हो पारंगत

वसंत के दिनों में ला सके जो रोज़
मेरे जूड़े के ख़ातिर पलाश के फूल

जिससे खाया नहीं जाए
मेरे भूखे रहने पर

उसी से ब्याहना मुझे!

निर्मला पुतूल

27/07/2025

||Facebook wall से ||

लोगों के सर ऐब को मढ़ना सीख गये।
हम भी अब बेबात झगड़ना सीख गये।

ठोकर खायी दर्द सहा है हँस-हँस कर,
धीरे-धीरे आगे बढ़ना सीख गये।

उड़ना कब सीखेंगे चिड़िया के बच्चे,
सांप के बच्चे पेड़ पे चढ़ना सीख गये।

यारी का मतलब तब से जाना हमने,
जबसे यारों चेहरा पढ़ना सीख गये।

अपने पेड़ से खुलकर शह पाई तबसे,
पत्ते भी मौसम से लड़ना सीख गये।



16/07/2025

मूर्ख मारे लठ से, ऊपर ही दर्शाए । ज्ञानी मारे ज्ञान से, रोम रोम छिद जाए!

11/08/2024

खैरात में नहीं मिलती कामयाबी,
हुनर को अपने निखारना होता है।
सूरज की पहली किरण यूं ही गर्माहट नहीं देती,
रातों को अपनी अंधेरों में गुजारना होता है।
हुनर से ही तो होती है पहचान,
मंजिल पाना नहीं इतना आसान।
कदमों को चलना पड़ता है हौसले के साथ,
हर मुश्किल को अपनी ताकत बनाना होता है।

01/05/2024

International Labour Day

जाते हैं फुटपाथ पे अखबार बिछा कर,
मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते।।

01/05/2024

International Labour Day
जिन्दगी को
वह गढ़ेंगे जो शिलाएं तोड़ते हैं
जो भगीरथ नीर की निर्भय शिराएं मोड़ते हैं।
यज्ञ को इस शक्ति-श्रम के
श्रेष्ठतम मैं मानता हूं।

ज़िन्दगी को
वह गढ़ेंगे जो खदानें खोदते हैं,
लौह के सोये असुर को कर्म-रथ में जोतते हैं।
यज्ञ को इस श्रम-शक्ति के
श्रेष्ठतम मैं मानता हूं।

ज़िन्दगी को
वह गढ़ेंगे जो प्रभंजन हांकते हैं,
शूरवीरों के चरण से रक्त-रेखा आंकते हैं।
यज्ञ को इस श्रम-शक्ति के
श्रेष्ठतम मैं मानता हूं।

ज़िन्दगी को
वह गढ़ेंगे जो प्रलय को रोकते हैं,
रक्त से रंजित धरा पर शान्ति का पथ खोजते हैं।
यज्ञ को इस शक्ति-श्रम के
श्रेष्ठतम मैं मानता हूं।

मैं नया इंसान हूं इस यज्ञ में सहयोग दूंगा।
ख़ूबसूरत ज़िन्दगी की नौजवानी भोग लूंगा।

-केदारनाथ अग्रवाल

शक्ति और क्षमा              -रामधारी सिंह 'दिनकर'
24/11/2023

शक्ति और क्षमा
-रामधारी सिंह 'दिनकर'

19/11/2023

Address

Apna
Madhubani
847234

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Poem Planet posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Poem Planet:

Share