12/06/2026
UV24news ने ज़ब सुगौली संधि के बारे मे मनोज झा से पूछा तो उन्होंने कहा कि सुगौली संधि मिथिला की ऐतिहासिकता के साथ अन्याय,है और उन्होंने समीक्षा समय कि माँग किए
मिथिला लोकतांत्रिक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज झा ने प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा है कि सुगौली संधि मिथिला की ऐतिहासिकता के साथ ऐसा अन्याय है, जिसे इतिहास ने भूला दिया है। उन्होंने कहा है कि जब भी देश में बंटवारे की बात होती है तो ज़हन में 1947, पंजाब और बंगाल की त्रासदी आती है। बंटवारे का पहला ज़ख्म मिथिला ने 1816 में ही झेल लिया था। सुगौली संधि सिर्फ नेपाल ब्रिटिश युद्ध का अंत नहीं थी। यह मिथिला की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता का विखंडन था। क़रीब 200 साल पहले हुए सिर्फ एक समझौते ने मिथिला को हमेशा के लिए बदल दिया।
मोर्चा अध्यक्ष ने कहा दिसंबर 1815 को सुगौली संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। जहाँ कई लोग इसे केवल भारत और नेपाल के बीच की एक राजनीतिक सीमा के रूप में देखते हैं, वहीं हमारे लिए यह एक अखंड सांस्कृतिक राष्ट्र मिथिला यह भारत सरकार के लिए मिथिला क्षेत्र पर इस संधि के प्रभावों की समीक्षा करने का एक बड़ा अवसर है। हमने अन्य ऐतिहासिक विभाजनों के लिए आयोग बनते और पैकेज मिलते देखे हैं। तो फिर मिथिला के लिए आज तक ऐसा कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री से मिथिला क्षेत्र के हितार्थ आवश्यक क़दम उठाए जाने की माँग की है।मिथिला की ऐतिहासिकता के साथ अन्याय, समीक्षा समय की माँग