05/10/2025
सुप्रीम कोर्ट कर चुका साफ : डिफॉल्टर कहना कानून के खिलाफ
यूजीसी द्वारा कुछ विश्वविद्यालयों को यूजीसी द्वारा डिफॉल्टर घोषित किया गया है। प्राइवेट विवि का तर्क है कि यूजीसी अधिनियम 1956 में कहीं भी डिफॉल्टर घोषित करने का प्रावधान नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रो. यशपाल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2005) मामले में स्पष्ट किया था कि राज्य विधायिकाओं द्वारा स्थापित निजी विश्वविद्यालय पूर्णतः वैध और स्वायत्त हैं। इसी तरह, जेपी उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) में निजी संस्थानों की शिक्षा विस्तार में अहम भूमिका को स्वीकारा गया। हाल ही में संदीप विश्वविद्यालय को यूजीसी ने उसे डिफाल्टर लिस्ट में डालकर छात्र छात्राओं पर काफी असर डाली है इससे कई छात्र फ़र्ज़ी यूनवर्सिटी समझने लगें है। ये कहना गलत है फ़र्ज़ी और डिफाल्टर में बहौत अंतर है। संदीप विश्वविद्यालय जो कि NAAC B++ राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद है, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)की एक स्वायत्त संस्था है जो कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे शिक्षा और बुनियादी ढांचे के कुछ मानकों को पूरा करते हैं। यदि आप इस तरह के विश्वविद्यालयों पर ये आरोप लगाते है तो सावधान हो जाएं। आप पर कानूनी करवाई हो सकती है। यूजीसी ने कहीं लिखित नहीं दी है कि विश्वविद्यालय फ़र्ज़ी है या गैर संस्थान है। आप देख सकते है । संदीप विश्विद्यालय ने यूजीसी द्वारा मांगी गई दस्तावेज पूरी तरह से संबित कर दी और यूजीसी ने डिफाल्टर लिस्ट से भी हटा दी है।
भेदभाव पर मप्र लोकायुक्त भी लगा चुका है फटकार : मध्यप्रदेश लोकायुक्त ने भी पूर्व में यूजीसी को चेताया था कि निजी संस्थानों के साथ भेदभावपूर्ण भाषा और आदेश जारी करना उचित नहीं है। फिर भी, बार-बार निजी विवि को टारगेट करने से शिक्षा जगत में असंतोष बढ़ रहा है। प्राइवेट विश्वविद्यालयों का कहना है कि वे न केवल लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा दे रहे हैं बल्कि रिसर्च, नवाचार और रोजगारपरक कार्यक्रमों में भी लगातार देश का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकारी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में प्राइवेट विश्वविद्यालय कहीं अधिक निवेश कर रहे हैं चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्कर हो, डिजिटल शिक्षा हो या नए कोर्स। विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP2020) के लक्ष्यों की प्राप्ति में निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका बेहद अहम है। अगर इन्हें डिफॉल्टर जैसे शब्दों से नीचा दिखाया जाएगा, तो इसका नकारात्मक असर विद्यार्थियों की मानसिकता और शिक्षा की साख पर पड़ेगा। प्राइवेट यूनिवर्सिटी एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि यूजीसी को चाहिए कि वह दंडात्मक रवैया अपनाने की बजाय अकादमिक सहयोग और समान व्यवहार की नीति पर चले।